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सूखे के हालात, पांच साल में सबसे कम बारिश
रायबरेली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Sep 2015 11:46 PM IST
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मौसम की बेवफाई से हाड़ तोड़ मेहनत करने वाले अन्नदाताओं के चेहरे पर मायूसी ला दी है। जिले में सूखे हालात हैं। धान, अरहर, गन्ना आदि की करीब 50 फीसदी फसल सूखे की चपेट में है।
बारिश का हाल ये है कि पांच साल में इस बार अब तक सबसे कम बारिश हुई है। इस हालात में फसल सूखने के बाद काली पड़ती जा रही है।
जिले के तीन लाख 85 हजार किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। हो भी क्यों ना। किसी तरह धान की रोपाई, अरहर, गन्ना आदि की फसल की बोवाई की।
बारिश ने अरमानों पर पानी फेर दिया है। खासकर धान की फसल अधिक प्रभावित है। एक लाख 43 हजार 86 हेक्टेयर पर धान की बोआई व रोपाई की गई है।
इसमें बछरावां, महराजगंज, हरचंदपुर, लालगंज, अमावां, डलमऊ क्षेत्रों में धान की रोपाई अधिक होती है। पानी बिना फसल जहां सूख रही है, वहीं लपेटक रोग का असर पड़ रहा है।
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लपेटक रोग में धान की फसल की पत्तियां सूखकर पीली पड़ने लगी हैं। दीमक लगने पर पौधे की जड़ सूख जाती है। ऐसे में पौैधा नष्ट हो जाता है। इस बार कम हो रही बारिश रोग लगने की वजह बन रही है।
इस साल अगस्त माह तक 117.57 मिमी बारिश होना रिकार्ड की गई है।
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बारिश का हाल ये है कि पांच साल में इस बार अब तक सबसे कम बारिश हुई है। इस हालात में फसल सूखने के बाद काली पड़ती जा रही है।
जिले के तीन लाख 85 हजार किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। हो भी क्यों ना। किसी तरह धान की रोपाई, अरहर, गन्ना आदि की फसल की बोवाई की।
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बारिश ने अरमानों पर पानी फेर दिया है। खासकर धान की फसल अधिक प्रभावित है। एक लाख 43 हजार 86 हेक्टेयर पर धान की बोआई व रोपाई की गई है।
इसमें बछरावां, महराजगंज, हरचंदपुर, लालगंज, अमावां, डलमऊ क्षेत्रों में धान की रोपाई अधिक होती है। पानी बिना फसल जहां सूख रही है, वहीं लपेटक रोग का असर पड़ रहा है।
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लपेटक रोग में धान की फसल की पत्तियां सूखकर पीली पड़ने लगी हैं। दीमक लगने पर पौधे की जड़ सूख जाती है। ऐसे में पौैधा नष्ट हो जाता है। इस बार कम हो रही बारिश रोग लगने की वजह बन रही है।
इस साल अगस्त माह तक 117.57 मिमी बारिश होना रिकार्ड की गई है।