{"_id":"5d321c598ebc3e6cf60c7b88","slug":"fddi-students-on-the-road-against-management-raibaraily-news-lko4717042127","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रबंधन के खिलाफ सड़क पर उतरे एफडीडीआई के स्टूडेंट्स","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रबंधन के खिलाफ सड़क पर उतरे एफडीडीआई के स्टूडेंट्स
विज्ञापन
रायबरेली। फुटवेयर डिजाइनिंग एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (एफडीडीआई) फुरसतगंज में कई दिन से कैंपस के भीतर प्रबंधन की कार्यशैली को लेकर सुलग रहा आक्रोश शुक्रवार को सड़क पर आ गया। संस्थान के छात्र-छात्राओं ने मेन गेट पर ही नहीं, बल्कि रायबरेली-सुल्तापुर हाईवे पर भी प्रदर्शन किया। मार्च निकाल कर फुसरतगंज थाने पहुंचे और सुनवाई न होने पर हंगामा किया।
पुलिस ने संस्थान में ही समस्या का निराकरण कराने की सलाह देकर टरका दिया। इससे गुस्साए छात्र-छात्राओं ने संस्थान के गेट और सड़क पर जमकर नारेबाजी की। संस्थान के अफसरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन स्टूडेंट्स ने एक नहीं मानी और अपनी मांग पर अड़े रहे। स्टूडेंट्स का कहना है कि उन्हें जबरन दूसरे सेंटर भेजने या फिर कोर्स बदलने का दबाव बनाया जा रहा है, जो उन्हें कतई स्वीकार नहीं है।
एफडीडीआई के फुरसतगंज कैंपस में चार कोर्स की पढ़ाई होती है। इनमें फुटवेयर डिजाइन प्रोडक्शन, फुटवेयर डिजाइन, लेदर गुड्स एंड डिजाइन और डिजाइन फैशन रिटेल मैनेजमेंट शामिल हैं। इनमें छात्र-छात्राओं की संख्या 96 है। लेदर गुडस एंड डिजाइन के 15 और डिजाइन फैशन रिटेल मैनेजमेंट के नौ छात्र-छात्राओं को एक साल बीतने के बाद दूसरे कैंपस यानी छिंदवाड़ा, चंडीगढ़, हैदराबाद में शिफ्ट करने की सलाह दी गई।
विज्ञापन
यह भी कहा गया कि अगर यहीं रहना है तो कोर्स बदलना होगा। प्रबंधन का कहना है कि यहां पर दोनों ही कोर्स में पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण ऐसा फैसला लिया गया है। दूसरे कैंपस जाने से उनकी पढ़ाई सुचारु रूप से हो सकेगी और भविष्य में प्लेसमेंट की कोई समस्या नहीं आएगी। प्रबंधन ने जो फैसला लिया है, उसके बारे में स्टूडेंट्स और उनके अभिभावकों को बता दिया गया था।
दूसरी तरफ छात्र-छात्राओं का कहना है कि प्रबंधन ने बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक उनके सामने इस तरह की बात रख दी, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार योग्य नहीं है। जब प्रवेश लिया गया था तो फुरसतगंज कैंपस को सबसे बेहतर बताते हुए बहुत सारी सहूलियतों देने की बात कही गई थी। यह नहीं बताया गया था कि इस तरह से बीच में ही कैंपस बदला जाएगा या मनचाहा कोर्स पढ़ने का मौका नहीं मिलेगा।
इस तरह जबरन लादे गए फैसले को स्वीकार करने का दबाव बनाया जा रहा है, जो कतई उचित नहीं है। अब चाहे जो हो, हम यहीं अपने चुने गए कोर्स ही पढ़ेंगे, कहीं नहीं जाएंगे। इसके लिए चाहे जितनी लंबी लड़ाई लड़नी पड़े। उधर, फुरसतंगज थाना प्रभारी संदीप कुमार राय का कहना है कि स्टूडेंट्स आए थे, जिन्हें समझा कर वापस कर दिया गया कि संस्थान के उच्च प्रबंधन से बात करें।
प्रबंधन के फैसले से नाराज छात्र-छात्राओं ने 10 बिंदुओं का ज्ञापन सेंटर इंचार्ज ओपी सिंह को सौंपा और न्याय की गुहार लगाई। कीर्ती सिंह, अंशिमा शुक्ला, निहारिका द्विवेदी, सृष्टि पांडेय, अर्जित अमरवाल, प्रांजल श्रीवास्तव आदि छात्र-छात्राओं ने कहा कि लेदर गुडस एंड डिजाइन और डिजाइन फैशन रिटेल मैनेजमेंट को संस्थान से हटाया जा रहा है।
इस बारे स्टूडेंट्स और उनके अभिभावकों को सूचना भी नहीं दी गई। अब दबाव बनाया जा रहा है कि संस्थान छोड़ दो या कोर्स बदल लो। सब कुछ मनमाने तरीके से किया जा रहा है। प्रवेश के समय बताया गया था कि यहां प्रवेश लो, यह एफडीडीआई का दूसरा बेस्ट कैंपस है। अब यहां से दूसरी जगह भेजा जा रहा है। लिखित नोटिस के नाम पर टाइप किया हुआ ऐसा कागज थमाया जा रहा है, जिस पर संस्थान की मुहर नहीं लगी है।
