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कहीं बड़ों की नादानी बच्चों पर न पड़ जाए भारी
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली
Updated Thu, 28 Jul 2016 12:37 AM IST
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रायबरेली में बुधवार को बाइक पर तीन बच्चों को ले जाता युवक
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में रोजाना हजारों नौनिहालों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है। यह काम करते हैं निजी प्रबंधन के संरक्षण में बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने वाले टैंपो, वैन, बस आदि के वाहन चालक। बुधवार को पड़ताल की गई तो सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश का कहीं पालन होता नहीं दिखा।
इसके पालन को लेकर एआरटीओ, पुलिस व प्रशासन समेत शिक्षा विभाग सबकी जिम्मेदारी तय है, मगर सब अनजान और लापरवाह बने रहकर भदोही जैसे हादसों को न्योता देते दिखते हैं। खास बात ये है कि विभाग में रजिस्टर्ड न होने के बाद भी टेम्पो से बच्चे ढोए जा रहे हैं।
यही नहीं घर के बड़े भी नादानी में बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इसका प्रमाण डिग्री कॉलेज चौराहे पर देखने को मिला। मौजूदा समय में करीब 200 बसें और 100 मैजिकें स्कूलों में लगाई गई हैं। स्कूली वाहनों में बच्चों को भूसे की तरह भरा जाता है।
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स्कूली बैग सामने अथवा अगल-बल लटका दिये जाते हैं। ऐसे वाहन चालकों के लिए न तो कोई गति सीमा है और न सवारी बैठाने की निर्धारित सीट। हाल यह है कि जिन वाहनों को रोड पर परमिट नहीं मिली है और फिटनेस का अभाव है, उन्होंने अपने वाहन स्कूली बच्चों को ढोने में लगा दिया है।
जानकारों के अनुसार 200 से अधिक टेम्पो से बच्चों को ढोया जा रहा है, लेकिन विभाग में इन्हें रजिस्टर्ड तक नहीं कराया गया है। रुपया कमाने के चक्कर में स्कूल संचालक भी अंधेरगर्दी मचाए हुए हैं। कार्रवाई की बारी आती है तो सेटिंग-गेटिंग करके मामले को दबा देते हैं।
ऐसे में थोड़ी सी चूक भदोही जैसी हादसे का सबब बन सकती है। अभिभावक भी इसको लेकर सतर्क नहीं हो रहे हैं। विभाग की सेटिंग-गेटिंग से वाहनों का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है।
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इसके पालन को लेकर एआरटीओ, पुलिस व प्रशासन समेत शिक्षा विभाग सबकी जिम्मेदारी तय है, मगर सब अनजान और लापरवाह बने रहकर भदोही जैसे हादसों को न्योता देते दिखते हैं। खास बात ये है कि विभाग में रजिस्टर्ड न होने के बाद भी टेम्पो से बच्चे ढोए जा रहे हैं।
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यही नहीं घर के बड़े भी नादानी में बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इसका प्रमाण डिग्री कॉलेज चौराहे पर देखने को मिला। मौजूदा समय में करीब 200 बसें और 100 मैजिकें स्कूलों में लगाई गई हैं। स्कूली वाहनों में बच्चों को भूसे की तरह भरा जाता है।
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स्कूली बैग सामने अथवा अगल-बल लटका दिये जाते हैं। ऐसे वाहन चालकों के लिए न तो कोई गति सीमा है और न सवारी बैठाने की निर्धारित सीट। हाल यह है कि जिन वाहनों को रोड पर परमिट नहीं मिली है और फिटनेस का अभाव है, उन्होंने अपने वाहन स्कूली बच्चों को ढोने में लगा दिया है।
जानकारों के अनुसार 200 से अधिक टेम्पो से बच्चों को ढोया जा रहा है, लेकिन विभाग में इन्हें रजिस्टर्ड तक नहीं कराया गया है। रुपया कमाने के चक्कर में स्कूल संचालक भी अंधेरगर्दी मचाए हुए हैं। कार्रवाई की बारी आती है तो सेटिंग-गेटिंग करके मामले को दबा देते हैं।
ऐसे में थोड़ी सी चूक भदोही जैसी हादसे का सबब बन सकती है। अभिभावक भी इसको लेकर सतर्क नहीं हो रहे हैं। विभाग की सेटिंग-गेटिंग से वाहनों का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है।