{"_id":"6369526d7bc10c117e6503b5","slug":"prize-sentenced-prisoner-arrested-after-21-years-raibaraily-news-lko656088390","type":"story","status":"publish","title_hn":"21 साल बाद इनामी सजायाफ्ता कैदी गिरफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
21 साल बाद इनामी सजायाफ्ता कैदी गिरफ्तार
विज्ञापन
21ऊंचाहार (रायबरेली)। कोतवाली पुलिस ने सोमवार को 21 साल से फरार एक सजायाफ्ता कैदी को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए सजायाफ्ता कैदी की गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था। सजायाफ्ता की कैदी की गिरफ्तारी न होने से जेल और पुलिस महकमे के अफसर हलाकान थे।
पुलिस अधीक्षक आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि ऊंचाहार कोतवाली क्षेत्र के बहेरवा गांव निवासी मो. हासिम को नवंबर 2001 में दुष्कर्म के मामले में सात साल की सजा हुई थी। 21 नवंबर 2001 को जिला कारागार से वह 30 दिनों की सशर्त पैरौल पर छूटा था। इसके बाद वह फरार हो गया। पुलिस उसकी गिरफ्तारी करने में पूरी तरह नाकाम थी। उसकी गिरफ्तारी न होने पर उसके खिलाफ 50 हजार रुपये का ईनाम भी घोषित किया गया। सोमवार को तड़के करीब पांच बजे सूचना मिली कि सजायाफ्ता कैदी मो.हासिम एनटीपीसी ऊंचाहार के पास मौजूद है और कहीं भागने की फिराक में है। इस सूचना पर ऊंचाहार कोतवाल संजय त्यागी, एनटीपीसी चौकी इंचार्ज विवेक कुमार त्रिपाठी की टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी करते हुए सजायाफ्ता कैदी को दबोच लिया। कोतवाल ने बताया कि कैदी को जेल भेजा जा रहा है।
बदल-बदलकर कई राज्यों में रहता था सजायाफ्ता कैदी
रायबरेली। पुलिस के हत्थे चढ़ा सजायाफ्ता कैदी बदल-बदलकर देश के कई प्रांतों में रहकर मजदूरी करता था। खास बात यह थी कि वह मोबाइल का भी प्रयोग नहीं करता था। इससे पुलिस उसकी लोकेशन खोज नहीं पा रही थी। ऊंचाहार कोतवाल संजय त्यागी बताते हैं कि जेल से पैरोल मिलने के बाद वह महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना समेत अन्य कई प्रांतों में रहकर मजदूरी करता था। कुछ दिन रहने के बाद वह अलग-अलग प्रांतों में रहकर मजदूरी करता था, ताकि पुलिस उस तक नहीं पहुंच पाए। 20 दिन पहले सजायाफ्ता कैदी ने अपने भाई को फोन करके परिवार के बारे में जानकारी ली थी। घरवालों के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगाया गाय था। इसकी भनक लगते ही सजायाफ्ता कैदी की धरपकड़ के लिए योजना बनाई गई। सोमवार की सुबह सजायाफ्ता कैदी एनटीपीसी ऊंचाहार पहुंचा तो उसे दबोच लिया गया। (संवाद)
विज्ञापन
बदल-बदलकर कई राज्यों में रहता था सजायाफ्ता कैदी
रायबरेली। पुलिस के हत्थे चढ़ा सजायाफ्ता कैदी बदल-बदलकर देश के कई प्रांतों में रहकर मजदूरी करता था। खास बात यह थी कि वह मोबाइल का भी प्रयोग नहीं करता था। इससे पुलिस उसकी लोकेशन खोज नहीं पा रही थी। ऊंचाहार कोतवाल संजय त्यागी बताते हैं कि जेल से पैरोल मिलने के बाद वह महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना समेत अन्य कई प्रांतों में रहकर मजदूरी करता था। कुछ दिन रहने के बाद वह अलग-अलग प्रांतों में रहकर मजदूरी करता था, ताकि पुलिस उस तक नहीं पहुंच पाए। 20 दिन पहले सजायाफ्ता कैदी ने अपने भाई को फोन करके परिवार के बारे में जानकारी ली थी। घरवालों के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगाया गाय था। इसकी भनक लगते ही सजायाफ्ता कैदी की धरपकड़ के लिए योजना बनाई गई। सोमवार की सुबह सजायाफ्ता कैदी एनटीपीसी ऊंचाहार पहुंचा तो उसे दबोच लिया गया। (संवाद)
