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48 में महज 10 घंटे आपूर्ति, गर्मी से जूझ रही एक लाख आबादी
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रायबरेली। खीरों और सेमरी उपकेंद्र को जाने वाली 33 केवी लाइन में आए दिन फॉल्ट बना रहता है। खीरों और सेमरी उपकेंद्र के लिए नई लाइन बनकर तैयार है, लेकिन अब तक उस लाइन से दोनों उपकेंद्रों को नहीं जोड़ा गया है।
हालत यह है कि 48 घंटे में महज 10 घंटे आपूर्ति हो सकी। इससे करीब एक लाख लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। विद्युत उपकेंद्र खीरों व सेमरी को बिजली ट्रांसमिशन त्रिपुला से मिलती हैं।
इस 33 केवी लाइन में सोमवार शाम चार बजे फाल्ट आने के बाद मंगलवार शाम तक आपूर्ति बंद रही। शाम आपूर्ति चालू होने के बाद बुधवार सुबह पांच बजे फिर लाइन का तार टूट गया। इससे एक बार फिर आपूर्ति बंद हो गई।
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इससे इलाकाई करीब एक लाख लोगों में जबरदस्त नाराजगी है। उनका कहना है कि आए दिन फॉल्ट होने के चलते आपूर्ति रहती है। इससे भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। त्रिपुला से निकली खीरों की लाइन की लंबाई करीब 65 किलोमीटर है।
लाइन में फॉल्ट आने से पूरा दिन फॉल्ट खोजने में लग जाता है। रात में आपूर्ति होती तो फॉल्ट आ जाता है। यह सिलसिला अक्सर चलता रहता है। खीरों और सेमरी उपकेंद्र को ट्रांसमिशन मौरावां से जोड़ने के लिए 33 केवी लाइन का निर्माण पूरा हो चुका है।
लेकिन इस लाइन को अभी तक चालू नहीं किया गया जा सका है। लोगों का कहना है कि लाइन की लंबाई अधिक होने से वोल्टेज भी कम मिलता है। घरों में लगे विद्युत उपकेंद्र महज शोपीस बनकर रह गए है।
सबसे ज्यादा दिक्कत किसानों को होती है। वोल्टेज कम होने की वजह से मोटरें फुंक जाती हैं। रोहित शर्मा, राम नरेश, यादुवेंद्र, राममोहन, उमेश यादव, आशू पटेल ने बताया कि 18 घंटे का रोस्टर है, लेकिन यहां तो आठ घंटे भी बिजली नहीं मिल पाती हैं।
अवर अभियंता रामनाथ ने बताया कि लाइन काफी पुरानी होने के चलते जर्जर हो चुकी है। 50 साल पहले बनी लाइन की लंबाई 65 किलोमीटर है। इससे वोल्टेज भी ड्रॉप होता है। मौरावां लाइन बनकर तैयार हो चुकी है, शीघ्र उसी से जोड़कर दोनों उपकेंद्र चलाए जाएंगे।
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हालत यह है कि 48 घंटे में महज 10 घंटे आपूर्ति हो सकी। इससे करीब एक लाख लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। विद्युत उपकेंद्र खीरों व सेमरी को बिजली ट्रांसमिशन त्रिपुला से मिलती हैं।
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इस 33 केवी लाइन में सोमवार शाम चार बजे फाल्ट आने के बाद मंगलवार शाम तक आपूर्ति बंद रही। शाम आपूर्ति चालू होने के बाद बुधवार सुबह पांच बजे फिर लाइन का तार टूट गया। इससे एक बार फिर आपूर्ति बंद हो गई।
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इससे इलाकाई करीब एक लाख लोगों में जबरदस्त नाराजगी है। उनका कहना है कि आए दिन फॉल्ट होने के चलते आपूर्ति रहती है। इससे भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। त्रिपुला से निकली खीरों की लाइन की लंबाई करीब 65 किलोमीटर है।
लाइन में फॉल्ट आने से पूरा दिन फॉल्ट खोजने में लग जाता है। रात में आपूर्ति होती तो फॉल्ट आ जाता है। यह सिलसिला अक्सर चलता रहता है। खीरों और सेमरी उपकेंद्र को ट्रांसमिशन मौरावां से जोड़ने के लिए 33 केवी लाइन का निर्माण पूरा हो चुका है।
लेकिन इस लाइन को अभी तक चालू नहीं किया गया जा सका है। लोगों का कहना है कि लाइन की लंबाई अधिक होने से वोल्टेज भी कम मिलता है। घरों में लगे विद्युत उपकेंद्र महज शोपीस बनकर रह गए है।
सबसे ज्यादा दिक्कत किसानों को होती है। वोल्टेज कम होने की वजह से मोटरें फुंक जाती हैं। रोहित शर्मा, राम नरेश, यादुवेंद्र, राममोहन, उमेश यादव, आशू पटेल ने बताया कि 18 घंटे का रोस्टर है, लेकिन यहां तो आठ घंटे भी बिजली नहीं मिल पाती हैं।
अवर अभियंता रामनाथ ने बताया कि लाइन काफी पुरानी होने के चलते जर्जर हो चुकी है। 50 साल पहले बनी लाइन की लंबाई 65 किलोमीटर है। इससे वोल्टेज भी ड्रॉप होता है। मौरावां लाइन बनकर तैयार हो चुकी है, शीघ्र उसी से जोड़कर दोनों उपकेंद्र चलाए जाएंगे।