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नोटबंदी से चरमराया बाजार, अब सुधार के आसार

Wed, 07 Dec 2016 11:36 PM IST
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे Updated Wed, 07 Dec 2016 11:36 PM IST
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Notbandi the Crmraya market prospects of improvement
Shoping - फोटो : अमर उजाला
बाजार सजे हैं, खरीदार नहीं, ऐसा मंदी के दौर में होता था, लेकिन 8 नवंबर के बाद से जिले के बाजारों में ऐसे ही हालात दिख रहे हैं। 1000 और 500 के नोट बंद हुए 8 दिसंबर को एक माह पूरे हो रहे हैं। हालात में मामूली सुधार है लेकिन कैश की कमी का असर चौतरफा है।
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कैश लेन-देन में 90 फीसदी तक की कमी आई है। हालांकि इलेक्ट्रॉनिक और चेक पेमेंट बढ़ा है। विभिन्न सेक्टर अपने-अपने तरीकों से हालात से उबरने की कोशिश कर रहे हैं। सोना-चांदी का रेट कम हुआ है, जिसकी वजह से खरीदारी में ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा है।
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सब्जी सस्ती हुई हैं। रीयल स्टेट का कारोबार पर सबसे अधिक असर पड़ा है। इन्हीं हालात, कोशिशों और सुझावों को अमर उजाला ने नोटबंदी के सबसे पहले प्रभावित विभिन्न सेक्टरों के खासोआम भुक्तभोगियों से बात करके समझा और तैयार की यह विशेष रिपोर्ट-
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सराफा व्यवसायी आशु गुप्ता का कहना है कि नोट बंदी का असर सराफा बाजार पर पड़ा है। पहले की अपेक्षा 25 फीसदी धंधा कम हो गया है। ग्राहक अंगूठी, चेन खरीदने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं। लेकिन हार, कंगन नहीं खरीद पा रहे हैं।

सराफा व्यवसायी विवेक श्रीवास्तव और अमन वर्मा का कहना है कि लगन का सीजन चल रहा है। धंधा प्रभावित है। 25 फीसदी धंधे पर असर पड़ा है। लोगों के पास रुपया आएगा तो खरीदारी बढ़ेगी।

किराना व्यवसायी राजकुमार हसानी का कहना है कि 50 फीसदी धंधा कम हो गया है। नोट बंदी के बाद से बिक्री पर बहुत ज्यादा असर पड़ा है। पूरे माह का घरेलू सामान खरीदने की जगह लोग एक सप्ताह का किराना खरीद रहे हैं। बोरी भर की सामान ले जाने वाले ग्राहक झोले में थोड़ा सामान खरीद कर ले जा रहे हैं।

कानपुर के थोक व्यापारी आर्डर के साथ एडवांस पैसा मांग रहे हैं। चीनी-मैदा के थोक व्यापारी गिरजेश सिकरिया का कहना है कि नोटबंदी का बाजार में असर दिखाई पड़ रहा है। बाहर से माल भेजने वाले भी पहले पैसा बाद में माल मंगाने की बात कर रहे है।

बिक्री घटने से भुगतान करने में दिक्कत आ रही है। व्यापारी अरुण कुमार कहते हैं कि नोट बंदी ने सभी कारोबार में मंदी ला दी है। बाजार में ग्राहक दिखाई नहीं पड़ रहे हैं। सब्जी मंडी के कारोबारी मो. शमीम का कहना है कि नोट बंदी के बाद से कारोबार आधा रह गया है।

एक माह पहले जितना माल एक दिन में बिकता था, उतना माल तो अब तीन दिन में बिक पा रहा है। कुछ लोग ही मोबाइल बैंकिंग जानते हैं। बिना नगदी के कोई काम चलने वाला नहीं हैं। सभी प्रकार की सब्जी की विक्रेता नूरजहां कहती हैं कि नोट बंदी से सभी की जेब खाली है।

लोग घर की जरूरतें पूरी नहीं कर पा रहे हैं। सस्ती होने के बाद भी खरीदार नहीं आ रहे हैं। एक माह में आमदनी नाम मात्र की रह गई है। सरकार को नगदी का पूरा इंतजाम करने की ओर कदम उठाना चाहिए।