विज्ञापन
पुलिस अधीक्षक आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि ऊंचाहार कोतवाली क्षेत्र के बहेरवा गांव निवासी मो. हासिम को नवंबर 2001 में दुष्कर्म के मामले में सात साल की सजा हुई थी। 21 नवंबर 2001 को जिला कारागार से वह 30 दिनों की सशर्त पैरौल पर छूटा था। इसके बाद वह फरार हो गया। पुलिस उसकी गिरफ्तारी करने में पूरी तरह नाकाम थी। उसकी गिरफ्तारी न होने पर उसके खिलाफ 50 हजार रुपये का ईनाम भी घोषित किया गया। सोमवार को तड़के करीब पांच बजे सूचना मिली कि सजायाफ्ता कैदी मो.हासिम एनटीपीसी ऊंचाहार के पास मौजूद है और कहीं भागने की फिराक में है। इस सूचना पर ऊंचाहार कोतवाल संजय त्यागी, एनटीपीसी चौकी इंचार्ज विवेक कुमार त्रिपाठी की टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी करते हुए सजायाफ्ता कैदी को दबोच लिया। कोतवाल ने बताया कि कैदी को जेल भेजा जा रहा है।
विज्ञापन
बदल-बदलकर कई राज्यों में रहता था सजायाफ्ता कैदी
रायबरेली। पुलिस के हत्थे चढ़ा सजायाफ्ता कैदी बदल-बदलकर देश के कई प्रांतों में रहकर मजदूरी करता था। खास बात यह थी कि वह मोबाइल का भी प्रयोग नहीं करता था। इससे पुलिस उसकी लोकेशन खोज नहीं पा रही थी। ऊंचाहार कोतवाल संजय त्यागी बताते हैं कि जेल से पैरोल मिलने के बाद वह महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना समेत अन्य कई प्रांतों में रहकर मजदूरी करता था। कुछ दिन रहने के बाद वह अलग-अलग प्रांतों में रहकर मजदूरी करता था, ताकि पुलिस उस तक नहीं पहुंच पाए। 20 दिन पहले सजायाफ्ता कैदी ने अपने भाई को फोन करके परिवार के बारे में जानकारी ली थी। घरवालों के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगाया गाय था। इसकी भनक लगते ही सजायाफ्ता कैदी की धरपकड़ के लिए योजना बनाई गई। सोमवार की सुबह सजायाफ्ता कैदी एनटीपीसी ऊंचाहार पहुंचा तो उसे दबोच लिया गया। (संवाद)
विज्ञापन
बदल-बदलकर कई राज्यों में रहता था सजायाफ्ता कैदी
रायबरेली। पुलिस के हत्थे चढ़ा सजायाफ्ता कैदी बदल-बदलकर देश के कई प्रांतों में रहकर मजदूरी करता था। खास बात यह थी कि वह मोबाइल का भी प्रयोग नहीं करता था। इससे पुलिस उसकी लोकेशन खोज नहीं पा रही थी। ऊंचाहार कोतवाल संजय त्यागी बताते हैं कि जेल से पैरोल मिलने के बाद वह महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना समेत अन्य कई प्रांतों में रहकर मजदूरी करता था। कुछ दिन रहने के बाद वह अलग-अलग प्रांतों में रहकर मजदूरी करता था, ताकि पुलिस उस तक नहीं पहुंच पाए। 20 दिन पहले सजायाफ्ता कैदी ने अपने भाई को फोन करके परिवार के बारे में जानकारी ली थी। घरवालों के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगाया गाय था। इसकी भनक लगते ही सजायाफ्ता कैदी की धरपकड़ के लिए योजना बनाई गई। सोमवार की सुबह सजायाफ्ता कैदी एनटीपीसी ऊंचाहार पहुंचा तो उसे दबोच लिया गया। (संवाद)