{"_id":"61afac7192f8ed20eb38b478","slug":"now-the-mother-will-take-care-of-the-baby-on-the-warmer-bed-of-the-maternity-wing-raibaraily-news-lko607905519","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब मैटर्निटी विंग के वॉर्मर बेड पर मां करेगी शिशु की देखभाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब मैटर्निटी विंग के वॉर्मर बेड पर मां करेगी शिशु की देखभाल
विज्ञापन
रायबरेली। प्रसव के बाद गंभीर नवजातों के इलाज के दौरान अब मां साथ रहेगी। मैटरनिटी विंग में जल्द ही मदर एंड नियोनेटल केयर यूनिट (एमएनसीयू) शुरू होने जा जा रही है।
एमएनसीयू के वॉर्मर बेड पर मां अपने शिशु की देखभाल करेगी। 20 बेड की इस यूनिट को इसी माह से संचालित करने का प्रयास किया जा रहा है। नवजातों के इलाज के लिए यहां हाईटेक संसाधनों की व्यवस्था होगी।
शहर स्थित मैटरनिटी विंग में सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) काफी समय से संचालित है। प्रसव के बाद गंभीर नवजातों को यहां भर्ती कर उनका इलाज किया जाता है।
विज्ञापन
एसएनसीयू में शिशुओं की मां को साथ रहने की अनुमति नहीं है। इलाज के दौरान माताओं को अपने शिशुओं से दूर रहना पड़ता है। अब एक ही स्थान पर गंभीर बच्चा और जच्चा को भर्ती करके इलाज की सुविधा मिलेगी।
इसके लिए विंग में एसएनसीयू के बगल में ही एमएनसीयू स्थापित करने का काम शुरू हो गया है। प्रसव के बाद गंभीर नवजातों को उनकी मां के साथ इस यूनिट में भर्ती करके सेहत पर नजर रखी जाएगी। 20 बेड की इस यूनिट को इसी महीने से शुरू कराया जाएगा। यूनिट में वॉर्मर बेडों की व्यवस्था होगी। (संवाद)
फोटोथेरेपी, वॉर्मर, ऑक्सीजन आदि की मिलेगी सुविधा
मदर एंड नियोनेटल केयर यूनिट में इलाज के लिए सारे बंदोबस्त होंगे। नवजातों के इलाज के लिए फोटोथेरेपी, वार्मर, ऑक्सीजन, कूलिंग मशीन आदि की सुविधा उपलब्ध होगी।
बाल रोग विशेषज्ञ के साथ ही जरूरत पड़ने पर स्त्री रोग विशेषज्ञ व अन्य स्टाफ भी 24 घंटे जच्चा-बच्चा की सेहत पर नजर रखने के लिए उपलब्ध होंगे। यूनिट में बच्चे को उसकी मां से अलग नहीं करना पड़ेगा। नवजात मां के साथ वार्मर बेड पर रहेगा। इससे उसे ठंड से बचाया जा सकेगा।
एसएनसीयू में एक हजार से अधिक शिशुओं का इलाज
महिला अस्पताल में संचालित सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट में अब तक गंभीर रूप से बीमार एक हजार से अधिक नवजातों का इलाज हो चुका है। इस यूनिट के खुलने से पहले आए दिन दो-तीन नवजात प्रसव के बाद ही दम तोड़ देते थे, लेकिन अब यह संख्या न के बराबर हो गई है। एमएनसीयू के संचालित होने के बाद जच्चा-बच्चा को और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी शुरू हो जाएंगी।
अस्पताल में एसएनसीयू पहले से संचालित है। इसी माह से एमएनसीयू काम करना शुरू कर देगा। जच्चा-बच्चा के इलाज के लिए इस यूनिट में सारी व्यवस्थाएं होंगी। मां अपने शिशु के साथ रह सकेगी। जच्चा-बच्चा को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. रेनू चौधरी, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
विज्ञापन
एमएनसीयू के वॉर्मर बेड पर मां अपने शिशु की देखभाल करेगी। 20 बेड की इस यूनिट को इसी माह से संचालित करने का प्रयास किया जा रहा है। नवजातों के इलाज के लिए यहां हाईटेक संसाधनों की व्यवस्था होगी।
विज्ञापन
शहर स्थित मैटरनिटी विंग में सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) काफी समय से संचालित है। प्रसव के बाद गंभीर नवजातों को यहां भर्ती कर उनका इलाज किया जाता है।
विज्ञापन
एसएनसीयू में शिशुओं की मां को साथ रहने की अनुमति नहीं है। इलाज के दौरान माताओं को अपने शिशुओं से दूर रहना पड़ता है। अब एक ही स्थान पर गंभीर बच्चा और जच्चा को भर्ती करके इलाज की सुविधा मिलेगी।
इसके लिए विंग में एसएनसीयू के बगल में ही एमएनसीयू स्थापित करने का काम शुरू हो गया है। प्रसव के बाद गंभीर नवजातों को उनकी मां के साथ इस यूनिट में भर्ती करके सेहत पर नजर रखी जाएगी। 20 बेड की इस यूनिट को इसी महीने से शुरू कराया जाएगा। यूनिट में वॉर्मर बेडों की व्यवस्था होगी। (संवाद)
फोटोथेरेपी, वॉर्मर, ऑक्सीजन आदि की मिलेगी सुविधा
मदर एंड नियोनेटल केयर यूनिट में इलाज के लिए सारे बंदोबस्त होंगे। नवजातों के इलाज के लिए फोटोथेरेपी, वार्मर, ऑक्सीजन, कूलिंग मशीन आदि की सुविधा उपलब्ध होगी।
बाल रोग विशेषज्ञ के साथ ही जरूरत पड़ने पर स्त्री रोग विशेषज्ञ व अन्य स्टाफ भी 24 घंटे जच्चा-बच्चा की सेहत पर नजर रखने के लिए उपलब्ध होंगे। यूनिट में बच्चे को उसकी मां से अलग नहीं करना पड़ेगा। नवजात मां के साथ वार्मर बेड पर रहेगा। इससे उसे ठंड से बचाया जा सकेगा।
एसएनसीयू में एक हजार से अधिक शिशुओं का इलाज
महिला अस्पताल में संचालित सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट में अब तक गंभीर रूप से बीमार एक हजार से अधिक नवजातों का इलाज हो चुका है। इस यूनिट के खुलने से पहले आए दिन दो-तीन नवजात प्रसव के बाद ही दम तोड़ देते थे, लेकिन अब यह संख्या न के बराबर हो गई है। एमएनसीयू के संचालित होने के बाद जच्चा-बच्चा को और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी शुरू हो जाएंगी।
अस्पताल में एसएनसीयू पहले से संचालित है। इसी माह से एमएनसीयू काम करना शुरू कर देगा। जच्चा-बच्चा के इलाज के लिए इस यूनिट में सारी व्यवस्थाएं होंगी। मां अपने शिशु के साथ रह सकेगी। जच्चा-बच्चा को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. रेनू चौधरी, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल