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डिमांड से कम मिल रही बिजली, कटौती से बढ़ी परेशानी
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प्रभुटाउन मार्ग पर तिरछा लगा बिजली का पोल।
- फोटो : RAIBARAILY
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रायबरेली। आषाढ़ में बारिश न होने से लोगों को राहत नहीं मिल रही है। यही वजह है कि बिजली की मांग में लगातार इजाफा हो रहा है, लेकिन पावर कॉरपोरेशन इस मांग को पूरा करने में नाकाम साबित हो रहा है।
मांग अधिक बढ़ती है तो अघोषित कटौती कर दी जाती है। इससे जिले के पांच लाख उपभोक्ताओं का हाल बेहाल है। सबसे खराब हालत ग्रामीण अंचलों के हैं। गांवों को 18 घंटे के बजाय 10 से 12 घंटे बिजली मिल रही है।
भीषण गर्मी और उमस से लोगों का हाल बेहाल है। सबसे ज्यादा दिक्कत किसानों को हो रही है, क्योंकि वह पानी के बगैर धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं।
मौजूदा समय में करीब 400 मेगावॉट बिजली की जरूरत है, जबकि 350 मेगावॉट के आसपास बिजली मिल रही है। कम बिजली आपूर्ति से जिले में करीब पांच लाख उपभोक्ता परेशान हैं।
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इसमें करीब डेढ़ लाख उपभोक्ता निजी नलकूप हैं। इस समय धान की रोपाई का अनुकूल समय निकला जा रहा है। बारिश की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को राहत नहीं मिल रही है। क्योंकि ग्रामीण अंचलों में भरपूर बिजली नहीं मिल रही है। जर्जर संसाधन भी बिजली आपूर्ति में रोड़ा बन रहे हैं।
जर्जर संसाधन बिजली आपूर्ति में बन रहे रोडा
जिले में लगातार उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन संसाधन जैसे के तैसे ही हैं। 54 विद्युत उपकेंद्रों में लगे उपकरण कई साल पुराने हैं, जिनकी मरम्मत नहीं कराई गई। यही वजह है कि आए दिन कहीं न कहीं बिजली आपूर्ति बंद रहती है।
इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। सबसे खराब हालत शहर क्षेत्र के हैं। यहां आंखमूद का कनेक्शन दिए जा रहे हैं, लेकिन उपकेंद्रों की क्षमता नहीं बढ़ाई जा रही है। जर्जर खंभों को नहीं बदलवाया जा रहा है। कहीं पर पोल झुक गए हैं तो कहीं पर पर तारों के सहारे ही खड़े हैं, जो मौत को दावत दे रहे हैं। पावर कॉरपोरेशन के अभियंता इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
एक बीघा खेत भरने के लिए लगता पूरा दिन
परशदेपुर। बिजली कटौती का आलम यह है कि एक बीघा खेत भरने के लिए पूरा दिन ट्यूबवेल चलाना पड़ता है। ऊपर से वोल्टेज इतना कम रहता है कि मोटर भी पूरी क्षमता से नहीं चल पाती है। गर्मी और उमस से उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गोपालपुर निवासी भोला प्रसाद द्विवेदी, सुनगा निवासी राकेश कुमार यादव ने बताया कि विद्युत उपकेंद्र परशदेपुर से 80 गांवों को बिजली आपूर्ति होती है। अघोषित कटौती से लोगों की नींद हराम है। लोग गर्मी और उसम से परेशान है। परशदेपुर के मो. साहिद, महेश विश्वकर्मा ने बताया कि बारिश नहीं होने से धान की रोपाई का काम प्रभावित है। दूसरी ओर भरपूर बिजली भी नहीं मिल रही है। इसके लिए पावर कारपोरेशन के अभियंता कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। केवल कनेक्शन काटने और राजस्व वसूलने तक सीमित हैं।
बरसात नहीं होने से बढ़ी बिजली की मांग
बरसात नहीं होने से बिजली की मांग में इजाफा हो रहा है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली देने के प्रयास किए जा रहे हैं। अघोषित कटौती ऊपर से होती है। लोकल स्तर पर आने वाले फॉल्टों को तत्काल ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं को मिल सके।
