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एशियन जूनियर अंडर-14 लॉन टेनिस में एमबिसियस जीता गोल्ड

Sun, 18 Sep 2016 11:58 PM IST
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे Updated Sun, 18 Sep 2016 11:58 PM IST
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Mbisiys won gold in the Asian Junior U-14 lawn tennis
रायबरेली में रविवार को कैपरगंज में एशियन जूनियर अंडर-14 में गोल्ड मेडल विजेता एमबिसियस और उसकी बहन एडवांसी के साथ पिता संजय और कोच संतोष कुमार। - फोटो : अमर उजाला
नेपाल के काठमांडू में हुए एशियन जूनियर अंडर-14 रैकिंग टूर्नामेंट में जिले के होनहार खिलाड़ी एमबिसियस गोल्डस्मिथ ने लान टेनिस में गोल्ड मेडल हासिल कर जिले का ही नहीं, बल्कि प्रदेश और देश का भी गौरव बढ़ाया है।
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यह टूर्नामेंट 12 से 17 सितंबर तक हुआ। एमबिसियस गोल्ड स्मिथ की सफलता पर घर पर बधाई देने के लिए लोगों का तांता लगा हुआ है। जिले में खेल सुविधाओं का टोटा है। वहीं लान टेनिस जैसे महंगे खेल में शहर के कैपरगंज निवासी एमबिसियस गोल्ड स्मिथ और उसकी बड़ी बहन एडवांसी गोल्डस्मिथ ने एक के बाद एक कई सफलताएं हासिल की है।
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नेपाल में एशियन जूनियर अंडर-14 रैकिंग टूर्नामेंट में एमबिसियस गोल्ड स्मिथ ने पहला स्थान हासिल कर गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया है। इससे पहले कांस्य पदक भी हासिल कर चुके हैं। उनकी बड़ी बहन एडवांसी गोल्ड स्मिथ ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन की ओर से यमुना नगर में हुए नेशनल चैंपियनशिप में विजेता रह चुकी है।
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यह प्रतियोगिता 23 से 27 मई को हुई थी। दोनों खिलाड़ी इस सफलता के लिए अपने पिता संजय और मां श्वेता को श्रेय देते हैं। कहते है कि परिवार के सहयोग के कारण ऐसा हो सका है।
टूर्नामेंट में सफलता की सूचना पर जिला क्रीड़ा अधिकारी नसरीन बानों, हॉकी कोच संतोष कुमार ने घर जाकर बधाई दी। वहीं दोनों खिलाड़ियोें को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

इस दौरान 17 सितंबर को टूर्नामेंट से लौटे एमबिसियस गोल्ड स्मिथ को बधाई देने के लिए घर पर लोगों का तांता लगा हुआ है। जिले में एक मात्र मोतीलाल नेहरू स्टेडियम में सुविधाओं का टोटा है। लान टेनिस के लिए कोई कोच भी नहीं है।

ऐसे में दोनों खिलाड़ी प्रेक्टिस के लिए लखनऊ प्रतिदिन जाना पड़ता है। पिता संजय बताते है कि दोनों बच्चे एसजेएस में पढ़ते है। बेटी कक्षा 10 और बेटा नौ का छात्र है। शुरूआती दौर में यहां पर किसी तरह प्रेक्टिस कर ली है। अब लखनऊ जाना पड़ता है। ऐसे में पढ़ाई के बाद निजी वाहन से प्रतिदिन करीब 200 किमी की यात्रा करनी पड़ती है।


पिता संजय भी लान टेनिस के खिलाड़ी रह चुके है। पेशे से सराफा व्यापारी संजय कहते है कि दोनों बच्चों को लान टेनिस खिलाड़ी बनाने की बात सोच रखी थी। यही वजह है कि उनका नाम भी उसी तरह रखा है। बच्चों को शिक्षा के साथ खेल सुविधाएं मुहैया करा रहे हैं। उनकी सोच है कि जिले में एक अच्छा लान टेनिस का कोर्ट हो। इसके लिए जल्द ही प्रयास करेंगे।
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