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मोहर्रम पर इमामबाड़ों में हुई मजलिसें
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रायबरेली। दसवीं मोहर्रम पर शुक्रवार को जिले में कहीं जुलूस नहीं निकले। लोगों ने अपने-अपने घरों में ताजियादारी की। नम आंखों से ताजिए सुुपर्द-ए-खाक किए गए। इमामबाड़ों में हुईं मजलिसों में सीमित संख्या में लोग जुटे। जिन्होंने नौहाख्वानी और मातम किया। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिले भर में कड़ी सुरक्षा रही।
अंजुमन सज्जादिया के पदाधिकारियों की निगरानी में सुबह 8 बजे शहर के खिन्नीतल्ला स्थित इमाम बारगाह जव्वाद हुसैन मरहूम में मजलिस हुई। इसमें इंजीनियर सैयद जमीर अब्बास नकवी ने कर्बला के शहीदों का जिक्र बयान किया।
उन्होंने कहा कि हुसैन आज एक अकेली शख्सियत हैं, जिनका गम किसी मजहब का मोहताज नहीं है। दोपहर में कजियाना स्थित इमाम बारगाह मीर मुज्तबा हुसैन में नौहे पढ़े गए, जिस पर अजादारों ने मातम किया। लोग अपने-अपने ताजिये लेकर कर्बला चक कुंडरी पहुंचे। यहां गाजी हैदर, जरी हैदर व जुहा रिजवी आदि ने नौहे पढ़े।
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परशदेपुर में 10वीं मोहर्रम पर शिया समुदाय के लोगों ने कोविड-19 का पालन करते हुए इमामबाड़े में ही मजलिस की। जंजीर का मातम किया। डॉ. आमिर ने नौहाख्वानी करते हुए पढ़ा, जब तक जिएंगे अहले अजा गम मनाएंगे, बीबी तेरे हुसैन पर आंसू बहाएंगे।
हैदर अली ने पढ़ा, आशूर का सूरज है कयामत की घड़ी है, भाई का गला कटता बहन देख रही है। नौहे सुनकर सभी की आंखों से आंसू छलक पड़े। हिंदु समुदाय के भी काफी लोगों ने भी ताजिये रखे। इशरत नकवी, शम्सी रिजवी, शोफी रिजवी, राशिद, असलम, हैदर अली, बाबर मौजूद रहे। ऊंचाहार कस्बे में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। पुलिस ने फ्लैग मार्च भी किया।
अमेठी जिले के जायस कस्बे में लोगों ने अपने घरों में मोहर्रम मनाया। शांति एवं सुरक्षा के मद्देनजर अधिकारियों ने निगरानी की। जुलूस पर पाबंदी रही, जिससे कहीं कोई जुलूस नहीं निकला। अमेठी के अपर पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार पांडेय कस्बे में भ्रमण करते रहे। उपजिलाधिकारी योगेंद्र सिंह, सीओ तिलोई डॉ. अजय कुमार सिंह, कोतवाली प्रभारी राजेश सिंह भी मौजूद रहे।
बछरावां में मोहर्रम कमेटी के अध्यक्ष सभासद शकील मंसूरी ने बताया कि ताजियादारों ने घरों में ताजिया रखे, कोई जुलूस नहीं निकाला गया। कर्बला में ताजिया दफन कर दिए गए। चूड़ी मंडी, सब्जी मंडी, जागन पुलिया, कमनी तालाब, बबुरिहा खेड़ा, थुलेंडी, सेंहगो, राजामऊ सहित कई गांवों में भी ताजिया रखे गए।
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अंजुमन सज्जादिया के पदाधिकारियों की निगरानी में सुबह 8 बजे शहर के खिन्नीतल्ला स्थित इमाम बारगाह जव्वाद हुसैन मरहूम में मजलिस हुई। इसमें इंजीनियर सैयद जमीर अब्बास नकवी ने कर्बला के शहीदों का जिक्र बयान किया।
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उन्होंने कहा कि हुसैन आज एक अकेली शख्सियत हैं, जिनका गम किसी मजहब का मोहताज नहीं है। दोपहर में कजियाना स्थित इमाम बारगाह मीर मुज्तबा हुसैन में नौहे पढ़े गए, जिस पर अजादारों ने मातम किया। लोग अपने-अपने ताजिये लेकर कर्बला चक कुंडरी पहुंचे। यहां गाजी हैदर, जरी हैदर व जुहा रिजवी आदि ने नौहे पढ़े।
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परशदेपुर में 10वीं मोहर्रम पर शिया समुदाय के लोगों ने कोविड-19 का पालन करते हुए इमामबाड़े में ही मजलिस की। जंजीर का मातम किया। डॉ. आमिर ने नौहाख्वानी करते हुए पढ़ा, जब तक जिएंगे अहले अजा गम मनाएंगे, बीबी तेरे हुसैन पर आंसू बहाएंगे।
हैदर अली ने पढ़ा, आशूर का सूरज है कयामत की घड़ी है, भाई का गला कटता बहन देख रही है। नौहे सुनकर सभी की आंखों से आंसू छलक पड़े। हिंदु समुदाय के भी काफी लोगों ने भी ताजिये रखे। इशरत नकवी, शम्सी रिजवी, शोफी रिजवी, राशिद, असलम, हैदर अली, बाबर मौजूद रहे। ऊंचाहार कस्बे में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। पुलिस ने फ्लैग मार्च भी किया।
अमेठी जिले के जायस कस्बे में लोगों ने अपने घरों में मोहर्रम मनाया। शांति एवं सुरक्षा के मद्देनजर अधिकारियों ने निगरानी की। जुलूस पर पाबंदी रही, जिससे कहीं कोई जुलूस नहीं निकला। अमेठी के अपर पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार पांडेय कस्बे में भ्रमण करते रहे। उपजिलाधिकारी योगेंद्र सिंह, सीओ तिलोई डॉ. अजय कुमार सिंह, कोतवाली प्रभारी राजेश सिंह भी मौजूद रहे।
बछरावां में मोहर्रम कमेटी के अध्यक्ष सभासद शकील मंसूरी ने बताया कि ताजियादारों ने घरों में ताजिया रखे, कोई जुलूस नहीं निकाला गया। कर्बला में ताजिया दफन कर दिए गए। चूड़ी मंडी, सब्जी मंडी, जागन पुलिया, कमनी तालाब, बबुरिहा खेड़ा, थुलेंडी, सेंहगो, राजामऊ सहित कई गांवों में भी ताजिया रखे गए।