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Raebareli News: हवा के झोंकों से उड़ रही बिजली
Thu, 28 May 2026 01:06 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Thu, 28 May 2026 01:06 AM IST
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रायबरेली। जिले में बिजली व्यवस्था को बेहतर करने के लिए केंद्र सरकार की योजना रिवैंप डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) से भी लोगों को राहत नहीं मिल पाई है। यह हाल तब है, जब योजना के तहत 142 करोड़ रुपये खर्च किए गए है। इसके बाद भी मामूली हवा के झोंकों से बिजली आपूर्ति ठप हो जा रही है। फाल्ट और बिजली कटौती की समस्या बनी हुई है।
सौभाग्य योजना से वर्ष 2017 से 2022 तक करीब एक लाख से ज्यादा लोगों को मुफ्त कनेक्शन देने के साथ गांवों में खुले तारों की जगह केबल डाली गई। योजना से शेष कार्य को पूरा कराने के लिए केंद्र सरकार ने आरडीएसएस योजना शुरू की। योजना का काम भी पूरा हो गया। इसके बाद भी बिजली संकट से लोगों को राहत नहीं मिल पाई है। मामूली हवा चलने में बिजली व्यवस्था चरमरा जाती है। पिछले दिनों आंधी से करीब 800 गांवों की बिजली कई दिनों तक गुल रही। अब भी 10 हजार उपभोक्ता बिजली संकट से जूझ रहे हैं।
खंभों की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल
जहां पर खंभे लगाए गए हैं, उनकी गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। पिछले दिनों आई आंधी में दो हजार से ज्यादा खंभे टूटे। इसमें ज्यादातर वह खंभे हैं, जो योजना के तहत लगाए गए हैं। इससे खंभों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। यही नहीं ज्यादातर खंभों को लगाने के बाद ग्राउटिंग भी नहीं कराई गई। कहीं पेड़ों के बीच तो कहीं जंगलों से होकर बिजली की लाइनें निकाली हैं। इससे हवा आने पर बिजली चरमरा जाती है।
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पेड़ों के गिरने से होती ज्यादा क्षति
पेड़ों के गिरने से तार और खंभे टूट जाते हैं। पिछले दिनों आंधी में पेड़ तारों पर गिर गए। इससे बिजली प्रभावित हुई थी। बिजली आपूर्ति में बेहतर सुधार के प्रयास किए जाते हैं, ताकि उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली मिल सके।
- रविचंद्र श्रीवास्तव, मुख्य अभियंता रायबरेली जोन
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सौभाग्य योजना से वर्ष 2017 से 2022 तक करीब एक लाख से ज्यादा लोगों को मुफ्त कनेक्शन देने के साथ गांवों में खुले तारों की जगह केबल डाली गई। योजना से शेष कार्य को पूरा कराने के लिए केंद्र सरकार ने आरडीएसएस योजना शुरू की। योजना का काम भी पूरा हो गया। इसके बाद भी बिजली संकट से लोगों को राहत नहीं मिल पाई है। मामूली हवा चलने में बिजली व्यवस्था चरमरा जाती है। पिछले दिनों आंधी से करीब 800 गांवों की बिजली कई दिनों तक गुल रही। अब भी 10 हजार उपभोक्ता बिजली संकट से जूझ रहे हैं।
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खंभों की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल
जहां पर खंभे लगाए गए हैं, उनकी गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। पिछले दिनों आई आंधी में दो हजार से ज्यादा खंभे टूटे। इसमें ज्यादातर वह खंभे हैं, जो योजना के तहत लगाए गए हैं। इससे खंभों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। यही नहीं ज्यादातर खंभों को लगाने के बाद ग्राउटिंग भी नहीं कराई गई। कहीं पेड़ों के बीच तो कहीं जंगलों से होकर बिजली की लाइनें निकाली हैं। इससे हवा आने पर बिजली चरमरा जाती है।
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पेड़ों के गिरने से होती ज्यादा क्षति
पेड़ों के गिरने से तार और खंभे टूट जाते हैं। पिछले दिनों आंधी में पेड़ तारों पर गिर गए। इससे बिजली प्रभावित हुई थी। बिजली आपूर्ति में बेहतर सुधार के प्रयास किए जाते हैं, ताकि उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली मिल सके।
- रविचंद्र श्रीवास्तव, मुख्य अभियंता रायबरेली जोन