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जांच टीम के सवालों पर कोटेदार के छूटा पसीना
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली
Updated Tue, 26 Apr 2016 11:24 PM IST
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रायबरेली में मंगलवार को डीह ब्लॉक के रोखा सार्वजनिक वितरण प्रणाली दुकान में कार्डधारकों से पूछताछ करते अधिकारी।
- फोटो : अमर उजाला
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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में पात्रों के चयन में घालमेल की जांच करने पहुंची प्रदेश स्तरीय टीम को कई खामियां मिली। मंगलवार को कानपुर देहात डीएसओ सीमा चतुर्वेदी और क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी शिवनारायण टीम की अगुवाई में सदस्यों ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली डीह की दुकान में अनाज वितरण की हकीकत देखी।
कार्ड धारकों ने अपात्रों के नाम शामिल करने का आरोप लगाया। जांच टीम ने सवाल पूछा तो कोटेदार के पसीना छूट गया। गौरतलब है कि सलोन तहसील में तैनात रहे आपूर्ति निरीक्षक प्रदीप शुक्ला को लापरवाही के आरोप में हाल ही में निलंबित किया जा चुका है।
शासन के निर्देश पर खाद्य विभाग के जिला आपूर्ति अधिकारियों को एक-दूसरे के जिले में जांच करनी है। इसके तहत ही जिला आपूर्ति अधिकारी वीआर अहिरवार को कानपुर देहात भेजा गया। वहीं कानपुर देहात से आई डीएसओ ने रोखा गांव की दुकान निरीक्षण किया।
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यहां पर स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर आदि का मिलान किया। एक-एक करके कार्डधारकों से बयान भी दर्ज किया गया। कई कार्डधारकों ने एनएफएसए में फीडिंग कराने के बाद भी नाम सूची से गायब होने की शिकायत की।
अमीना ने बताया कि उनका नाम अभी तक फीड नहीं हुआ। वहीं मतूना ने का आरोप है कि नौ सदस्य होने के बाद भी दो यूनिट चढ़ाई गई। इसके अलावा कई खामियां मिली। डीएसओ सीमा चतुर्वेदी ने शिकायतकर्ताओं के नाम दर्ज किए। वहीं कोटेदार से भी इस बाबत पूछताछ की। इस दौरान खामियों पर नाराजगी जताई।
सलोन एसडीएम की रिपोर्ट के आधार पर तहसील में तैनात रहे आपूर्ति निरीक्षक प्रदीप शुक्ला को जिला मुख्यालय संबद्ध तो कर दिया गया, लेकिन उनके स्थान पर किसी की तैनात नहीं की गई। सेटिंग-गेटिंग के चलते जहां दोबारा आने की कोशिश में हैं।
वहीं सुबह जब टीम पहुंची तो पोल खुल गई। आनन-फानन जिले से शहर आपूर्ति निरीक्षक कौशलेंद्र और चंदा गुप्ता को साथ में भेज दिया गया। एनएफएसए मार्च माह में लागू होने के बाद से ही तहसील क्षेत्र में अनाज वितरण पटरी से उतर गई।
मार्च में वितरण के दौरान अफसरों की मिलीभगत खुलकर सामने आ गई। कुछ प्रधानों ने इसकी शिकायत जिला आपूर्ति कार्यालय में भी की थी। उनका आरोप था कि गोदाम से ही अनाज कोटेदारों को कम दिया गया। इसके चलते पात्रों को कम मात्रा में वितरण हुआ। इस बाबत जिला आपूर्ति अधिकारी वीआर अहिरवार की ओर से नोटिस देने की भी बात कही थी।
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कार्ड धारकों ने अपात्रों के नाम शामिल करने का आरोप लगाया। जांच टीम ने सवाल पूछा तो कोटेदार के पसीना छूट गया। गौरतलब है कि सलोन तहसील में तैनात रहे आपूर्ति निरीक्षक प्रदीप शुक्ला को लापरवाही के आरोप में हाल ही में निलंबित किया जा चुका है।
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शासन के निर्देश पर खाद्य विभाग के जिला आपूर्ति अधिकारियों को एक-दूसरे के जिले में जांच करनी है। इसके तहत ही जिला आपूर्ति अधिकारी वीआर अहिरवार को कानपुर देहात भेजा गया। वहीं कानपुर देहात से आई डीएसओ ने रोखा गांव की दुकान निरीक्षण किया।
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यहां पर स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर आदि का मिलान किया। एक-एक करके कार्डधारकों से बयान भी दर्ज किया गया। कई कार्डधारकों ने एनएफएसए में फीडिंग कराने के बाद भी नाम सूची से गायब होने की शिकायत की।
अमीना ने बताया कि उनका नाम अभी तक फीड नहीं हुआ। वहीं मतूना ने का आरोप है कि नौ सदस्य होने के बाद भी दो यूनिट चढ़ाई गई। इसके अलावा कई खामियां मिली। डीएसओ सीमा चतुर्वेदी ने शिकायतकर्ताओं के नाम दर्ज किए। वहीं कोटेदार से भी इस बाबत पूछताछ की। इस दौरान खामियों पर नाराजगी जताई।
सलोन एसडीएम की रिपोर्ट के आधार पर तहसील में तैनात रहे आपूर्ति निरीक्षक प्रदीप शुक्ला को जिला मुख्यालय संबद्ध तो कर दिया गया, लेकिन उनके स्थान पर किसी की तैनात नहीं की गई। सेटिंग-गेटिंग के चलते जहां दोबारा आने की कोशिश में हैं।
वहीं सुबह जब टीम पहुंची तो पोल खुल गई। आनन-फानन जिले से शहर आपूर्ति निरीक्षक कौशलेंद्र और चंदा गुप्ता को साथ में भेज दिया गया। एनएफएसए मार्च माह में लागू होने के बाद से ही तहसील क्षेत्र में अनाज वितरण पटरी से उतर गई।
मार्च में वितरण के दौरान अफसरों की मिलीभगत खुलकर सामने आ गई। कुछ प्रधानों ने इसकी शिकायत जिला आपूर्ति कार्यालय में भी की थी। उनका आरोप था कि गोदाम से ही अनाज कोटेदारों को कम दिया गया। इसके चलते पात्रों को कम मात्रा में वितरण हुआ। इस बाबत जिला आपूर्ति अधिकारी वीआर अहिरवार की ओर से नोटिस देने की भी बात कही थी।