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धड़ल्ले से बन रहे फ्लैट, जोखिम में लोगों की जान
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3-रायबरेली शहर में इस तरह बन रहे फ्लैट।।संवाद
- फोटो : RAIBARAILY
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रायबरेली। शहर में धड़ल्ले से फ्लैट तो बनाए जा रहे हैं, लेकिन आग से निपटने के इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। यदि किसी भी फ्लैट में आग लग जाए तो उसे संभालना मुश्किल होगा। खास बात ये है कि बिल्डर अग्निशमन विभाग की एनओसी तक नहीं ले रहे हैं और मनमाने ढंग से इमारतें खड़ी कर रहे हैं। इससे खुद के साथ ही बिल्डर वहां पर रहने वाले लोग और सड़कों से गुजर रहे मुसाफिरों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।
मौजूदा समय में शहर के डिग्री कॉलेज, सुपर मार्केट, घंटाघर, सिविल लाइंस चौराहा, कैपरगंज, हाथी पार्क के पास ही भीड़भाड़ इलाकों में फ्लैट बनाए जा रहे हैं या फिर बनकर तैयार हो गए हैं। इन फ्लैटों पर आग से निपटने के इंतजाम नहीं किए गए हैं। विभागीय अधिकारियों की मानें तो कम से कम हर फ्लैट पर 10 हजार लीटर पानी का टैंक होना चाहिए। फ्लैट जाने के लिए खुला रास्ता होना चाहिए, ताकि आग लगने पर दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंच सकें। अग्निशमन यंत्र लगे होने चाहिए, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। आरडीए से नक्शा पास कराने के बाद मनमाने ढंग से बिल्डर फ्लैट बनवा रहे हैं। यह चूक लोगों के लिए मौत का सबब बन सकती है, लेकिन चंद रुपयों की खातिर बिल्डरों और विभागीय अधिकारियों को यह सब नहीं दिख रहा है।
विभाग का एनओसी देने से इंकार
बिल्डरों के शातिर दिमाग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फ्लैट बनने के बाद ही वह एनओसी के लिए अग्निशमन विभाग कार्यालय पर पहुंचते हैं। फ्लैट निर्माण तक अग्निशमन विभाग की याद उन्हें नहीं आती है। ऐसा इसलिए कि आग से निपटने के इंतजाम न होने पर एनओसी नहीं मिल पाती है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो फ्लैट बनवाने वाले दस लोगों ने एनओसी पाने के लिए अग्निशमन विभाग के कार्यालय पर दस्तक दी, लेकिन फ्लैटों में आग से बचाव के इंतजाम न होने से विभाग ने एनओसी देने से इनकार कर दिया।
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पार्किंग तक की व्यवस्था नहीं
आग से निपटने के इंतजाम करने की कौन बात कहे, जो फ्लैट बनाए जा रहे हैं, वहां पर पार्किंग तक की व्यवस्था नहीं की जा रही है। इससे आए दिन जाम की स्थिति उत्पन्न होती है। जहां पर फ्लैट बनाए जा रहे हैं, वहां पर आने जाने का संकरा रास्ता है। यदि आग लग जाए तो वहां पर दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंच भी नहीं सकती हैं।
शहर में बने या फिर बनाए जा रहे किसी भी फ्लैट में आग से निपटने के कोई इंतजाम नहीं हैं। हर फ्लैट में पानी टैंक, हौजरिल (प्रेशर से पानी देने वाला उपकरण) और खुला स्थान होना चाहिए। फ्लैट बनवाने के बाद लोग विभाग में एनओसी के लिए आते हैं, लेकिन उन्हें एनओसी नहीं दी जाती है। फ्लैट बनने के बाद ही बिल्डर एनओसी लेने के लिए कार्यालय आते हैं। इसके पहले वह फ्लैट मनमाने ढंग से बनवा लेते हैं। इसके लिए रायबरेली विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को कार्रवाई करनी चाहिए। -मनीराम सरोज, जिला अग्निशमन अधिकारी
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मौजूदा समय में शहर के डिग्री कॉलेज, सुपर मार्केट, घंटाघर, सिविल लाइंस चौराहा, कैपरगंज, हाथी पार्क के पास ही भीड़भाड़ इलाकों में फ्लैट बनाए जा रहे हैं या फिर बनकर तैयार हो गए हैं। इन फ्लैटों पर आग से निपटने के इंतजाम नहीं किए गए हैं। विभागीय अधिकारियों की मानें तो कम से कम हर फ्लैट पर 10 हजार लीटर पानी का टैंक होना चाहिए। फ्लैट जाने के लिए खुला रास्ता होना चाहिए, ताकि आग लगने पर दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंच सकें। अग्निशमन यंत्र लगे होने चाहिए, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। आरडीए से नक्शा पास कराने के बाद मनमाने ढंग से बिल्डर फ्लैट बनवा रहे हैं। यह चूक लोगों के लिए मौत का सबब बन सकती है, लेकिन चंद रुपयों की खातिर बिल्डरों और विभागीय अधिकारियों को यह सब नहीं दिख रहा है।
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विभाग का एनओसी देने से इंकार
बिल्डरों के शातिर दिमाग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फ्लैट बनने के बाद ही वह एनओसी के लिए अग्निशमन विभाग कार्यालय पर पहुंचते हैं। फ्लैट निर्माण तक अग्निशमन विभाग की याद उन्हें नहीं आती है। ऐसा इसलिए कि आग से निपटने के इंतजाम न होने पर एनओसी नहीं मिल पाती है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो फ्लैट बनवाने वाले दस लोगों ने एनओसी पाने के लिए अग्निशमन विभाग के कार्यालय पर दस्तक दी, लेकिन फ्लैटों में आग से बचाव के इंतजाम न होने से विभाग ने एनओसी देने से इनकार कर दिया।
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पार्किंग तक की व्यवस्था नहीं
आग से निपटने के इंतजाम करने की कौन बात कहे, जो फ्लैट बनाए जा रहे हैं, वहां पर पार्किंग तक की व्यवस्था नहीं की जा रही है। इससे आए दिन जाम की स्थिति उत्पन्न होती है। जहां पर फ्लैट बनाए जा रहे हैं, वहां पर आने जाने का संकरा रास्ता है। यदि आग लग जाए तो वहां पर दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंच भी नहीं सकती हैं।
शहर में बने या फिर बनाए जा रहे किसी भी फ्लैट में आग से निपटने के कोई इंतजाम नहीं हैं। हर फ्लैट में पानी टैंक, हौजरिल (प्रेशर से पानी देने वाला उपकरण) और खुला स्थान होना चाहिए। फ्लैट बनवाने के बाद लोग विभाग में एनओसी के लिए आते हैं, लेकिन उन्हें एनओसी नहीं दी जाती है। फ्लैट बनने के बाद ही बिल्डर एनओसी लेने के लिए कार्यालय आते हैं। इसके पहले वह फ्लैट मनमाने ढंग से बनवा लेते हैं। इसके लिए रायबरेली विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को कार्रवाई करनी चाहिए। -मनीराम सरोज, जिला अग्निशमन अधिकारी