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भितरघातियों से धोखा खाई कांग्रेस नहीं कर सकी कमाल
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रायबरेली। सांसद सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी पर इस बार कांग्रेस गुल नहीं खिला सकी। पहले की ही तरह इस बार भी जीत को लेकर आश्वस्त कांग्रेस को आखिरकार भितरघातियों ने धोखा दे दिया। सपा का समर्थन और अपनों का पूरा साथ न मिलने के कारण अरसे बाद जिला पंचायत में कमल खिल गया। कांग्रेस के हाथ निराशा ही आई।
पिछले जिला पंचायत चुनाव में अवधेश सिंह अध्यक्ष चुने गए थे। उस समय एमएलसी दिनेश सिंह कांग्रेस में थे। उससे पहले भी एमएलसी के घर में ही यह कुर्सी थी। एमएलसी की अनुजवधू सुमन सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष थीं।
लगातार कई चुनावों से यह कुर्सी कांग्रेस की झोली में रही। बीच में एमएलसी और कांग्रेस में खटास आने के कारण वे भाजपा में शामिल हो गए। इस बार भाजपा ने एमएलसी के अनुरोध पर रोहनियां से डीडीसी रंजना चौधरी को प्रत्याशी बनाया।
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जिला पंचायत सदस्य पदों के चुनाव में भाजपा के मात्र नौ डीडीसी ही जीतकर आए। कांग्रेस के भी नौ डीडीसी जीते। सबसे अधिक सपा के 12 जिला पंचायत सदस्य जीतकर आए।
सपा का समर्थन मिलने के बाद कांग्रेस को पूरी उम्मीद थी कि वह इस बार भी सीट पर कब्जा कर लेगी। बताते हैं कि करीब 35 डीडीसी कांग्रेस के संपर्क में थे। इसी कारण कांग्रेस जीत को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त थी, लेकिन शनिवार को तीन बजे के बाद आए रिजल्ट ने सभी को चौका दिया।
कांग्रेस को उम्मीद से बहुत कम वोट मिले। चर्चा तो यहां तक कि कांग्रेस के साथ घूमने वाले डीडीसी तक काम नहीं आए। अंदर ही अंदर भितरघात होने के कारण कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।
चुनाव में 22 निर्दलीय डीडीसी ने खिलाया गुल
जिले में इस बार 22 डीडीसी निर्दलीय जीतकर आए थे। इसी से स्पष्ट हो गया था कि निर्दलीयों को जो भी अपने पक्ष में कर लेगा, उसी के सिर जीत का सेहरा बंधेगा। हालांकि इसमें कई कांग्रेस भी रहे जिन्हें कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया, फिर भी वे जीतकर आए।
भाजपा प्रत्याशी ने निर्दलीयों का समर्थन लेने के साथ ही कांग्रेसी डीडीसी को भी प्रभावित करके सीट पर कब्जा कर लिया। गांधी परिवार के गढ़ में सपा के 12 डीडीसी होने के बाद भी उसे दावेदारी नहीं की। हालांकि रिजल्ट आने के बाद हर कोई अपने हिसाब से कयासबाजी कर रहा है।
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पिछले जिला पंचायत चुनाव में अवधेश सिंह अध्यक्ष चुने गए थे। उस समय एमएलसी दिनेश सिंह कांग्रेस में थे। उससे पहले भी एमएलसी के घर में ही यह कुर्सी थी। एमएलसी की अनुजवधू सुमन सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष थीं।
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लगातार कई चुनावों से यह कुर्सी कांग्रेस की झोली में रही। बीच में एमएलसी और कांग्रेस में खटास आने के कारण वे भाजपा में शामिल हो गए। इस बार भाजपा ने एमएलसी के अनुरोध पर रोहनियां से डीडीसी रंजना चौधरी को प्रत्याशी बनाया।
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जिला पंचायत सदस्य पदों के चुनाव में भाजपा के मात्र नौ डीडीसी ही जीतकर आए। कांग्रेस के भी नौ डीडीसी जीते। सबसे अधिक सपा के 12 जिला पंचायत सदस्य जीतकर आए।
सपा का समर्थन मिलने के बाद कांग्रेस को पूरी उम्मीद थी कि वह इस बार भी सीट पर कब्जा कर लेगी। बताते हैं कि करीब 35 डीडीसी कांग्रेस के संपर्क में थे। इसी कारण कांग्रेस जीत को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त थी, लेकिन शनिवार को तीन बजे के बाद आए रिजल्ट ने सभी को चौका दिया।
कांग्रेस को उम्मीद से बहुत कम वोट मिले। चर्चा तो यहां तक कि कांग्रेस के साथ घूमने वाले डीडीसी तक काम नहीं आए। अंदर ही अंदर भितरघात होने के कारण कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा।
चुनाव में 22 निर्दलीय डीडीसी ने खिलाया गुल
जिले में इस बार 22 डीडीसी निर्दलीय जीतकर आए थे। इसी से स्पष्ट हो गया था कि निर्दलीयों को जो भी अपने पक्ष में कर लेगा, उसी के सिर जीत का सेहरा बंधेगा। हालांकि इसमें कई कांग्रेस भी रहे जिन्हें कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया, फिर भी वे जीतकर आए।
भाजपा प्रत्याशी ने निर्दलीयों का समर्थन लेने के साथ ही कांग्रेसी डीडीसी को भी प्रभावित करके सीट पर कब्जा कर लिया। गांधी परिवार के गढ़ में सपा के 12 डीडीसी होने के बाद भी उसे दावेदारी नहीं की। हालांकि रिजल्ट आने के बाद हर कोई अपने हिसाब से कयासबाजी कर रहा है।