अब इस तरह बीच में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं होने देंगे। एफडीडीआई के सेंटर इंचार्ज ओपी सिंह ने बताया कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए प्रबंधन ने यह फैसला लिया है। इसकी जानकारी पहले ही बच्चों तथा उनके माता-पिता को दी जा चुकी है। निदेशक विकास वर्मा ने हर बच्चे से बात करके इसकी जानकारी दी। प्रबंधन ने जो भी विकल्प तय किए हैं, उसके बारे में भी बता दिया गया है। प्रबंधन ने जो फैसला लिया है, वह स्टूडेंट्स के हित में है।
विज्ञापन
पुलिस ने संस्थान में ही समस्या का निराकरण कराने की सलाह देकर टरका दिया। इससे गुस्साए छात्र-छात्राओं ने संस्थान के गेट और सड़क पर जमकर नारेबाजी की। संस्थान के अफसरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन स्टूडेंट्स ने एक नहीं मानी और अपनी मांग पर अड़े रहे। स्टूडेंट्स का कहना है कि उन्हें जबरन दूसरे सेंटर भेजने या फिर कोर्स बदलने का दबाव बनाया जा रहा है, जो उन्हें कतई स्वीकार नहीं है।
विज्ञापन
एफडीडीआई के फुरसतगंज कैंपस में चार कोर्स की पढ़ाई होती है। इनमें फुटवेयर डिजाइन प्रोडक्शन, फुटवेयर डिजाइन, लेदर गुड्स एंड डिजाइन और डिजाइन फैशन रिटेल मैनेजमेंट शामिल हैं। इनमें छात्र-छात्राओं की संख्या 96 है। लेदर गुडस एंड डिजाइन के 15 और डिजाइन फैशन रिटेल मैनेजमेंट के नौ छात्र-छात्राओं को एक साल बीतने के बाद दूसरे कैंपस यानी छिंदवाड़ा, चंडीगढ़, हैदराबाद में शिफ्ट करने की सलाह दी गई।
विज्ञापन
यह भी कहा गया कि अगर यहीं रहना है तो कोर्स बदलना होगा। प्रबंधन का कहना है कि यहां पर दोनों ही कोर्स में पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण ऐसा फैसला लिया गया है। दूसरे कैंपस जाने से उनकी पढ़ाई सुचारु रूप से हो सकेगी और भविष्य में प्लेसमेंट की कोई समस्या नहीं आएगी। प्रबंधन ने जो फैसला लिया है, उसके बारे में स्टूडेंट्स और उनके अभिभावकों को बता दिया गया था।
दूसरी तरफ छात्र-छात्राओं का कहना है कि प्रबंधन ने बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक उनके सामने इस तरह की बात रख दी, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार योग्य नहीं है। जब प्रवेश लिया गया था तो फुरसतगंज कैंपस को सबसे बेहतर बताते हुए बहुत सारी सहूलियतों देने की बात कही गई थी। यह नहीं बताया गया था कि इस तरह से बीच में ही कैंपस बदला जाएगा या मनचाहा कोर्स पढ़ने का मौका नहीं मिलेगा।
इस तरह जबरन लादे गए फैसले को स्वीकार करने का दबाव बनाया जा रहा है, जो कतई उचित नहीं है। अब चाहे जो हो, हम यहीं अपने चुने गए कोर्स ही पढ़ेंगे, कहीं नहीं जाएंगे। इसके लिए चाहे जितनी लंबी लड़ाई लड़नी पड़े। उधर, फुरसतंगज थाना प्रभारी संदीप कुमार राय का कहना है कि स्टूडेंट्स आए थे, जिन्हें समझा कर वापस कर दिया गया कि संस्थान के उच्च प्रबंधन से बात करें।
प्रबंधन के फैसले से नाराज छात्र-छात्राओं ने 10 बिंदुओं का ज्ञापन सेंटर इंचार्ज ओपी सिंह को सौंपा और न्याय की गुहार लगाई। कीर्ती सिंह, अंशिमा शुक्ला, निहारिका द्विवेदी, सृष्टि पांडेय, अर्जित अमरवाल, प्रांजल श्रीवास्तव आदि छात्र-छात्राओं ने कहा कि लेदर गुडस एंड डिजाइन और डिजाइन फैशन रिटेल मैनेजमेंट को संस्थान से हटाया जा रहा है।
इस बारे स्टूडेंट्स और उनके अभिभावकों को सूचना भी नहीं दी गई। अब दबाव बनाया जा रहा है कि संस्थान छोड़ दो या कोर्स बदल लो। सब कुछ मनमाने तरीके से किया जा रहा है। प्रवेश के समय बताया गया था कि यहां प्रवेश लो, यह एफडीडीआई का दूसरा बेस्ट कैंपस है। अब यहां से दूसरी जगह भेजा जा रहा है। लिखित नोटिस के नाम पर टाइप किया हुआ ऐसा कागज थमाया जा रहा है, जिस पर संस्थान की मुहर नहीं लगी है।
अब इस तरह बीच में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं होने देंगे। एफडीडीआई के सेंटर इंचार्ज ओपी सिंह ने बताया कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए प्रबंधन ने यह फैसला लिया है। इसकी जानकारी पहले ही बच्चों तथा उनके माता-पिता को दी जा चुकी है। निदेशक विकास वर्मा ने हर बच्चे से बात करके इसकी जानकारी दी। प्रबंधन ने जो भी विकल्प तय किए हैं, उसके बारे में भी बता दिया गया है। प्रबंधन ने जो फैसला लिया है, वह स्टूडेंट्स के हित में है।