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तीन जिलों के बिजली समस्या दूर होने में अभी लगेगा वक्त
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रायबरेली। सलोन तहसील क्षेत्र के सिरसिरा में जिले का सबसे बड़े ट्रांसमिशन से बिजली आपूर्ति शुरू होने में अभी वक्त लगेगा। हालांकि शासन ने इससे विद्युत आपूर्ति का समय 31 दिसंबर 2021 निर्धारित किया है।
हालांकि जैसे काम चल रहा है, उससे लगता नहीं तय समय में आपूर्ति शुरू हो पाएगी। सबसे ज्यादा ढीला काम सिविल डिवीजन का है। अब तक भवनों के निर्माण का काम ही अधूरा है। अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
ट्रांसमिशन की आधारशिला रखे चार साल हो गए हैं, लेकिन पावर कॉर्पोरेशन के अभियंताओं की सुस्ती से काम में तेजी नहीं आ रही है। इस ट्रांसमिशन से रायबरेली के अलावा अमेठी और प्रतापगढ़ जिले में विद्युत आपूर्ति की तैयारी है।
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इसके लिए लाइनों का निर्माण हो चुका है। करीब 375 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से तीन जिलों में बिजली की किल्लत दूर होगी। इसी से अमावां ट्रांसमिशन जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही प्रतापगढ़ जिले का सांगीपुर ट्रांसमिशन जुड़ेगा।
ट्रांसमिशन का यार्ड भी पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाया है। इस वजह से अंदर ट्रांसफार्मर समेत अन्य उपकरण लगाने का काम शुरू हो सका है। काम पूरा करने के लिए दिए गए लक्ष्य को पूरा करने के लिए तीन महीने बचे है। यदि इसी तरह काम चलता रहा, तो सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि ट्रांसमिशन का निर्माण तय समय में कैसे पूरा होगा और बिजली समस्या कैसे दूर होगी। इसे लेकर अभियंता गंभीर नहीं है।
घटिया गुणवत्ता की खुली पोल, बाउंड्रीवाल ढही
निर्माणकार्य में मनमानी की पोल खुलने लगे हैं। बनाई गई बाउंड्रीवाल ढह गई। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि निर्माण कार्य में भी गड़बड़ी हो रही है। भवनों के निर्माण की गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए। स्थानीय लोगों ने इसकी जांच कराने की मांग की है। रामसुमेर, बंसीलाल विश्वकर्मा, चंद्रशेखर व मनोज बाजपेयी ने बताया कि मानकों को ताक पर रखकर बाउंड्रीवाल बनाई गई थी। जिससे वह गिर गई। पूरे निर्माण की जांच होनी चाहिए।
करीब 55 फीसदी हो चुका है निर्माण कार्य: एसडीओ
ट्रांसमिशन में सिविल का करीब 55 फीसदी काम हो चुका है। तय समय में काम पूरा करने के लिए तेजी से काम कराया जा रहा है। निर्माण में मानकों का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। पिछले दिनों बारिश होने से मिट्टी बह गई थी, इससे बाउंड्रीवाल गिर गई थी, जिसे ठीक कराने के लिए कार्यदायी एजेंसी को निर्देशित किया गया है।
- अंकित पाठक, एसडीओ सिविल डिवीजन लखनऊ
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हालांकि जैसे काम चल रहा है, उससे लगता नहीं तय समय में आपूर्ति शुरू हो पाएगी। सबसे ज्यादा ढीला काम सिविल डिवीजन का है। अब तक भवनों के निर्माण का काम ही अधूरा है। अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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ट्रांसमिशन की आधारशिला रखे चार साल हो गए हैं, लेकिन पावर कॉर्पोरेशन के अभियंताओं की सुस्ती से काम में तेजी नहीं आ रही है। इस ट्रांसमिशन से रायबरेली के अलावा अमेठी और प्रतापगढ़ जिले में विद्युत आपूर्ति की तैयारी है।
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इसके लिए लाइनों का निर्माण हो चुका है। करीब 375 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से तीन जिलों में बिजली की किल्लत दूर होगी। इसी से अमावां ट्रांसमिशन जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही प्रतापगढ़ जिले का सांगीपुर ट्रांसमिशन जुड़ेगा।
ट्रांसमिशन का यार्ड भी पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाया है। इस वजह से अंदर ट्रांसफार्मर समेत अन्य उपकरण लगाने का काम शुरू हो सका है। काम पूरा करने के लिए दिए गए लक्ष्य को पूरा करने के लिए तीन महीने बचे है। यदि इसी तरह काम चलता रहा, तो सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि ट्रांसमिशन का निर्माण तय समय में कैसे पूरा होगा और बिजली समस्या कैसे दूर होगी। इसे लेकर अभियंता गंभीर नहीं है।
घटिया गुणवत्ता की खुली पोल, बाउंड्रीवाल ढही
निर्माणकार्य में मनमानी की पोल खुलने लगे हैं। बनाई गई बाउंड्रीवाल ढह गई। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि निर्माण कार्य में भी गड़बड़ी हो रही है। भवनों के निर्माण की गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए। स्थानीय लोगों ने इसकी जांच कराने की मांग की है। रामसुमेर, बंसीलाल विश्वकर्मा, चंद्रशेखर व मनोज बाजपेयी ने बताया कि मानकों को ताक पर रखकर बाउंड्रीवाल बनाई गई थी। जिससे वह गिर गई। पूरे निर्माण की जांच होनी चाहिए।
करीब 55 फीसदी हो चुका है निर्माण कार्य: एसडीओ
ट्रांसमिशन में सिविल का करीब 55 फीसदी काम हो चुका है। तय समय में काम पूरा करने के लिए तेजी से काम कराया जा रहा है। निर्माण में मानकों का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। पिछले दिनों बारिश होने से मिट्टी बह गई थी, इससे बाउंड्रीवाल गिर गई थी, जिसे ठीक कराने के लिए कार्यदायी एजेंसी को निर्देशित किया गया है।
- अंकित पाठक, एसडीओ सिविल डिवीजन लखनऊ