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हाईटेक होंगी मशीनें, रोज मिलेगा प्रदूषण का ब्योरा
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रायबरेली। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में वायु प्रदूषण की माप के लिए लगी मशीनें अब हाईटेक होंगी। अभी मशीनें तो लगी हैं, लेकिन उन पर मैनुअल ही काम हो रहा है। वायु प्रदूषण का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) निकालने के लिए तीन से चार लग जाते हैं, लेकिन कंप्यूटराइज मशीनें लगने से हर दिन वायु प्रदूषण का डाटा अपटेड होगा। इसके साथ प्रदूषण बढ़ने पर तत्काल प्रभाव से अधिकारियों को एक्शन लेने में आसानी होगी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल तक मशीन लगने की उम्मीद है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय इंदिरा नगर में है। यहीं पर वायु प्रदूषण मापने की मशीन लगी है। इस मशीन के जरिए कितना वायु प्रदूषण की माप होती है।
इस मशीन से अभी तक मैनुअल काम होता है। वायु प्रदूषण की सही मात्रा तीन से चार दिन बाद मिल पाती है। इससे बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण करने में परेशानी होती है।
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कंप्यूटराइज मशीन लगने से हर दिन कितना प्रदूषण बढ़ा और कितना घटा इसकी रिपोर्ट हर दिन आसानी से मिल जाएगी। इसके साथ ही अधिकारियों को भी वायु प्रदूषण पर नियंत्रण करने में आसानी होगी।
कंप्यूटराइज मशीन लगाने की चल रही तैयारी
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में कंप्यूटराइज मशीन लगाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। यह पूरा सिस्टम लगाने में करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस मशीन के लगने से प्रतिदिन वायु प्रदूषण का डाटा आसानी से मिल सकेगा।
-प्रदीप विश्वकर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय इंदिरा नगर में है। यहीं पर वायु प्रदूषण मापने की मशीन लगी है। इस मशीन के जरिए कितना वायु प्रदूषण की माप होती है।
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इस मशीन से अभी तक मैनुअल काम होता है। वायु प्रदूषण की सही मात्रा तीन से चार दिन बाद मिल पाती है। इससे बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण करने में परेशानी होती है।
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कंप्यूटराइज मशीन लगने से हर दिन कितना प्रदूषण बढ़ा और कितना घटा इसकी रिपोर्ट हर दिन आसानी से मिल जाएगी। इसके साथ ही अधिकारियों को भी वायु प्रदूषण पर नियंत्रण करने में आसानी होगी।
कंप्यूटराइज मशीन लगाने की चल रही तैयारी
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में कंप्यूटराइज मशीन लगाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। यह पूरा सिस्टम लगाने में करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस मशीन के लगने से प्रतिदिन वायु प्रदूषण का डाटा आसानी से मिल सकेगा।
-प्रदीप विश्वकर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड