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20 लाख किताबों की जरूरत, मिली 16 लाख
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रायबरेली। बेसिक शिक्षा विभाग से संचालित विद्यालयों में कक्षाएं शुरू होने के साथ ही छात्र-छात्राओं को पाठ्य पुस्तकें भी बंटने लगी हैं। अभी जिले को शत-प्रतिशत आपूर्ति नहीं हुई है, फिर भी उपलब्ध पुस्तकों को देखते हुए उसी हिसाब से ब्लॉक संसाधन केंद्रों को किताबें भेजी गईं हैं।
इससे स्कूलों तक किताबें पहुंचने लगी हैं, जिनका वितरण शुरू करा दिया गया है। बच्चे स्कूल आ रहे हैं, उन्हें किताबें मिल रही हैं तो पठन-पाठन का माहौल भी बनने लगा है।
कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को पाठ्य पुस्तकों का वितरण किया जाना है। इसके लिए लगभग 20 लाख 22 हजार किताबों की जरूरत है। जरूरत को देखते हुए किताबें मंगाई गईं हैं, लेकिन जुलाई के प्रथम सप्ताह से शुरू हुई पाठ्य पुस्तकों की आपूर्ति अब तक पूरी नहीं हो पाई है।
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अभी तक जिले को लगभग 16 लाख 50 हजार किताबें मिली हैं। लगभग पांच लाख किताबों का आपूर्ति होनी बाकी है। पहले जूनियर हाईस्कूल और फिर प्राइमरी स्कूलों में भौतिक रूप से पठन-पाठन शुरू किए जाने का निर्णय लिया गया, जिस पर स्कूल खुलने से पहले किताबें पहुंचाने की तैयारी की गई। उपलब्ध पाठ्य पुस्तकों की लगभग 70 फीसदी किताबें ब्लॉक संसाधन केंद्रों तक पहुंचाई जा चुकी हैं।
पहले जूनियर हाईस्कूल खुले तो वहां किताबें पहुंचाई गई, फिर प्राइमरी स्कूल भी खुले तो वहां भी किताबें पहुंचाने का सिलसिला शुरू हो गया। जैसे-जैसे स्कूलों में किताबें पहुंच रही हैं, उन्हें छात्र-छात्राओं को बांटा जा रहा है।
इस समय लगभग हर ब्लाक क्षेत्र के स्कूलों में पाठ्य पुस्तक का वितरण हो रहा है। जिला समन्वयक (सामुदायिक शिक्षा) डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया कि हिंदी माध्यम की सभी किताबें आ चुकी हैं, जिनका वितरण कार्य स्कूलों में चल रहा है। लगभग पांच लाख किताबें आनी बाकी हैं, जिनमें ज्यादातर कार्य पुस्तिकाएं शामिल हैं। उर्दू मीडियम और इंग्लिश मीडियम की कुछ किताबें भी अभी नहीं आई हैं। समय से किताबों का वितरण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
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इससे स्कूलों तक किताबें पहुंचने लगी हैं, जिनका वितरण शुरू करा दिया गया है। बच्चे स्कूल आ रहे हैं, उन्हें किताबें मिल रही हैं तो पठन-पाठन का माहौल भी बनने लगा है।
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कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को पाठ्य पुस्तकों का वितरण किया जाना है। इसके लिए लगभग 20 लाख 22 हजार किताबों की जरूरत है। जरूरत को देखते हुए किताबें मंगाई गईं हैं, लेकिन जुलाई के प्रथम सप्ताह से शुरू हुई पाठ्य पुस्तकों की आपूर्ति अब तक पूरी नहीं हो पाई है।
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अभी तक जिले को लगभग 16 लाख 50 हजार किताबें मिली हैं। लगभग पांच लाख किताबों का आपूर्ति होनी बाकी है। पहले जूनियर हाईस्कूल और फिर प्राइमरी स्कूलों में भौतिक रूप से पठन-पाठन शुरू किए जाने का निर्णय लिया गया, जिस पर स्कूल खुलने से पहले किताबें पहुंचाने की तैयारी की गई। उपलब्ध पाठ्य पुस्तकों की लगभग 70 फीसदी किताबें ब्लॉक संसाधन केंद्रों तक पहुंचाई जा चुकी हैं।
पहले जूनियर हाईस्कूल खुले तो वहां किताबें पहुंचाई गई, फिर प्राइमरी स्कूल भी खुले तो वहां भी किताबें पहुंचाने का सिलसिला शुरू हो गया। जैसे-जैसे स्कूलों में किताबें पहुंच रही हैं, उन्हें छात्र-छात्राओं को बांटा जा रहा है।
इस समय लगभग हर ब्लाक क्षेत्र के स्कूलों में पाठ्य पुस्तक का वितरण हो रहा है। जिला समन्वयक (सामुदायिक शिक्षा) डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया कि हिंदी माध्यम की सभी किताबें आ चुकी हैं, जिनका वितरण कार्य स्कूलों में चल रहा है। लगभग पांच लाख किताबें आनी बाकी हैं, जिनमें ज्यादातर कार्य पुस्तिकाएं शामिल हैं। उर्दू मीडियम और इंग्लिश मीडियम की कुछ किताबें भी अभी नहीं आई हैं। समय से किताबों का वितरण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।