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कथक कलाकार की प्रस्तुति के बीच बही ज्ञान की गंगा
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रायबरेली। महासंकल्प फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरभेश्वरानंद भैरव महराज कथा व्यास देवी महेश्वरी के साथ रविवार को यहां पहुंचे तो उनका आशीर्वाद पाने के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े। उन्होंने सिविल लाइंस स्थित एक होटल में मूल से परम की यात्रा कार्यक्रम में ज्ञान की गंगा प्रवाहित की, जिसमें सभी लोग गोते लगाते नजर आए।
लखनऊ से आई कथक कलाकार प्रीति तिवारी ने कथक नृत्य के माध्यम से ओम जयंती भवानी... गीत पर देवी स्तुति प्रस्तुत की। इस भक्तिभाव से परिपूर्ण प्रस्तुति ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। शरभेश्वरानंद भैरव महराज ने 51 शक्तिपीठों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने यह भी बताया कि महा शक्तिपीठ मां कामाख्या (गुवाहाटी, असम) में 29 सितंबर से 7 अक्तूबर तक देवी भागवत कथा का आयोजन होना है।
यह मूल से परम की यात्रा का महा आयोजन होगा। मां कामाख्या शक्तिपीठ के चारो तरफ अति प्राचीन दस महाविद्याओं के पीठ स्थापित हैं। मात्र मूल कामाख्या शक्तिपीठ की साधना दर्शन और कृपा प्राप्ति से समस्य दस महाविद्याओं की कृपा भी प्राप्त हो जाती है। देवी महेश्वरी ने भी शक्तिपीठों पर चर्चा करते हुए उनके महत्व पर प्रकाश डाला।
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इसके अलावा कार्यक्रम में महिला सशक्तीकरण और पर्यावरण जैसे अहम मुद्द पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम संयोजक विश्व मंगल परिवार के डॉ. अनुभव श्याम श्रीवास्तव ने गुरु और अध्यापक के बीच अंतर की व्याख्या की। सीतापुर के आरपी पीजी कॉलेज से आए विभागाध्यक्ष डॉ. जयवीर सिंह ने भी विचार व्यक्त किए।
डॉ. चंपा श्रीवास्तव की पुस्तक विन्यास का विमोचन भी किया गया। विभिन्न संगठनों के संदीप जैन, अतुल गुप्ता, त्रिलोचन सिंह छाबड़ा, महेंद्र अग्रवाल, राजेंद्र अवस्थी, मनोज सिंह, आलोक सिंह, विक्रम सिंह ने दोनों अतिथियों का स्वागत व अभिनंदन किया। संचालन सूरज शुक्ला ने किया।
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लखनऊ से आई कथक कलाकार प्रीति तिवारी ने कथक नृत्य के माध्यम से ओम जयंती भवानी... गीत पर देवी स्तुति प्रस्तुत की। इस भक्तिभाव से परिपूर्ण प्रस्तुति ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। शरभेश्वरानंद भैरव महराज ने 51 शक्तिपीठों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने यह भी बताया कि महा शक्तिपीठ मां कामाख्या (गुवाहाटी, असम) में 29 सितंबर से 7 अक्तूबर तक देवी भागवत कथा का आयोजन होना है।
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यह मूल से परम की यात्रा का महा आयोजन होगा। मां कामाख्या शक्तिपीठ के चारो तरफ अति प्राचीन दस महाविद्याओं के पीठ स्थापित हैं। मात्र मूल कामाख्या शक्तिपीठ की साधना दर्शन और कृपा प्राप्ति से समस्य दस महाविद्याओं की कृपा भी प्राप्त हो जाती है। देवी महेश्वरी ने भी शक्तिपीठों पर चर्चा करते हुए उनके महत्व पर प्रकाश डाला।
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इसके अलावा कार्यक्रम में महिला सशक्तीकरण और पर्यावरण जैसे अहम मुद्द पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम संयोजक विश्व मंगल परिवार के डॉ. अनुभव श्याम श्रीवास्तव ने गुरु और अध्यापक के बीच अंतर की व्याख्या की। सीतापुर के आरपी पीजी कॉलेज से आए विभागाध्यक्ष डॉ. जयवीर सिंह ने भी विचार व्यक्त किए।
डॉ. चंपा श्रीवास्तव की पुस्तक विन्यास का विमोचन भी किया गया। विभिन्न संगठनों के संदीप जैन, अतुल गुप्ता, त्रिलोचन सिंह छाबड़ा, महेंद्र अग्रवाल, राजेंद्र अवस्थी, मनोज सिंह, आलोक सिंह, विक्रम सिंह ने दोनों अतिथियों का स्वागत व अभिनंदन किया। संचालन सूरज शुक्ला ने किया।