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बघेली-अवधी जनजागरण यात्रा में शामिल होंगे चार साहित्यकार
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रायबरेली। काठमांडू से अमरकंटक को जाने वाली बघेली-अवधी जनजागरण यात्रा में इस जिले के चार साहित्यकार भी शामिल होंगे। यात्रा के दौरान जगह-जगह संगोष्ठी, पुस्तकों का लोकार्पण तथा अन्य साहित्यिक कार्यक्रम होंगे। यात्रा में भाग लेने वाले नेपाल एवं भारत के लगभग 30 विद्वानों में रायबरेली जिले से डॉ. शिवप्रकाश अग्निहोत्री, रमाकांत तिवारी रामिल, आचार्य सूर्यप्रसाद निशिहर और इंद्रेश भदौरिया भी शामिल होंगे।
यात्रा में शामिल होने वाले साहित्यकारों ने बताया कि अवधी के प्रतिष्ठित साहित्यकार और लोक परंपराओं के संवाहक डॉ. राम बहादुर मिश्र हिंदी के समग्र उन्नयन एवं सभी बोलियों को एकसूत्र में पिरोने के लिए कार्य कर रहे हैं।
प्रयाग, चित्रकूट, अयोध्या और नैमिष की उनकी चार अवधी यात्राओं का संकल्प रहा है, जिसमें वे तीन कर चुके हैं। नैमिष की यात्रा अभी बाकी है। इस यात्रा से पहले अवधी और बघेली को जोड़ते हुए एक यात्रा मां नर्मदा उद्गम स्थल अमरकंटक के लिए प्रस्थान कर रही है।
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उन्होंने बताया कि यात्रा 20 मार्च को काठमांडू से शुरू होगी। अवध की भूमि पर 21 मार्च को पहुंचेगी और रायबरेली आएगी। इसके बाद प्रयाग, चाकघाट, रीवा, सीधी, शहडोल होते हुए अमरकंटक पहुंचेगी।
वापसी में धारकुंडी और चित्रकूट की यात्रा की जाएगी। इस यात्रा के पड़ाव स्थलों पर कई साहित्यिक परिचर्चाएं, संवाद और गोष्ठी होंगी। बघेली-अवधी के साथ ही नेपाली बोली को भी एक सूत्र में पिरोने का अवसर मिलेगा। यह यात्रा एक साहित्यिक और भाषा मिलन की यात्रा है।
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यात्रा में शामिल होने वाले साहित्यकारों ने बताया कि अवधी के प्रतिष्ठित साहित्यकार और लोक परंपराओं के संवाहक डॉ. राम बहादुर मिश्र हिंदी के समग्र उन्नयन एवं सभी बोलियों को एकसूत्र में पिरोने के लिए कार्य कर रहे हैं।
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प्रयाग, चित्रकूट, अयोध्या और नैमिष की उनकी चार अवधी यात्राओं का संकल्प रहा है, जिसमें वे तीन कर चुके हैं। नैमिष की यात्रा अभी बाकी है। इस यात्रा से पहले अवधी और बघेली को जोड़ते हुए एक यात्रा मां नर्मदा उद्गम स्थल अमरकंटक के लिए प्रस्थान कर रही है।
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उन्होंने बताया कि यात्रा 20 मार्च को काठमांडू से शुरू होगी। अवध की भूमि पर 21 मार्च को पहुंचेगी और रायबरेली आएगी। इसके बाद प्रयाग, चाकघाट, रीवा, सीधी, शहडोल होते हुए अमरकंटक पहुंचेगी।
वापसी में धारकुंडी और चित्रकूट की यात्रा की जाएगी। इस यात्रा के पड़ाव स्थलों पर कई साहित्यिक परिचर्चाएं, संवाद और गोष्ठी होंगी। बघेली-अवधी के साथ ही नेपाली बोली को भी एक सूत्र में पिरोने का अवसर मिलेगा। यह यात्रा एक साहित्यिक और भाषा मिलन की यात्रा है।