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बंधक मकान के दस्तावेज क्षतिपूर्ति समेत वापसी के आदेश
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
Updated Thu, 11 Aug 2016 11:48 PM IST
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अदालत का फैसला
- फोटो : getty images
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ऋण अदायगी के बाद 1988 से एसबीआई की सलोन शाखा में बंधक पड़े मकान के दस्तावेज वापस करने का आदेश दिया गया है। जिला उपभोक्ता फोरम ने शिकायतकर्ता को बतौर क्षतिपूर्ति आठ हजार और वाद व्यय के रुप में एक हजार रुपये का भुगतान करने का फैसला सुनाया है।
सलोन कस्बे के पैगबंरपुर निवासी रामानंद साहू ने वर्ष 1975 में एसबीआई सलोन से 48 हजार रुपये का लोन लिया था। ऋण देते समय बैंक ने रामानंद साहू के मकान के कागजात बंधक बना लिए थे। वर्ष 1988 में ऋण की पूरी धनराशि मय ब्याज जमा कर दी गई।
बावजूद इसके बैंक से बंधक बनाए गए दस्तावेज मुक्त नहीं किए गए। इसी दौरान वर्ष 2007 में रामानंद साहू की मृत्यु हो गई। इसके बाद उसके बेटे जय बाबू, विजय बाबू और अजय बाबू ने उपभोक्ता फोरम में परिवाद दायर किया।
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फोरम के अध्यक्ष लालता प्रसाद पांडेय और सदस्य शैलजा यादव ने परिवाद की सुनवाई की। फोरम ने अपने फैसले में कहा कि ऋण का भुगतान परिवादीगण के पिता द्वारा कर दिया गया है, तो बैंक को उनके मकान से संबंधित मूल दस्तावेज रखने का कोई अधिकार नहीं है।
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सलोन कस्बे के पैगबंरपुर निवासी रामानंद साहू ने वर्ष 1975 में एसबीआई सलोन से 48 हजार रुपये का लोन लिया था। ऋण देते समय बैंक ने रामानंद साहू के मकान के कागजात बंधक बना लिए थे। वर्ष 1988 में ऋण की पूरी धनराशि मय ब्याज जमा कर दी गई।
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बावजूद इसके बैंक से बंधक बनाए गए दस्तावेज मुक्त नहीं किए गए। इसी दौरान वर्ष 2007 में रामानंद साहू की मृत्यु हो गई। इसके बाद उसके बेटे जय बाबू, विजय बाबू और अजय बाबू ने उपभोक्ता फोरम में परिवाद दायर किया।
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फोरम के अध्यक्ष लालता प्रसाद पांडेय और सदस्य शैलजा यादव ने परिवाद की सुनवाई की। फोरम ने अपने फैसले में कहा कि ऋण का भुगतान परिवादीगण के पिता द्वारा कर दिया गया है, तो बैंक को उनके मकान से संबंधित मूल दस्तावेज रखने का कोई अधिकार नहीं है।