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एम्स में अब हृदय व पेट के रोगियों को भी मिलेगा इलाज
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रायबरेली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में गैस्ट्रो और हार्ट के गंभीर मरीजों को इलाज का तोहफा मिल गया है। अब तक कार्डियो और गैस्ट्रो के गंभीर मरीजों को इलाज के लिए लखनऊ या अन्य बड़े शहरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। एमआरआई व अन्य जांचों के लिए एम्स ऋषिकेश के रेडियोलॉजिस्ट पर निर्भरता भी अब खत्म हो गई है। पांच महीने से तैयार कैथलैब अब मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा देगी। ऐसे में रेडियोलॉजिस्ट आने के बाद एमआरआई व अन्य महत्वपूर्ण जांचें रोज हो सकेंगी।
13 अगस्त 2018 से ओपीडी के रूप में शुरू हुए एम्स में लगातार सुविधाएं बढ़ रही हैं। 29 अगस्त 2019 को एमबीबीएस के पहले बैच की पढ़ाई शुरू हुई तो अधिशासी निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी के प्रयास से 278 करोड़ रुपये की लागत से 600 बेड के एम्स हॉस्पिटल (चिकित्सीय परिसर) बनने के बाद बीती नौ जुलाई से 300 बेड का हॉस्पिटल शुरू हो गया। एम्स में एमआईआर सहित अन्य जांचें भी शुरू कराई गईं, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण एम्स ऋषिकेश से डॉक्टर आकर यहां जांच करते थे। अब रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सूर्य प्रताप सिंह की तैनाती होने के बाद ये जांचें रोजाना होंगी।
सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की व्यवस्था न हो पाने के कारण कार्डियोलॉजी और गैस्ट्रो के मरीजों को इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही थी। पांच महीने पहले ही कैथलैब तैयार हो गया था, लेकिन अब स्पेशलिस्ट डॉ. अंकित गुप्ता व डॉ. अंशुमान इल्हेंस के आने के बाद हार्ट और गैस्ट्रो के मरीजों का इलाज शुरू हो गया है। एम्स में पीड्रियाट्रिक सर्जरी भी होगी। एम्स में कई और विभाग शुरू करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। एम्स में एमबीबीएस स्टूडेंट्स की परीक्षाओं पर नजर रखने के लिए असिस्टेंट कंट्रोलर ऑफ इग्जामिनेशन नवीनकांत गुप्ता की प्रति नियुक्ति हुई है।
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एम्स के अधिशासी निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी ने बताया कि मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद मेडिकल कॉलेज के ग्राउंड फ्लोर पर ओपीडी के काउंटर बढ़ा दिए गये हैं। पहले से इसी तल पर आईपीडी भी संचालित था, लेकिन अब मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था प्रथम तल पर शिफ्ट कर दी गई है। इससे ओपीडी में आने वाले मरीजों की परेशानी कम होगी। कई काउंटरों के स्थापित होने के बाद अब मरीजों को लंबी लाइन में नहीं लगना पड़ेगा।
एम्स के लिए किसानों से करीब 80 बीघा जमीन लेनी है। इसके लिए शासन से 43 करोड़ रुपये मिलने के बाद बैनामा का काम लगभग पूरा हो चुका है। जल्द ही एम्स को जमीन मिल जाएगी। जमीन मिलते ही एम्स प्रशासन अस्पताल के विस्तार का काम शुरू करेगा। इसके लिए भी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। जल्द ही जमीन अधिग्रहीत करने की प्रक्रिया चल रही है।
एम्स के रजिस्ट्रार/वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी समीर शुक्ल ने बताया कि गैस्ट्रो व कार्डियोलॉजी विभाग शुरू कराए गये हैं। रेडियोलॉजिस्ट के मिलने से एमआरआई व अन्य जांचें अब रोजाना होंगी। 26 फैकल्टी मिलने के बाद मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा मिलेगी। कैथलैब भी प्रभावी ढंग से काम करेगा। किसानों की जमीन के अधिग्रहण का काम चल रहा है। जल्द ही परिसर का विस्तार होगा।
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13 अगस्त 2018 से ओपीडी के रूप में शुरू हुए एम्स में लगातार सुविधाएं बढ़ रही हैं। 29 अगस्त 2019 को एमबीबीएस के पहले बैच की पढ़ाई शुरू हुई तो अधिशासी निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी के प्रयास से 278 करोड़ रुपये की लागत से 600 बेड के एम्स हॉस्पिटल (चिकित्सीय परिसर) बनने के बाद बीती नौ जुलाई से 300 बेड का हॉस्पिटल शुरू हो गया। एम्स में एमआईआर सहित अन्य जांचें भी शुरू कराई गईं, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण एम्स ऋषिकेश से डॉक्टर आकर यहां जांच करते थे। अब रेडियोलॉजिस्ट डॉ. सूर्य प्रताप सिंह की तैनाती होने के बाद ये जांचें रोजाना होंगी।
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सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की व्यवस्था न हो पाने के कारण कार्डियोलॉजी और गैस्ट्रो के मरीजों को इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही थी। पांच महीने पहले ही कैथलैब तैयार हो गया था, लेकिन अब स्पेशलिस्ट डॉ. अंकित गुप्ता व डॉ. अंशुमान इल्हेंस के आने के बाद हार्ट और गैस्ट्रो के मरीजों का इलाज शुरू हो गया है। एम्स में पीड्रियाट्रिक सर्जरी भी होगी। एम्स में कई और विभाग शुरू करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। एम्स में एमबीबीएस स्टूडेंट्स की परीक्षाओं पर नजर रखने के लिए असिस्टेंट कंट्रोलर ऑफ इग्जामिनेशन नवीनकांत गुप्ता की प्रति नियुक्ति हुई है।
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एम्स के अधिशासी निदेशक प्रो. अरविंद राजवंशी ने बताया कि मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद मेडिकल कॉलेज के ग्राउंड फ्लोर पर ओपीडी के काउंटर बढ़ा दिए गये हैं। पहले से इसी तल पर आईपीडी भी संचालित था, लेकिन अब मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था प्रथम तल पर शिफ्ट कर दी गई है। इससे ओपीडी में आने वाले मरीजों की परेशानी कम होगी। कई काउंटरों के स्थापित होने के बाद अब मरीजों को लंबी लाइन में नहीं लगना पड़ेगा।
एम्स के लिए किसानों से करीब 80 बीघा जमीन लेनी है। इसके लिए शासन से 43 करोड़ रुपये मिलने के बाद बैनामा का काम लगभग पूरा हो चुका है। जल्द ही एम्स को जमीन मिल जाएगी। जमीन मिलते ही एम्स प्रशासन अस्पताल के विस्तार का काम शुरू करेगा। इसके लिए भी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। जल्द ही जमीन अधिग्रहीत करने की प्रक्रिया चल रही है।
एम्स के रजिस्ट्रार/वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी समीर शुक्ल ने बताया कि गैस्ट्रो व कार्डियोलॉजी विभाग शुरू कराए गये हैं। रेडियोलॉजिस्ट के मिलने से एमआरआई व अन्य जांचें अब रोजाना होंगी। 26 फैकल्टी मिलने के बाद मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा मिलेगी। कैथलैब भी प्रभावी ढंग से काम करेगा। किसानों की जमीन के अधिग्रहण का काम चल रहा है। जल्द ही परिसर का विस्तार होगा।