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बारिश के साथ कई क्षेत्रों में गिरे ओले, तिलहनी फसलें खराब
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रायबरेली। जिले में बेमौसम बारिश और कई इलाकों में ओले गिरने से तिलहनी फसलों को नुकसान हुआ है। महराजगंज क्षेत्र के एक गांव में बिजली गिरने से एक घर धराशायी हो गया। गनीमत रही कि उस समय मकान में कोई नहीं था। बारिश के कारण गेहूं की फसल को संजीवनी मिली है। तेज व सर्द हवा के कारण फसलें खेतों में गिर गईं। इससे उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
खीरों प्रतिनिधि के अनुसार, गुरुवार रात हुई तेज बारिश व कुछ जगहों पर ओले गिरने से दलहनी व तिलहनी फसलों को नुकसान पहुंचा है। खीरों, मेड़ौली, बरौला, रनापुर पहरौली, मथुराखेड़ा, खानपुर खुष्टी आदि गांव में ओले गिरने से किसानों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा।
किसान अश्वनी कुमार, शिव प्रकाश यादव, उमेश कुमार, संजय वर्मा, मथुरा खेडा ने बताया कि बेमौसम बरसात व ओले गिराने से गेहूं की फसल को फायदा भले ही हुआ है, लेकिन दलहनी और तिलहनी फसलों को नुकसान हुआ है। सरसों की पकी फसल खेतों में ही गिर गई है। ऐसे में पैदावार घटने की उम्मीद है।
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महराजगंज प्रतिनिधि के अनुसार, क्षेत्र के गांव पूरे जियालाल मजरे पहनासा में एक व्यक्ति के घर पर बिजली गिर गई। इससे मकान पूरी तरह से ध्वस्त हो गया। गृह स्वामी राजेंद्र कुमार यादव पुत्र रामनाथ घर के बगल में छप्पर के नीचे सो रहा था। इसकी वजह से किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ। हालांकि बिजली मिलने के बाद गांव में अफरातफरी का माहौल रहा।
सरेनी प्रतिनिधि के अनुसार, बेमौसम बरसात से किसानों के चेहरे पर रौनक आ गई। खासकर गेहूं की फसल को फायदा हुआ है। हसनापुर गांव के किसान रामदेव शिवचरण महादेव, शिव मोहन का कहना है कि बरसात से गेहूं की फसल को संजीवनी मिली है। असिंचित जमीन में तो अमृत की बरसात हुई है, लेकिन यदि और तेज बरसात हो गई तो नुकसान होगा।
जिले के कुछ अन्य इलाकों में बारिश और ओले गिरने से फसलों को नुकसान हुआ है। दो दिन तक पारा चढ़ने के बाद गुरुवार रात बारिश और कई क्षेत्रों में ओले गिरने से तापमान फिर से लुढ़क गया। पारा गिरने से शुक्रवार को दिन भर ठंड रही। सर्द हवा के कारण लोग अलाव के भरोसे रहे। दिन भर बादल छाए रहने और कोहरे के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
ठंड का असर सरकारी दफ्तरों में भी देखने को मिला। कामकाज प्रभावित रहा। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 2.3 डिग्री कम रहा। वहीं, न्यूनतम तापमान 14 डिग्री रहा। अभी मौसम विभाग इसी तरह के मौसम रहने की आशंका जता रहा है। आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय, कुमारगंज के मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे में मध्यम बादल छाए रहने व हल्की वर्षा होने का अनुमान है।
बारिश होने से तापमान में गिरावट के साथ ठंड बढ़ी है। बारिश से दलहनी फसलों अरहर, चना, मटर एवं मसूर के लिये काफी लाभदायक है। तिलहनी में सरसों एवं अलसी की फसलों को लाभ होगा, परंतु ऐसा मौसम कई दिनों तक रहा तो माहू कीट का आक्रमण सरसों की फसल पर होने की संभावना है।
नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. रवि प्रकाश मौर्या के अनुसार बेमौसम बरसात से निचले इलाकों में गेहूं की बोआई पिछड़ जाएगी, परंतु नवंबर में बोए गेहूं के लिए यह बरसात फायदेमंद होगी। सब्जियों में टमाटर, फूलगोभी, बैगन आदि के लिये लाभकारी है।
आलू की फसल को भी फायदा होगा। बताया कि दलहन, तिलहन, सब्जियों में जहां ज्यादा पानी लगने की संभावना हो, वहां जलनिकासी की व्यवस्था सुनिश्चित कर पानी निकालते रहें। बारिश आम के लिये फायदेमंद है। इससे फुदका कीट एवं चुर्णी फफूंद के लगने की संभावना कम रहेगी।
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खीरों प्रतिनिधि के अनुसार, गुरुवार रात हुई तेज बारिश व कुछ जगहों पर ओले गिरने से दलहनी व तिलहनी फसलों को नुकसान पहुंचा है। खीरों, मेड़ौली, बरौला, रनापुर पहरौली, मथुराखेड़ा, खानपुर खुष्टी आदि गांव में ओले गिरने से किसानों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा।
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किसान अश्वनी कुमार, शिव प्रकाश यादव, उमेश कुमार, संजय वर्मा, मथुरा खेडा ने बताया कि बेमौसम बरसात व ओले गिराने से गेहूं की फसल को फायदा भले ही हुआ है, लेकिन दलहनी और तिलहनी फसलों को नुकसान हुआ है। सरसों की पकी फसल खेतों में ही गिर गई है। ऐसे में पैदावार घटने की उम्मीद है।
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महराजगंज प्रतिनिधि के अनुसार, क्षेत्र के गांव पूरे जियालाल मजरे पहनासा में एक व्यक्ति के घर पर बिजली गिर गई। इससे मकान पूरी तरह से ध्वस्त हो गया। गृह स्वामी राजेंद्र कुमार यादव पुत्र रामनाथ घर के बगल में छप्पर के नीचे सो रहा था। इसकी वजह से किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ। हालांकि बिजली मिलने के बाद गांव में अफरातफरी का माहौल रहा।
सरेनी प्रतिनिधि के अनुसार, बेमौसम बरसात से किसानों के चेहरे पर रौनक आ गई। खासकर गेहूं की फसल को फायदा हुआ है। हसनापुर गांव के किसान रामदेव शिवचरण महादेव, शिव मोहन का कहना है कि बरसात से गेहूं की फसल को संजीवनी मिली है। असिंचित जमीन में तो अमृत की बरसात हुई है, लेकिन यदि और तेज बरसात हो गई तो नुकसान होगा।
जिले के कुछ अन्य इलाकों में बारिश और ओले गिरने से फसलों को नुकसान हुआ है। दो दिन तक पारा चढ़ने के बाद गुरुवार रात बारिश और कई क्षेत्रों में ओले गिरने से तापमान फिर से लुढ़क गया। पारा गिरने से शुक्रवार को दिन भर ठंड रही। सर्द हवा के कारण लोग अलाव के भरोसे रहे। दिन भर बादल छाए रहने और कोहरे के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
ठंड का असर सरकारी दफ्तरों में भी देखने को मिला। कामकाज प्रभावित रहा। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 2.3 डिग्री कम रहा। वहीं, न्यूनतम तापमान 14 डिग्री रहा। अभी मौसम विभाग इसी तरह के मौसम रहने की आशंका जता रहा है। आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय, कुमारगंज के मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार अगले 24 घंटे में मध्यम बादल छाए रहने व हल्की वर्षा होने का अनुमान है।
बारिश होने से तापमान में गिरावट के साथ ठंड बढ़ी है। बारिश से दलहनी फसलों अरहर, चना, मटर एवं मसूर के लिये काफी लाभदायक है। तिलहनी में सरसों एवं अलसी की फसलों को लाभ होगा, परंतु ऐसा मौसम कई दिनों तक रहा तो माहू कीट का आक्रमण सरसों की फसल पर होने की संभावना है।
नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. रवि प्रकाश मौर्या के अनुसार बेमौसम बरसात से निचले इलाकों में गेहूं की बोआई पिछड़ जाएगी, परंतु नवंबर में बोए गेहूं के लिए यह बरसात फायदेमंद होगी। सब्जियों में टमाटर, फूलगोभी, बैगन आदि के लिये लाभकारी है।
आलू की फसल को भी फायदा होगा। बताया कि दलहन, तिलहन, सब्जियों में जहां ज्यादा पानी लगने की संभावना हो, वहां जलनिकासी की व्यवस्था सुनिश्चित कर पानी निकालते रहें। बारिश आम के लिये फायदेमंद है। इससे फुदका कीट एवं चुर्णी फफूंद के लगने की संभावना कम रहेगी।