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Raebareli News: बिजली ने छीना चैन, हर दो घंटे पर हो रही कटौती
Fri, 11 Sep 2026 01:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Fri, 11 Sep 2026 01:01 AM IST
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सतांव क्षेत्र में इस तरह बिजली के पोल पर चढ़ीं हरी झाड़ियां। संवाद
रायबरेली। मांग कम होने के बावजूद बिजली की अंधाधुंध कटौती हो रही है। शहर क्षेत्र में बिजली की आवाजाही से 40 हजार लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। लाइन फॉल्ट, तो कहीं तकनीकी खराबी के चलते बिजली गुल रहती है।
शहर के इंदिरा नगर उपकेंद्र से जुड़े मोहल्लों की बिजली अक्सर बंद रहती है। लोगों का कहना है कि बिजली जाने के बाद अभियंता फोन तक नहीं उठाते हैं। यही हाल प्रगतिपुरम, आचार्य द्विवेदी नगर, अमावां उपकेंद्र का भी है।
यह हाल तब है, जब अनुरक्षण और मेंटीनेंस के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। सबसे खराब हालात ग्रामीण क्षेत्र के हैं। गांवों में शाम छह बजे से सुबह आठ बजे तक हर दो घंटे पर कटौती की जाती है।
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गदागंज के उपभोक्ता रामसिंह यादव, डलमऊ के रामकेश तिवारी, लालगंज के मुकेश कुमार ने बताया कि शाम को बिजली जाने से महिलाओं को खाना बनाने में दिक्कत के साथ बच्चों की पढ़ाई चौपट हो रही है।
बछरावां के रामशंकर, सलोन के बसंतलाल व रामलाल यादव ने बताया कि बिजली बंद होने से लोग सो नहीं पाते। सतांव के ग्रामीण मोहम्मद सुहैल, दिनेश कुमार, ललऊ, संदीप आदि ने बताया कि दिन में फॉल्ट ठीक करने के नाम पर बिजली गुल कर दी जाती है, वहीं रात में अघोषित कटौती का संकट झेलना पड़ रहा है। बताया कि 18 घंटे में महज 12 घंटे बिजली मिल रही है।
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100 मेगावाट घटी मांग, संकट बरकरार
जून व जुलाई में बिजली की अधिकतम मांग 390 मेगावाट तक पहुंची थी, लेकिन अब यह मांग घटकर 290 मेगावाट हो गई है। बावजूद इसके उपभोक्ताओं को बिजली संकट से जूझना पड़ रहा है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि बारिश में बिजली की उपलब्धता कम हो जाती है। उत्पादन इकाई में कोयला भीग जाता है। ऐसे में बिजली के उत्पादन पर असर पड़ता है। उधर, ट्रांसमिशन के अधिशासी अभियंता मयंक मौर्य ने बताया कि पावर ग्रिड कंट्रोल करने के लिए ऊपर से अघोषित कटौती कराई जाती है।
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प्रबंध निदेशक को भेजा पत्र
रायबरेली। रात में अघाेषित कटौती होने से लोगों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। कटौती बंद कराने के लिए जगतपुर के जिला पंचायत सदस्य राकेश सिंह राना ने पावर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक को पत्र भेजा है। उन्होंने निर्धारित रोस्टर के अनुसार बिजली दिए जाने की मांग की। कहा कि बिजली कटौती से बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों को काफी दिक्कत हो रही है। किसानों को सिंचाई के संकट से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में रात में होने वाली कटौती बंद की जाए।
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शहर के इंदिरा नगर उपकेंद्र से जुड़े मोहल्लों की बिजली अक्सर बंद रहती है। लोगों का कहना है कि बिजली जाने के बाद अभियंता फोन तक नहीं उठाते हैं। यही हाल प्रगतिपुरम, आचार्य द्विवेदी नगर, अमावां उपकेंद्र का भी है।
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यह हाल तब है, जब अनुरक्षण और मेंटीनेंस के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। सबसे खराब हालात ग्रामीण क्षेत्र के हैं। गांवों में शाम छह बजे से सुबह आठ बजे तक हर दो घंटे पर कटौती की जाती है।
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गदागंज के उपभोक्ता रामसिंह यादव, डलमऊ के रामकेश तिवारी, लालगंज के मुकेश कुमार ने बताया कि शाम को बिजली जाने से महिलाओं को खाना बनाने में दिक्कत के साथ बच्चों की पढ़ाई चौपट हो रही है।
बछरावां के रामशंकर, सलोन के बसंतलाल व रामलाल यादव ने बताया कि बिजली बंद होने से लोग सो नहीं पाते। सतांव के ग्रामीण मोहम्मद सुहैल, दिनेश कुमार, ललऊ, संदीप आदि ने बताया कि दिन में फॉल्ट ठीक करने के नाम पर बिजली गुल कर दी जाती है, वहीं रात में अघोषित कटौती का संकट झेलना पड़ रहा है। बताया कि 18 घंटे में महज 12 घंटे बिजली मिल रही है।
100 मेगावाट घटी मांग, संकट बरकरार
जून व जुलाई में बिजली की अधिकतम मांग 390 मेगावाट तक पहुंची थी, लेकिन अब यह मांग घटकर 290 मेगावाट हो गई है। बावजूद इसके उपभोक्ताओं को बिजली संकट से जूझना पड़ रहा है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि बारिश में बिजली की उपलब्धता कम हो जाती है। उत्पादन इकाई में कोयला भीग जाता है। ऐसे में बिजली के उत्पादन पर असर पड़ता है। उधर, ट्रांसमिशन के अधिशासी अभियंता मयंक मौर्य ने बताया कि पावर ग्रिड कंट्रोल करने के लिए ऊपर से अघोषित कटौती कराई जाती है।
प्रबंध निदेशक को भेजा पत्र
रायबरेली। रात में अघाेषित कटौती होने से लोगों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। कटौती बंद कराने के लिए जगतपुर के जिला पंचायत सदस्य राकेश सिंह राना ने पावर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक को पत्र भेजा है। उन्होंने निर्धारित रोस्टर के अनुसार बिजली दिए जाने की मांग की। कहा कि बिजली कटौती से बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों को काफी दिक्कत हो रही है। किसानों को सिंचाई के संकट से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में रात में होने वाली कटौती बंद की जाए।