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बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं कर सकेंगे गुरुजी

Tue, 26 Jul 2016 11:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली Updated Tue, 26 Jul 2016 11:39 PM IST
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Guruji will not be able to play with the future of children
शिक्षक - फोटो : getty
जिले के सरकारी स्कूलों में बदहाल शिक्षण कार्य और नौनिहालों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले वाले शिक्षकों की अब खैर नहीं है। नवागंतुक डीएम ने ऐसे शिक्षकों पर नकेल कसनी शुरू कर दी है। शिक्षण कार्य छोड़ नेतागिरी चमकाने और बीएसए कार्यालय के चक्कर लगाने वाले शिक्षकों को सही ढर्रे पर लाने के लिए रणनीति तैयार कर ली गई है।
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शिक्षकों के शिक्षण कार्य और गतिविधियों पर निगरानी के लिए जल्द ही कंट्रोल रूम बनेगा। इस संबंध में बीएसए को भी निर्देश दे दिया गया है। कंट्रोल रूम से रोजाना शिक्षकों को फोन कर उनके द्वारा किए गए शिक्षण कार्य की जानकारी ली जाएगी।
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नवागंतुक डीएम ने जिले के परिषदीय स्कूलों में गिर रही शैक्षिक गुणवत्ता को ठीक करने के लिए नई पहल की है। शिक्षण व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने और मौज-मस्ती करने वाले शिक्षकों पर शिकंजा कसने के लिए बीएसए कार्यालय में एक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य शिक्षकों की गतिविधियों पर नजर रखना है।
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साथ ही शिक्षण कार्य को और अधिक बेहतर बनाना है। कंट्रोल रूम मौजूद पैनल में तैनात कर्मचारी शिक्षकों को फोन कर उनकी निगरानी करेगा। कंट्रोल रूम से फोन जाने की स्थिति में शिक्षक को उस दिन के पूरे क्रिया कलाप की जानकारी देनी होगी। वहीं शिक्षक स्कूल में है या नहीं, इसके बारे में भी पूछताछ की जाएगी।

आवश्यकता होने पर शिक्षक की पड़ताल भी की जाएगी। इसके लिए जिस शिक्षक के मोबाइल पर फोन किया जाएगा, उससे हेडमास्टर या फिर जिस कक्षा में वह शिक्षणकार्य कर रहा है वहां के बच्चों से बात कराने को कहा जाएगा। डीएम के निर्देश पर बीएसए ने इस नई पहल को अमली जामा भी पहनाना शुरू कर दिया है।

कंट्रोल रूम में छह से सात ऑपरेटर होंगे। साथ ही व्यवस्था को बनाए रखने के लिए दो खंड शिक्षा अधिकारियों को भी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इस संबंध में बीएसए कार्यालय की ओर से कर्मचारियों के नाम पर भी लगभग मुहर लग गई है। डीएम के अनुमति मिलते ही कंट्रोल रूम को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।

बीएसए कार्यालय में आए दिन किसी न किसी बहाने शिक्षक नेता अपने समर्थक शिक्षकों के साथ डटे रहते है। अब ऐसा नहीं हो सकेगा। स्कूल टाइम में बीएसए कार्यालय के चक्कर काटने वाले शिक्षकों पर इस नई पहल से गाज गिरना तय माना जा रहा है। कंट्रोल रूम के शुरू होने की स्थिति में ऐसे शिक्षक या तो शिक्षण कार्य में रुचि लेने लगेंगे या फिर विभागीय कार्रवाई की जद में आ जाएंगे।


बीएसए जीएस निरंजन ने बताया कि डीएम के निर्देश पर कंट्रोल रूम का खाका तैयार कर लिया गया है। इस पहल से परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार होगा। शिक्षक का पहला कर्तव्य है बच्चों को शिक्षित और संस्कारित बनाना। जिले के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की लापरवाही के कारण शैक्षिक गुणवत्ता काफी खराब है। ऐसे में जरूरी है कि स्कूल में शिक्षकों की गतिविधियों के बारे में औचक जानकारी की जाए।
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