शहर के सत्यनगर मोड़ पर बने मेगा मार्ट में नोट बंदी के बाद ग्राहकों की संख्या में खासी कमी आई है। मार्ट के सहायक प्रबंधक अनिल कहते हैं कि नोट बंदी के बाद 10 दिन तक तो सेल एक दम ठप सी हो गई थी। धीरे- धीरे कुछ सुधार हुआ है, लेकिन अभी पहले वाली बात नहीं है।

यहीं के कर्मचारी सुधीर व सूर्यभान का कहना है कि गांव व शहर सब जगह के ग्राहक आते हैं गांव के लोगों के पास अभी पेटीएम जैसी सुविधा चलन में नहीं है। अभी इसके अमल में आने में वक्त लगेगा।

यूनियन बैंक तिराहे के कपड़ा व्यवसायी भोला गुप्ता का कहना है कि रुपये की कमी के कारण ठंड में भी लोग गर्म कपड़े की खरीद नहीं कर पा रहे हैं। बहुत कम मार्जिन पर भी कारोबार करने में समस्या आ रही है। ग्राहक बहुत कम संख्या में आ रहे हैं।

नोटबंदी के बाद से रियल स्टेट का कार्य ठंडा पड़ गया है। पुराने निर्माण कार्य बंद हो गए हैं। वहीं नए कार्य शुरू नहीं हो पा रहे हैं। वर्तमान में जो निर्माण चल रहे हैं। उसमें श्रमिकों की संख्या में कटौती कर दी गई है। वहीं जहां श्रमिकों को पहले भुगतान सप्ताह में दे दिया जाता था।

अब 15 से 20 दिन पर भुगतान दिया जा रहा है। स्वाइप मशीन नहीं होने के कारण बिल्डिंग मटेरियल की खरीद में चेक से भुगतान किया जा रहा है। वर्तमान में जिले में ज्यादातर निर्माण कार्य बंद है।

रियल स्टेट कांट्रेक्टर बब्बन सिंह और गोविंद श्रीवास्तव का कहना है कि एक महीने में 70 फीसदी कार्य प्रभावित हुआ है। बिल्डिंग मटेरियल की खरीददारी में आमतौर पर चेक की सहारा लेना पड़ता है। ज्यादातर कारोबारियों के पास स्वाइप मशीन नहीं है। ऐसे में निर्माण कार्य में परेशानी आ रही है।

यूनियन बैंक तिराहे पर बिजली के उपकरण विक्रेता जितेंद्र सिंह का कहना है कि एक माह में धंधा आधे से भी कम हो गया है। हीटर, गीजर, ब्लोअर, रूम हीटर के खरीदार भी नहीं आ रहे हैं। इसके अलावा शादी में गिफ्ट आइटम वाले मिक्सर ग्राइंडर, आयरन, इंडकशन की बिक्री भी नहीं हो रही है।

एसबीआई में स्वाइप मशीन लगाने का आवेदन किया है। चंदेश गोयल व यश गुप्ता का कहना है कि नोट बंदी के चलते खरीदारी कम हुई है। जैसे लोगों के पास रुपया पहुंचेगा, खरीदारी में तेजी आएगी।

नोटबंदी से बाइक और कारों की बिक्री में काफी गिरावट आई है। एक माह में बाइक बिक्री में 30 फीसदी व कार की बिक्री में 40 फीसदी कमी आई है। यामहा बाइक एजेंसी के मालिक विजय रस्तोगी का कहना है कि थोड़े समय के लिए भले ही नुकसान हुआ हो, लेकिन आने वाले दिनों में यह काफी कारगर साबित होगा।

फिलहाल बाइक खरीदने के लिए आरटीजीएस, पेटीएम, चेक ले रहे हैं। स्वाइप मशीन के लिए अप्लाई कर दिया है। सरकार को चाहिए कि इसमें लगने वाले एक प्रतिशत चार्ज बंद करें, ताकि कस्टमर का नुकसान न हो।


वहीं चौपहिया वाहन एजेंसी मालिक हरिहर सिंह का कहना है कि करीब 40 फीसदी कारोबार कम हुआ है। कस्टमर के पास धन तो है, लेकिन वह यह नहीं समझ पा रहे है कि कैसे इस धन को निकालें। बैंक यदि ट्रांजेक्शन में सहयोग करें, तो काफी समस्या का हल हो जाए। चेक के माध्यम से लोग खरीददारी कर रहे हैं।
 
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