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बारिश के बाद भी जैन मंदिर में लगा रहा तांता
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जैन मंदिर में पर्युषण पर्व पर पूजा अर्चनी करती महिलाएं।
- फोटो : RAIBARAILY
रायबरेली। पर्युषण महापर्व के सातवें दिन जैन भक्तों ने उत्तम संयम धर्म को अंगीकार कर सुगंध दशमी पर्व धूमधाम से मनाया। बारिश के बावजूद जैन मंदिर में समाज के लोगों का तांता लगा रहा। जैन मंदिर में जैन अनुयायियों ने धूप चढ़ाकर अपने कर्मों का क्षय किया। हवन में दी गई आहुतियों से मंदिर परिसर के चारों ओर का वातावरण महक उठा।
जैन धर्म के दशलाक्षणी पर्व के सातवें दिन गुरुवार को उत्तम तप धर्म की आराधना एवं धूपदशमी मनाई गई। सिविल लाइन स्थित दिगंबर जैन मंदिर में धूमधाम से मनाए जा रहे दशलक्षण पर्व के अंतर्गत प्रात: सर्वप्रथम विराजमान सभी प्रतिमाओं का शुद्ध जल से अभिषेक किया गया।
श्रीजी की शांति धारा करने का सौभाग्य इंदरचंद जैन, सुभाष जैन व संकल्प जैन को सामूहिक रूप से प्राप्त हुआ। दिगंबर जैन मंदिर के चारों ओर धूप की भीनी-भीनी सुगंध वातावरण को सुगंधित कर रही थी। जैन मान्यताओं के अनुसार पर्युषण पर्व के अंतर्गत आने वाली धूपदशमी का काफी महत्व है।
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इंदरचंद जैन ने बताया कि धूपदशमी के दिन हवन कुंड में धूप को अग्नि में समर्पित करने से मनुष्य के कर्मों से राग और द्वेष की भावना का नाश होता है। जीवन मंगलमय होता है। इच्छाओं को रोकना या जीतना ही तप कहलाता है।
जैन समाज के मीडिया प्रभारी अंकित जैन ने बताया कि तेज बारिश के बाद भी लोग जैन मंदिर में काफी संख्या पहुंचे और पूजा-अर्चना की। सायंकालीन प्रतियोगिताओं में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस मौके पर शकुंतला जैन, शारदा जैन, इंदु जैन, अनीता जैन, नेहा जैन, स्वाति जैन, रुचिका जैन, अनुराधा जैन, रजनी जैन, महक जैन, पूजा जैन, अनुराधा जैन, अनिता जैन आदि मौजूद रहीं।
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जैन धर्म के दशलाक्षणी पर्व के सातवें दिन गुरुवार को उत्तम तप धर्म की आराधना एवं धूपदशमी मनाई गई। सिविल लाइन स्थित दिगंबर जैन मंदिर में धूमधाम से मनाए जा रहे दशलक्षण पर्व के अंतर्गत प्रात: सर्वप्रथम विराजमान सभी प्रतिमाओं का शुद्ध जल से अभिषेक किया गया।
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श्रीजी की शांति धारा करने का सौभाग्य इंदरचंद जैन, सुभाष जैन व संकल्प जैन को सामूहिक रूप से प्राप्त हुआ। दिगंबर जैन मंदिर के चारों ओर धूप की भीनी-भीनी सुगंध वातावरण को सुगंधित कर रही थी। जैन मान्यताओं के अनुसार पर्युषण पर्व के अंतर्गत आने वाली धूपदशमी का काफी महत्व है।
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इंदरचंद जैन ने बताया कि धूपदशमी के दिन हवन कुंड में धूप को अग्नि में समर्पित करने से मनुष्य के कर्मों से राग और द्वेष की भावना का नाश होता है। जीवन मंगलमय होता है। इच्छाओं को रोकना या जीतना ही तप कहलाता है।
जैन समाज के मीडिया प्रभारी अंकित जैन ने बताया कि तेज बारिश के बाद भी लोग जैन मंदिर में काफी संख्या पहुंचे और पूजा-अर्चना की। सायंकालीन प्रतियोगिताओं में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस मौके पर शकुंतला जैन, शारदा जैन, इंदु जैन, अनीता जैन, नेहा जैन, स्वाति जैन, रुचिका जैन, अनुराधा जैन, रजनी जैन, महक जैन, पूजा जैन, अनुराधा जैन, अनिता जैन आदि मौजूद रहीं।