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हर धमाका तोड़ देता था जीने की उम्मीद

Thu, 03 Mar 2022 11:59 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 03 Mar 2022 11:59 PM IST
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Every explosion used to break the hope of living
सलोन (रायबरेली)। ...हर तरफ गोलीबारी हो रही थी। ...बिल्डिंगों को निशाना बनाकर बम गिराए जा रहे थे। बंकर में छिपे थे लेकिन डर लगा रहा था कि कहीं इमारत ही न ढह जाए।
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हर धमाका जीने की उम्मीद तोड़ देता था। न खाने के लिए भोजन मिल पा रहा था और न ही प्यास बुझाने के लिए पानी। कई दिन तक भूखे प्यासे रहकर बंकर में रात बितानी पड़ रही थीं।
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उम्मीद टूट चुकी थी कि अब अपनों से कभी मुलाकात हो पाएगी। हालात इस कदर बिगड़ गए हैं कि लोगों के आंसूू नहीं बंद हो रहे हैं। जगह-जगह लोगों की लाशें पड़ी थीं।
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अपनों से बिछुड़ यूक्रेन बच्चे बिलख रहे थे। मानवता शर्मसार हो रही है। यूक्रेन से सकुशल घर लौटे मोहम्मद असद ने युद्ध की त्रासदी बयां की तो रोंगटे खड़े हो गए। वृद्ध दादी अपने लाडले को कलेजे से लिपटाकर फफक पड़ी। मां की आंखों से भी आंसू नहीं रुक रहे थे।
सलोन नगर पंचायत के मोहल्ला मिलकियाना पश्चिमी के रहने वाले मोहम्मद असद पुत्र मोहम्मद अकरम गुरुवार देर शाम अपने घर पहुंच गया।
एसडीएम आशाराम वर्मा असद के घर पहुंचे और उससे कुशलक्षेम पूछा। असद ने बताया कि यूक्रेन के जेप्रोजिया में रहकर पढ़ाई कर रहा था। मेरे साथ हॉस्टल में रहने वाले कई साथियों ने कई दिन बंकर में बिताया। हर धमाका जीने की उम्मीद तोड़ देता था।
सोचता था कि अब जीवित अपने वतन नहीं लौट पाऊंगा। यूक्रेन बॉर्डर पार करने में उन्हें और उनके दोस्तों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सभी को बॉर्डर पार करने की जल्दी थी। असद ने बताया कि अभी भी यूक्रेन में ऐसे कई छात्र फंसे हैं, जिन्हें बॉर्डर पार करने में परेशानी हो रही है।
असद गुरुवार सुबह सात बजे हंगरी से दिल्ली पहुंचे। इसके बाद दिल्ली से बस से होते हुुए अपने घर सलोन पहुंचे। सूचना पर एसडीम आशाराम वर्मा ने असद से मिलकर यूक्रेन के हालात के बारे में चर्चा की।
इस दौरान मां सरवरी बानो, पिता मो. असलम, दादी सलीमुन निशा, भाई मिसबाहुल, चाचा अकरम, आलम, जावेद ने असद के सकुशल घर लौटने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा किया।
यूक्रेन में अब सायरन की आवाज से छा जाती खामोशी
रायबरेली। हर तरफ तबाही का मंजर है। बम गिरता था तो बंकर में छिपकर जान बचानी पड़ती थी। सेना के जवान बाहर नहीं निकलने देते थे। विरोध करने पर मारपीट करने पर आमादा हो जाते थे। लाइन में खड़े कर देते थे। महिलाओं के बाल पकड़कर खींच लेते थे।
डर और दहशत का माहौल था। हम लोगों ने किराए पर बस ली। रोमानिया बॉर्डर से करीब 12 किमी. दूर चालक ने बस रोक दी और कहा कि अब आगे नहीं जाऊंगा।
इसके बाद पैदल चलकर रोमानिया बॉर्डर पहुंचे। बॉर्डर पार किया तो लगा कि अब जिंदगी सलामत है। शहर के आचार्य द्विवेदी नगर के रहने वाले मेडिकल छात्र प्रवीण कुमार सिंह गुरुवार को अपने घर पहुंचे तो उन्होंने यूक्रेन के खौफनाक मंजर बयां किए।
प्रवीण ने बताया कि वह यूवानो फैंकीज शहर स्थित यूवानो फैंकीज मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहा था। बेटे के सकुशल घर पहुंचने पर पिता यदुनाथ सिंह और मां आशा सिंह ने खुशी जताई।
सकुशल बाहर निकालने का मिला मैसेज
ऊंचाहार। क्षेत्र के कोटरा बहादुरगंज गांव निवासी अखिलेश कुमार मौर्य यूक्रेन के सुमी स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस थर्ड ईयर की पढ़ाई कर रहा है। यूक्रेन में रूस की बमबारी के बीच वह फंसा हुआ है, जिससे घरवाले चिंतित हैं, लेकिन इस बीच गुरुवार दोपहर बाद छात्र ने राहत भरी खबर दी है।
छात्र ने भारत सरकार की मदद से किसी भी समय रूस के रास्ते बाहर निकाले जाने का मैसेज आया है। यह जानकारी उसके भाई सत्य प्रकाश ने दी। उन्होंने बताया कि भाई से फोन पर बात हुई है। उसने बताया कि दो दिन से खाने-पीने का सामान खत्म हो गया है।

बड़ी मुश्किल से थोड़ा बहुत सामान मिल पा रहा है। आज दोपहर बाद उसके पास मोबाइल पर मैसेज आया है, जिसमें रूसी सेना द्वारा किसी भी समय उसे रूस के रास्ते बाहर निकालने की बात कही गई। उसे तैयार रहने को कहा गया है। इस खबर से थोड़ी सी राहत मिली है।
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