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डरावना था कीव का नजारा, पलक झपकते ही धराशायी हो गई बिल्डिंग

Tue, 08 Mar 2022 12:14 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 08 Mar 2022 12:14 AM IST
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medical students returns fron ukraine
सलोन (रायबरेली)। यूक्रेन के कीव शहर का नजारा डरावना था। पांच दिन बंकर में बिताने के बाद वहां से निकलने का मौका मिला। जिस बिल्डिंग में हम लोग रहते थे, उसी के सामने वाली बिल्डिंग में बम गिरा था। देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग धराशायी हो गई थी। उस समय तो लगा कि अब सुरक्षित अपने घर नहीं पहुंच पाऊंगी। बैंक भी बंद थे, खाने-पीने का कुछ सामान नहीं था। बिस्कुट और चिप्स के भरोसे ही पांच दिन नल का पानी पीकर ही दिन बिताए।
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यूक्रेन से लौटकर आई मेडिकल की छात्रा श्रुति रस्तोगी ने कुछ इसी तरह अपनी पीड़ा और वहां के हालात को बयां किया। सलोन कस्बे की रहने वाली मेडिकल छात्रा श्रुति रस्तोगी सोमवार को अपने घर पहुंची तो परिवारीजनों के खुशी के आंसू छलक पड़े। श्रुति कीव शहर में मेडिकल की पढ़ाई कर रही थी। घर पहुंचने पर मां रचना रस्तोगी ने बेटी की आरती उतार कर उसका स्वागत किया। श्रुति अपने पिता शशांक रस्तोगी और रचना रस्तोगी की इकलौती बेटी है।
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सात फरवरी को वह मेडिकल की पढ़ई के लिए यूक्रेन गई थी। सलोन लौटी श्रुति ने बताया कि रूस के हमले में लगभग पांच दिनों तक वह बंकर में थी। इस दौरान बिस्किट और चिप्स खाकर कई दिन बिताया है। डर और दहशत के साये में जिंदगी वीरान होती जा रही थी। उसने बताया कि रूस की एयर स्ट्राइक ने उसके आँखों के सामने एक बिल्डिंग को धराशायी कर दिया था। बताया कि वहां के हालात काफी खराब स्थिति में हैं। पूरे यूक्रेन में जंग का माहौल बना हुआ है।
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बताया कि बस से जब रेलवे स्टेशन पहुंची तो वहां तीन ट्रेनें लोगों से फुल होकर चली गई। लोगों ने हम लोगों को चढ़ने नहीं दिया, धक्का देकर बाहर कर दिया। अंतिम ट्रेन में हम लगभग 50 भारतीय थे। जद्दोजहद करके उस ट्रेन में चढ़े। अगर वह ट्रेन भी छूट जाती तो हम लोग को रात कीव में बितानी पड़ती। फिर शायद हम लोग घर ना आ पाते, क्योंकि धमाके खूब हो रहे थे। अकेला भारत ऐसा देश है, जो अपने देश के मेडिकल छात्रों को सुरक्षित निकाल रहा है। बाकी देश के बच्चे भारतीय ध्वज का सहारा लेकर बार्डर तक का सफर तय कर रहे हैं। श्रुति के पिता ने बताया कि स्लोवाकिया से सलोन तक मोदी सरकार के खर्चे पर उनकी बेटी अपने घर सुरक्षित पहुंची है।
बमबारी से मलबे में बदल गया है कीव
मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए यूक्रेन गई तो एक सपना था कि वहां जाने के बाद डॉक्टर बनकर मरीजों की सेवा करेंगे, लेकिन वहां पर जो हालात बने और वहां का खौफनाक मंजर ने कुछ देर के लिए उनका यह सपना तोड़ दिया। उम्मीद टूट चुकी थी कि अब अपनों से कभी मुलाकात हो पाएगी। बमबारी और गोलीबारी से पूरा कीव शहर मलबे में ढेर हो गया है।

शहर के हनुमंतपुरम निकट त्रिपुला चौराहा की रहने वाली मेडिकल छात्रा गरिमा मिश्रा घर पहुंची तो उसने वहां के हालात को बयां किया। बेटी के घर पहुंचने पर मां पूर्णिमा मिश्रा, पिता विश्वनाथ मिश्रा ने स्वागत किया। मां ने बताया कि बेटी हंगरी होते हुए अपने घर तक पहुंची। हम सब मोदी सरकार को धन्यवाद देते हैं, जिनकी वजह से बेटी सकुशल घर लौटी।
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