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प्रसूताओं को घर पहुंचाने के 9,276 केस जांच में फर्जी
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रायबरेली। प्रसूताओं को घर से अस्पताल लाने और प्रसव के बाद घर पहुंचाने में फर्जीवाड़े की पुष्टि जांच में हो गई है। प्रसूताओं के घर पहुंचाने के 9276 केस का लेखाजोखा सीएचसी पर नहीं मिला है। 102 एंबुलेंस संचालक एजेंसी ने तीन माह में प्रसूताओं को घर पहुंचाने की 29664 ट्रिप दिखाकर भुगतान की डिमांड की, लेकिन जांच में मात्र 20,388 ट्रिपों की पुष्टि हुई है। सीएचसी से जांच रिपोर्ट आने के बाद सीएमओ ने अपर निदेशक को रिपोर्ट भेज दी है। एंबुलेंस संचालक एजेंसी की पोल जांच में खुलने के बाद हड़कंप मच गया है।
प्रसूताओं को 102 एंबुलेंस से घरों से अस्पताल लाकर इलाज की सुविधा दिलाई जाती है। प्रसव के बाद प्रसूताओं को इसी एंबुलेंस से घर पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। 102 एंबुलेंस का संचालन करने वाली जीवीके कंपनी ने पिछले जनवरी से मार्च तक तीन महीने में 29,664 केस दिखाकर शासन स्तर पर भुगतान की डिमांड कर दी। शासन के संज्ञान में आया है कि एक की चक्कर में कई प्रसूताओं को घर पहुंचकर अलग-अलग केस दिखाकर भुगतान कराया जा रहा है। मामलेे में अपर निदेशक ने सीएमओ को प्रत्येक केस की जांच कराकर रिपोर्ट देने के आदेश दिए, जिससे भुगतान की प्रक्रिया पूरी कराई जा सके।
सीएमओ ने सभी सीएचसी को केसवार सूची भेजकर जांच कराई तो कंपनी की फर्जी भुगतान की सच्चाई सामने आ गई। 29664 केस में मात्र 20388 केस के रिकॉर्ड ही सीएचसी स्तर पर मिले। भुगतान के लिए दर्शाए गए 9276 केस के रिकॉर्ड सीएचसी के अभिलेखों में नहीं मिले। सीएचसी के स्तर से जांच रिपोर्ट आने के बाद सीएमओ ने रिपोर्ट अपर निदेशक को भेज दी है। बड़े पैमाने पर प्रसूताओं को घर पहुंचाने में फर्जीवाड़ा मिलने के बाद संबंधितों में हड़कंप मच गया है।
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सीएचसी अधीक्षकों की जांच में सामने आई रिपोर्ट
सीएचसी का नाम एजेंसी ने दिखाई ट्रिप जांच में सही मिले केस
अमावां 528 301
बछरावां 1680 1155
डलमऊ 1727 1240
डीह 2181 1365
गौरा-जगतपुर 663 663
हरचंदपर 2452 2065
खीरों 2420 788
लालगंज 1449 1163
महराजगंज 892 892
नसीराबाद 1383 387
राही 3931 3673
रोहनियां 737 663
सलोन 2265 1106
सरेनी 1448 640
सतांव 1635 1609
शिवगढ़ 1254 551
ऊंचाहार 1581 1492
महिला अस्पाल 2340 635
कुल 29664 20388
तीन में 102 एंबुलेंस के 29,664 केसों की जांच सीएचसी अधीक्षकों से कराई गई। जांच में 20,388 केस सही पाए गए हैं। सीएचसी के अभिलेखों में 9276 केसों की पुष्टि नहीं हो सकी है। जांच रिपोर्ट को अपर निदेशक को भेज दिया गया है। -डॉ. आरबी यादव, एसीएमओ/नोडल अधिकारी
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प्रसूताओं को 102 एंबुलेंस से घरों से अस्पताल लाकर इलाज की सुविधा दिलाई जाती है। प्रसव के बाद प्रसूताओं को इसी एंबुलेंस से घर पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। 102 एंबुलेंस का संचालन करने वाली जीवीके कंपनी ने पिछले जनवरी से मार्च तक तीन महीने में 29,664 केस दिखाकर शासन स्तर पर भुगतान की डिमांड कर दी। शासन के संज्ञान में आया है कि एक की चक्कर में कई प्रसूताओं को घर पहुंचकर अलग-अलग केस दिखाकर भुगतान कराया जा रहा है। मामलेे में अपर निदेशक ने सीएमओ को प्रत्येक केस की जांच कराकर रिपोर्ट देने के आदेश दिए, जिससे भुगतान की प्रक्रिया पूरी कराई जा सके।
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सीएमओ ने सभी सीएचसी को केसवार सूची भेजकर जांच कराई तो कंपनी की फर्जी भुगतान की सच्चाई सामने आ गई। 29664 केस में मात्र 20388 केस के रिकॉर्ड ही सीएचसी स्तर पर मिले। भुगतान के लिए दर्शाए गए 9276 केस के रिकॉर्ड सीएचसी के अभिलेखों में नहीं मिले। सीएचसी के स्तर से जांच रिपोर्ट आने के बाद सीएमओ ने रिपोर्ट अपर निदेशक को भेज दी है। बड़े पैमाने पर प्रसूताओं को घर पहुंचाने में फर्जीवाड़ा मिलने के बाद संबंधितों में हड़कंप मच गया है।
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सीएचसी अधीक्षकों की जांच में सामने आई रिपोर्ट
सीएचसी का नाम एजेंसी ने दिखाई ट्रिप जांच में सही मिले केस
अमावां 528 301
बछरावां 1680 1155
डलमऊ 1727 1240
डीह 2181 1365
गौरा-जगतपुर 663 663
हरचंदपर 2452 2065
खीरों 2420 788
लालगंज 1449 1163
महराजगंज 892 892
नसीराबाद 1383 387
राही 3931 3673
रोहनियां 737 663
सलोन 2265 1106
सरेनी 1448 640
सतांव 1635 1609
शिवगढ़ 1254 551
ऊंचाहार 1581 1492
महिला अस्पाल 2340 635
कुल 29664 20388
तीन में 102 एंबुलेंस के 29,664 केसों की जांच सीएचसी अधीक्षकों से कराई गई। जांच में 20,388 केस सही पाए गए हैं। सीएचसी के अभिलेखों में 9276 केसों की पुष्टि नहीं हो सकी है। जांच रिपोर्ट को अपर निदेशक को भेज दिया गया है। -डॉ. आरबी यादव, एसीएमओ/नोडल अधिकारी