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बिजली के लिए हाहाकार, 15 दिन में फुंक गए 235 ट्रांसफार्मर
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रायबरेली। जिले में बिजली आपूर्ति व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो रहा है। ग्रामीण अंचलों का हाल बेहाल है। वहीं शहरी क्षेत्र की भी बिजली आपूर्ति चरमरा गई है। हालत यह हो गए हैं कि एक घंटे में 10 से 12 बार बिजली कटौती होती है। इसकी मुख्य वजह ओवरलोड सिस्टम हैं।
लोवोल्टेज और ओवरलोड की वजह से 15 दिन में 235 ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं। पावर कारपोरेशन के अभियंताओं के पास एक ट्रांसफार्मर पर कितने कनेक्शन होने चाहिए, इसका कोई लेखाजोखा नहीं है। यही वजह है ओवरलोड ट्रांसफार्मर हर दिन फुंक रहे हैं। इसका खामियाजा शहर के करीब 48 हजार उपभोक्ता भुगत रहे हैं।
बारिश न होने की वजह से बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। मौजूदा समय में बिजली की मांग करीब 400 मेगावाट के आसपास है। मांग के सापेक्ष लोगों को बिजली नहीं मिल रही है, जो बिजली मिल रही है, उसका वितरण ठीक से नहीं हो रहा है।
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शहर क्षेत्र तेलियाकोट, आईटीआई, गोराबाजार, आचार्य द्विवेदी, प्रगतिपुरम के अलावा अमावां उपकेंद्र से बिजली आपूर्ति हो रही है। इनसे निकले फीडर, ट्रांसफार्मर में मनमानी तरीके से कनेक्शन दिए गए हैं। इस वजह से आए दिन फॉल्ट बने रहते हैं।
मनमाने तरीके से दिए जा रहे हैं कनेक्शन
एक ट्रांसफार्मर पर उसकी क्षमता के हिसाब से कनेक्शन दिए जाने चाहिए, लेकिन यहां इसका कोई पालन नहीं हो रहा है। सेटिंग-गेटिंग करके लोगों को कनेक्शन दिए जा रहे हैं। कहीं-कहीं पर तो बिना ट्रांसफार्मर लगाए ही भारी कनेक्शन दे दिए गए हैं। विभागीय लोगों का कहना है कि 10 किलोवाट से अधिक कनेक्शन होने पर ट्रांसफार्मर लगाना चाहिए, लेकिन यहां इसका कोई पालन नहीं हो रहा है। यही वजह है कि मनमाने तरीके से कनेक्शन दिए जा रहे हैं। पिछले तीन साल में करीब सात हजार नए कनेक्शन दिए गए, लेकिन ट्रांसफार्मरों की क्षमता नहीं बढ़ रही है। यही वजह है कि ट्रांसफार्मर रहे हैं।
स्थानांतरण नीति भी पड़ रही भारी
मौजूदा समय में बिजली की मांग अधिक रहती है। ऐसे समय बिजली समस्या ज्यादा उत्पन्न होती है। इसी दौरान एक्सईएन और उपखंड अधिकारियों का तबादला कर दिया गया। नए अधिकारियों को अभी बिजली उपकेंद्रों और उनसे कितने फीडर निकले हैं। इसकी ठीक से जानकारी नहीं है। यदि अवर अभियंताओं का भी स्थानांतरण कर दिया गया तो व्यवस्था और चरमरा जाएगी।
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लोवोल्टेज और ओवरलोड की वजह से 15 दिन में 235 ट्रांसफार्मर फुंक चुके हैं। पावर कारपोरेशन के अभियंताओं के पास एक ट्रांसफार्मर पर कितने कनेक्शन होने चाहिए, इसका कोई लेखाजोखा नहीं है। यही वजह है ओवरलोड ट्रांसफार्मर हर दिन फुंक रहे हैं। इसका खामियाजा शहर के करीब 48 हजार उपभोक्ता भुगत रहे हैं।
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बारिश न होने की वजह से बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। मौजूदा समय में बिजली की मांग करीब 400 मेगावाट के आसपास है। मांग के सापेक्ष लोगों को बिजली नहीं मिल रही है, जो बिजली मिल रही है, उसका वितरण ठीक से नहीं हो रहा है।
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शहर क्षेत्र तेलियाकोट, आईटीआई, गोराबाजार, आचार्य द्विवेदी, प्रगतिपुरम के अलावा अमावां उपकेंद्र से बिजली आपूर्ति हो रही है। इनसे निकले फीडर, ट्रांसफार्मर में मनमानी तरीके से कनेक्शन दिए गए हैं। इस वजह से आए दिन फॉल्ट बने रहते हैं।
मनमाने तरीके से दिए जा रहे हैं कनेक्शन
एक ट्रांसफार्मर पर उसकी क्षमता के हिसाब से कनेक्शन दिए जाने चाहिए, लेकिन यहां इसका कोई पालन नहीं हो रहा है। सेटिंग-गेटिंग करके लोगों को कनेक्शन दिए जा रहे हैं। कहीं-कहीं पर तो बिना ट्रांसफार्मर लगाए ही भारी कनेक्शन दे दिए गए हैं। विभागीय लोगों का कहना है कि 10 किलोवाट से अधिक कनेक्शन होने पर ट्रांसफार्मर लगाना चाहिए, लेकिन यहां इसका कोई पालन नहीं हो रहा है। यही वजह है कि मनमाने तरीके से कनेक्शन दिए जा रहे हैं। पिछले तीन साल में करीब सात हजार नए कनेक्शन दिए गए, लेकिन ट्रांसफार्मरों की क्षमता नहीं बढ़ रही है। यही वजह है कि ट्रांसफार्मर रहे हैं।
स्थानांतरण नीति भी पड़ रही भारी
मौजूदा समय में बिजली की मांग अधिक रहती है। ऐसे समय बिजली समस्या ज्यादा उत्पन्न होती है। इसी दौरान एक्सईएन और उपखंड अधिकारियों का तबादला कर दिया गया। नए अधिकारियों को अभी बिजली उपकेंद्रों और उनसे कितने फीडर निकले हैं। इसकी ठीक से जानकारी नहीं है। यदि अवर अभियंताओं का भी स्थानांतरण कर दिया गया तो व्यवस्था और चरमरा जाएगी।