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Raebareli News: नशीले कफ सिरप से जुड़े दिवाकर और प्रियांशु के तार
Thu, 04 Dec 2025 12:53 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Thu, 04 Dec 2025 12:53 AM IST
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रायबरेली। नशीले कफ सिरप की बिक्री का जिन्न बाहर आने के बाद शुरू की गई जांच में अहम खुलासा हुआ है। पता चला है कि रायबरेली के जिन दवा कारोबारी दिवाकर और प्रियांशु के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है, उनके तार नशीले कफ सिरप सिंडिकेट से जुड़े थे। दोनों सिडिंकेट के अहम सदस्य बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह के खास बताए जा रहे हैं।
खासकर दिवाकर के नशीली कफ सिरप की आपूर्ति रायबरेली, श्रावस्ती, लखनऊ, उन्नाव में नहीं, बल्कि देश के अलावा बांग्लादेश तक किए जाने की बात सामने आई है। सूत्रों का दावा है कि पुलिस के साथ ही स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) भी इस प्रकरण की गोपनीय तरीके से जांच कर रही है। ऐसे में प्रियांशु और दिवाकर के जल्द एसटीएफ के गिरफ्त में आने की बात कही जा रही है। दोनों की गिरफ्तारी के बाद इस सिंडिकेट के पीछे छिपे बड़े चेहरे भी बेनकाब होंगे।
औषधि निरीक्षक शीवेंद्र प्रताप सिंह की ओर से 18 अक्तूबर को मिल एरिया थाने में शहर के कल्लू का पुरवा निवासी एवं अजय फार्मा संचालक दिवाकर सिंह के खिलाफ नशीली कप सिरप की बिक्री करने का केस दर्ज कराया गया था। एफआईआर में दिवाकर के अलावा मेडिसन हाउस बकुलिहा सेमरी के संचालक प्रियांशू गौतम के भी नशीली कफ सिरप की बिक्री करने का उल्लेख किया गया था। प्रदेश में यह मामला जब सुर्खियां बना तो दोनों दवा कारोबारी दुकानें बंद करके फरार हो गए।
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अफसरों ने दुकानों को सील कर दिया। जांच में पता चला कि दिवाकर ने साढ़े पांच लाख और प्रियांशूू ने एक लाख सीरप की बिक्री है। खास बात ये है कि कई नर्सिंगहोम में इस सिरप की बिक्री की गई है। दोनों आरोपियों के साथ ही नर्सिंग होम संचालक भी पुलिस और एसटीएफ के रडार पर हैं।
इन नर्सिंग होम में भेजी गई थी सिरप
दवा कारोबारी दिवाकर की दुकान से मिले दस्तावेजों से पता चला है कि डॉ. सफत खान मलिकमऊ घोसियाना रायबरेली, शिफा हॉस्पिटल नसीराबाद सलोन, शिवशक्ति मेडिकल स्टोर मरियानी बाजार छतौना मरियानी को भी नशीली कफ सीरप आपूर्ति की गई थी। डॉ. सफत खान के यहां 85 तथा शिफा हॉस्पिटल में 150 कफ सिरप आपूर्ति होने की बात सामने आई थी। औषधि से संंबंधित क्रय दस्तावेज केवल शिफा हॉस्पिटल के संचालक के पास मिले थे। जांच में पाया गया है कि दिवाकर कूटरचित फर्जी विक्रय दस्तावेज के जरिये नशीली कफ सिरप का व्यापार किया जा रहा था।
दो साल से चल रहा था खेल... सोता रहा विभाग
रायबरेली से कई जनपदों को नशीली कफ सिरप बिक्री का खेल करीब दो साल से चल रहा था। इसके बावजूद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) सोता रहा। मामला तूल पकड़ा तो अक्तूबर में औषधि निरीक्षक की तरफ से मिल एरिया थाने में एफआईआर दर्ज करा दी गई। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतने साल से लोगों को नशीली सीरप थमाई जा रही थी, इसकी भनक अफसरों को क्यों नहीं हुई। क्या इस पूरे खेल में अफसरों की भूमिका थी। इसका खुलासा तो दिवाकर, प्रियांशू के हत्थे चढ़ने के बाद होगा, लेकिन छह लाख सिरप आसानी से बिक्री होना बताता है कि लापरवाही किस हद तक हुई है।
150 रुपये की शीशी 350 रुपये तक बिकती थी
