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हाईकोर्ट के आदेश से मायूसी

Tue, 16 Mar 2021 12:08 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 16 Mar 2021 12:08 AM IST
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Disappointment by order of High Court
रायबरेली। ग्राम प्रधान, बीडीसी, डीडीसी और ग्राम पंचायत सदस्य पद के लिए आरक्षण की प्रस्तावित सूची जारी होने के बाद सीटों पर दावेदारी ठोकने वाले करीब 35 हजार दावेदारों को बड़ा झटका लग गया। हाईकोर्ट ने वर्ष 1995 को आधार मानकर जारी किए गए आरक्षण को निरस्त करते हुए पिछले चुनावी वर्ष 2015 को आधार मानकर आरक्षण सूची जारी करने के आदेश दिए हैं।
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ऐसी स्थिति में 90 फीसदी सीटों के आरक्षण की प्रस्तावित सूची के आरक्षण में संशोधन होना लगभग तय हो गया है। अब तक सीटों पर करोड़ों रुपये खर्च करने वाले दावेदारों के चेहरे लटक गए हैं।
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तीन मार्च को 988 ग्राम प्रधान, 52 जिला पंचायत सदस्य, 1301 क्षेत्र पंचायत सदस्य और 12419 ग्राम पंचायत सदस्यों की सीटों के आरक्षण की प्रस्तावित सूची जारी की गई थी। यह सूची जारी होने के बाद करीब 35 हजार दावेदार मैदान में उतर आए। पोस्टर, बैनर व होर्डिंग्स आदि से क्षेत्र पट गए। एक-एक दावेदार कई-कई लग्जरी गाड़ियों से तूफानी दौरा भी करने में जुट गए।
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अब तक दावेदारों ने माहौल बनाने के लिए करोड़ रुपये भी खर्च कर दिए। 14 मार्च को आरक्षण की अंतिम सूची प्रकाशित होनी थी लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए इस पर रोक लगा दी थी। सोमवार को हाईकोर्ट ने 1995 को आधार वर्ष मानकर तए किए गए आरक्षण को खारिज करके वर्ष 2015 के चुनाव के आरक्षण को आधार मानकर आरक्षण प्रक्रिया पूरी कराने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब तक चल रही आरक्षण प्रक्रिया पर विराम लग गया है। शासन से जल्द ही नया आदेश जारी होते ही नए सिरे से आरक्षण प्रक्रिया पूरी की जाएगी। हालांकि वर्ष 2015 के चुनाव को आधार मानने पर 90 प्रतिशत तक सीटों के आरक्षण में संशोधन की संभावना है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद दावेदारों के चेहरे लटक गए हैं। दावेदारों की अब तक की तैयारी भी व्यर्थ साबित हो गई है। पूरे जिले में दावेदारों का चुनाव प्रचार भी पूरी तरह से थम गया है।
इस बार शासन ने 25 साल में पिछड़ी या अनुसूचित जाति के लिए एक भी बार आरक्षित न होने वाली सीटों पर संबंधित जातियों को आरक्षण का लाभ देने का निर्णय लिया था। जिले में ग्राम प्रधान की करीब 300 सीटों को इसका लाभ मिलना था लेकिन अब वर्ष 1995 के आरक्षण का आधार खत्म कर दिए जाने के बाद पहली बार आरक्षण का लाभ पाने वाली ग्राम पंचायतों को बड़ा झटका लग गया है। शासन ने पंचायतराज नियमावली में 10वां संशोधन करके यह व्यवस्था करने का प्रयास किया था।
पंचायतीराज विभाग की ओर से पदों के आरक्षण के लिए ग्राम पंचायतों की जातिवार जनसंख्या के साथ ही पिछले पांच चुनावों के आरक्षण के आंकड़े को भी ऑनलाइन करवाया गया लेकिन अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद सारी कसरत बेकार हो गई। सरकार के नए फार्मूले के बाद गांवों में कई धुरंधरों के सपने पर पानी फिरने वाला है तो कइयों को लाभ मिलेगा।

डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम पंचायत सदस्य और प्रधान पदों के लिए जो भी गाइडलाइन आएगी, उसी के हिसाब से दोबारा सीटों का आरक्षण तय किया जाएगा। जल्द ही शासन से नई गाइडलाइन मिलेगी।
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