-विवेक अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता, पावर कॉर्पोरेशन
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मांग अधिक बढ़ती है तो अघोषित कटौती कर दी जाती है। इससे जिले के पांच लाख उपभोक्ताओं का हाल बेहाल है। सबसे खराब हालत ग्रामीण अंचलों के हैं। गांवों को 18 घंटे के बजाय 10 से 12 घंटे बिजली मिल रही है।
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भीषण गर्मी और उमस से लोगों का हाल बेहाल है। सबसे ज्यादा दिक्कत किसानों को हो रही है, क्योंकि वह पानी के बगैर धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं।
मौजूदा समय में करीब 400 मेगावॉट बिजली की जरूरत है, जबकि 350 मेगावॉट के आसपास बिजली मिल रही है। कम बिजली आपूर्ति से जिले में करीब पांच लाख उपभोक्ता परेशान हैं।
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इसमें करीब डेढ़ लाख उपभोक्ता निजी नलकूप हैं। इस समय धान की रोपाई का अनुकूल समय निकला जा रहा है। बारिश की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को राहत नहीं मिल रही है। क्योंकि ग्रामीण अंचलों में भरपूर बिजली नहीं मिल रही है। जर्जर संसाधन भी बिजली आपूर्ति में रोड़ा बन रहे हैं।
जर्जर संसाधन बिजली आपूर्ति में बन रहे रोडा
जिले में लगातार उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन संसाधन जैसे के तैसे ही हैं। 54 विद्युत उपकेंद्रों में लगे उपकरण कई साल पुराने हैं, जिनकी मरम्मत नहीं कराई गई। यही वजह है कि आए दिन कहीं न कहीं बिजली आपूर्ति बंद रहती है।
इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। सबसे खराब हालत शहर क्षेत्र के हैं। यहां आंखमूद का कनेक्शन दिए जा रहे हैं, लेकिन उपकेंद्रों की क्षमता नहीं बढ़ाई जा रही है। जर्जर खंभों को नहीं बदलवाया जा रहा है। कहीं पर पोल झुक गए हैं तो कहीं पर पर तारों के सहारे ही खड़े हैं, जो मौत को दावत दे रहे हैं। पावर कॉरपोरेशन के अभियंता इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
एक बीघा खेत भरने के लिए लगता पूरा दिन
परशदेपुर। बिजली कटौती का आलम यह है कि एक बीघा खेत भरने के लिए पूरा दिन ट्यूबवेल चलाना पड़ता है। ऊपर से वोल्टेज इतना कम रहता है कि मोटर भी पूरी क्षमता से नहीं चल पाती है। गर्मी और उमस से उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गोपालपुर निवासी भोला प्रसाद द्विवेदी, सुनगा निवासी राकेश कुमार यादव ने बताया कि विद्युत उपकेंद्र परशदेपुर से 80 गांवों को बिजली आपूर्ति होती है। अघोषित कटौती से लोगों की नींद हराम है। लोग गर्मी और उसम से परेशान है। परशदेपुर के मो. साहिद, महेश विश्वकर्मा ने बताया कि बारिश नहीं होने से धान की रोपाई का काम प्रभावित है। दूसरी ओर भरपूर बिजली भी नहीं मिल रही है। इसके लिए पावर कारपोरेशन के अभियंता कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। केवल कनेक्शन काटने और राजस्व वसूलने तक सीमित हैं।
बरसात नहीं होने से बढ़ी बिजली की मांग
बरसात नहीं होने से बिजली की मांग में इजाफा हो रहा है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली देने के प्रयास किए जा रहे हैं। अघोषित कटौती ऊपर से होती है। लोकल स्तर पर आने वाले फॉल्टों को तत्काल ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं को मिल सके।
-विवेक अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता, पावर कॉर्पोरेशन