कोडिनयुक्त सिरप नशीली होती है। ज्यादातर इसका प्रयोग नशा करने के लिए किया जाता है। हर दवा कारोबारी के पास यह सिरप उपलब्ध नहीं रहती थी। एक कफ सिरप की कीमत करीब 150 रुपये थी, लेकिन इसे 300 से 350 रुपये तक बेचा जाता था। बिना मोलभाव किए लोग इस सिरप की खरीद करते थे। इससे जाहिर है कि सिरप की बिक्री से दवा कारोबारियों को कितना फायदा हो रहा था। पुलिस की जांच में पाया गया है कि कफ सिरप बिक्री के नाम पर करोड़ों रुपये का वारा न्यारा किया गया है। इस धंधे से जुड़े दिवाकर और प्रिंयाशू मालामाल हो गए थे।
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खासकर दिवाकर के नशीली कफ सिरप की आपूर्ति रायबरेली, श्रावस्ती, लखनऊ, उन्नाव में नहीं, बल्कि देश के अलावा बांग्लादेश तक किए जाने की बात सामने आई है। सूत्रों का दावा है कि पुलिस के साथ ही स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) भी इस प्रकरण की गोपनीय तरीके से जांच कर रही है। ऐसे में प्रियांशु और दिवाकर के जल्द एसटीएफ के गिरफ्त में आने की बात कही जा रही है। दोनों की गिरफ्तारी के बाद इस सिंडिकेट के पीछे छिपे बड़े चेहरे भी बेनकाब होंगे।
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औषधि निरीक्षक शीवेंद्र प्रताप सिंह की ओर से 18 अक्तूबर को मिल एरिया थाने में शहर के कल्लू का पुरवा निवासी एवं अजय फार्मा संचालक दिवाकर सिंह के खिलाफ नशीली कप सिरप की बिक्री करने का केस दर्ज कराया गया था। एफआईआर में दिवाकर के अलावा मेडिसन हाउस बकुलिहा सेमरी के संचालक प्रियांशू गौतम के भी नशीली कफ सिरप की बिक्री करने का उल्लेख किया गया था। प्रदेश में यह मामला जब सुर्खियां बना तो दोनों दवा कारोबारी दुकानें बंद करके फरार हो गए।
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अफसरों ने दुकानों को सील कर दिया। जांच में पता चला कि दिवाकर ने साढ़े पांच लाख और प्रियांशूू ने एक लाख सीरप की बिक्री है। खास बात ये है कि कई नर्सिंगहोम में इस सिरप की बिक्री की गई है। दोनों आरोपियों के साथ ही नर्सिंग होम संचालक भी पुलिस और एसटीएफ के रडार पर हैं।
इन नर्सिंग होम में भेजी गई थी सिरप
दवा कारोबारी दिवाकर की दुकान से मिले दस्तावेजों से पता चला है कि डॉ. सफत खान मलिकमऊ घोसियाना रायबरेली, शिफा हॉस्पिटल नसीराबाद सलोन, शिवशक्ति मेडिकल स्टोर मरियानी बाजार छतौना मरियानी को भी नशीली कफ सीरप आपूर्ति की गई थी। डॉ. सफत खान के यहां 85 तथा शिफा हॉस्पिटल में 150 कफ सिरप आपूर्ति होने की बात सामने आई थी। औषधि से संंबंधित क्रय दस्तावेज केवल शिफा हॉस्पिटल के संचालक के पास मिले थे। जांच में पाया गया है कि दिवाकर कूटरचित फर्जी विक्रय दस्तावेज के जरिये नशीली कफ सिरप का व्यापार किया जा रहा था।
दो साल से चल रहा था खेल... सोता रहा विभाग
रायबरेली से कई जनपदों को नशीली कफ सिरप बिक्री का खेल करीब दो साल से चल रहा था। इसके बावजूद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) सोता रहा। मामला तूल पकड़ा तो अक्तूबर में औषधि निरीक्षक की तरफ से मिल एरिया थाने में एफआईआर दर्ज करा दी गई। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतने साल से लोगों को नशीली सीरप थमाई जा रही थी, इसकी भनक अफसरों को क्यों नहीं हुई। क्या इस पूरे खेल में अफसरों की भूमिका थी। इसका खुलासा तो दिवाकर, प्रियांशू के हत्थे चढ़ने के बाद होगा, लेकिन छह लाख सिरप आसानी से बिक्री होना बताता है कि लापरवाही किस हद तक हुई है।
150 रुपये की शीशी 350 रुपये तक बिकती थी
कोडिनयुक्त सिरप नशीली होती है। ज्यादातर इसका प्रयोग नशा करने के लिए किया जाता है। हर दवा कारोबारी के पास यह सिरप उपलब्ध नहीं रहती थी। एक कफ सिरप की कीमत करीब 150 रुपये थी, लेकिन इसे 300 से 350 रुपये तक बेचा जाता था। बिना मोलभाव किए लोग इस सिरप की खरीद करते थे। इससे जाहिर है कि सिरप की बिक्री से दवा कारोबारियों को कितना फायदा हो रहा था। पुलिस की जांच में पाया गया है कि कफ सिरप बिक्री के नाम पर करोड़ों रुपये का वारा न्यारा किया गया है। इस धंधे से जुड़े दिवाकर और प्रिंयाशू मालामाल हो गए थे।