{"_id":"63485cd468d134730f7898e8","slug":"digital-certificate-raibaraily-news-lko652734724","type":"story","status":"publish","title_hn":"मैं जिंदा हूं...16 हजार पेंशनधारकों को देना होगा प्रमाणपत्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मैं जिंदा हूं...16 हजार पेंशनधारकों को देना होगा प्रमाणपत्र
विज्ञापन
रायबरेली। खुद को जिंदा साबित करने की घड़ी आ गई है। हम बात कर रहे हैं कि जिले के 16 हजार पेंशनधारकों की, जिन्हें साल में एक बार जीवन प्रमाणपत्र जिला कोषागार में जमा करना होता है। अमूनन पेंशनधारक अक्तूबर और नवंबर में ही प्रमाणपत्र जमा करते हैं।
ऐसे में जिला कोषागार में भीड़ हो जाती है, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। समय से प्रमाणपत्र न जमा करने पर पेंशन भी रुक जाती है। ऐसे में विभाग की तरफ से कुछ विकल्प बनाए गए हैं, जिसके जरिए चलने फिरने में लाचार पेंशनधारक घर बैठे जीवन प्रमाणपत्र दे सकते हैं। अक्तूबर माह शुरू हो गया है, लेकिन अभी इक्का-दुक्का पेंशनधारक ही जीवन प्रमाणपत्र जमा करने पहुंच रहे हैं। इसके लिए विभाग की तरफ से तैयारियां भी कर ली गईं हैं।
एप के साथ डाक विभाग का ले सकते हैं सहारा
यदि पेंशनधारक चलने-फिरने में लाचार है। वह जिला कोषागार नहीं पहुंच पा रहे हैं तो उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसके लिए कई विकल्प भी तैयार हैं। अधिकारी बताते हैं कि पेंशनधारक ऐसे साइबर कैफे जाएं, जहां पर बायोमीट्रिक की सुविधा हो।
विज्ञापन
साइबर कैफे से डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (जीवन प्रमाणपत्र) एप पर जाकर पेंशनर अपनी सभी जानकारी भरकर उसे जिला कोषागार कोड रायबरेली 4500 पर भेज सकते हैं। इसके बाद उनका जीवन प्रमाणपत्र स्वीकार कर लिया जाएगा। इसके अलावा कोई पेंशनर बहुत बुजुर्ग है। पूरी तरह से लाचार है तो वह इसकी सूचना अपने क्षेत्र के पोस्ट ऑफिस में दे। पोस्ट ऑफिस में तैनात कर्मचारी पेंशनर के घर जाकर सत्यापन करके उसका जीवन प्रमाणपत्र जिला कोषागार पहुंचाएगा। हालांकि इसके लिए पेंशनर को निर्धारित शुल्क देना होगा। इसके अलावा पेंशनर अपने नजदीकी बैंक के माध्यम से सत्यापन करवाकर बैंक के माध्यम से जीवन प्रमाणपत्र कोषागार भिजवा सकता है।
अधिकतर पेंशनर पहुंचते हैं कोषागार
वैसे तो पेंशनरों के लिए घर बैठे ही जीवन प्रमाणपत्र के विकल्प दिए गए हैं। इसके बाद भी अधिकतर पेंशनर जिला कोषागार ही पहुंचकर जीवन प्रमाणपत्र देते हैं। इसके पीछे अधिकारी तर्क बताते हैं कि रिटायर्ड होने के बाद पेंशनरों का समय घर में ही बीतता है। वह अपने साथियों से नहीं मिल पाते। ऐेसे में वह जिला कोषागार पहुंचकर ही जीवन प्रमाणपत्र देने के लिए इच्छुक रहते हैं।
जिले में 16 पेंशनधारक हैं, जिन्हें साल में एक बार जीवन प्रमाणपत्र देना होता है। अक्तूबर, नवंबर माह में ही अधिकतर पेंशनधारक प्रमाणपत्र देने आते हैं। चलने फिरने में लाचार पेंशनर जो विकल्प दिए गए हैं, उसके तहत अपना जीवन प्रमाणपत्र जिला कोषागार भेज सकते हैं।
जितेंद्र सिंह, वरिष्ठ कोषाधिकारी
विज्ञापन
ऐसे में जिला कोषागार में भीड़ हो जाती है, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। समय से प्रमाणपत्र न जमा करने पर पेंशन भी रुक जाती है। ऐसे में विभाग की तरफ से कुछ विकल्प बनाए गए हैं, जिसके जरिए चलने फिरने में लाचार पेंशनधारक घर बैठे जीवन प्रमाणपत्र दे सकते हैं। अक्तूबर माह शुरू हो गया है, लेकिन अभी इक्का-दुक्का पेंशनधारक ही जीवन प्रमाणपत्र जमा करने पहुंच रहे हैं। इसके लिए विभाग की तरफ से तैयारियां भी कर ली गईं हैं।
विज्ञापन
एप के साथ डाक विभाग का ले सकते हैं सहारा
यदि पेंशनधारक चलने-फिरने में लाचार है। वह जिला कोषागार नहीं पहुंच पा रहे हैं तो उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसके लिए कई विकल्प भी तैयार हैं। अधिकारी बताते हैं कि पेंशनधारक ऐसे साइबर कैफे जाएं, जहां पर बायोमीट्रिक की सुविधा हो।
विज्ञापन
साइबर कैफे से डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (जीवन प्रमाणपत्र) एप पर जाकर पेंशनर अपनी सभी जानकारी भरकर उसे जिला कोषागार कोड रायबरेली 4500 पर भेज सकते हैं। इसके बाद उनका जीवन प्रमाणपत्र स्वीकार कर लिया जाएगा। इसके अलावा कोई पेंशनर बहुत बुजुर्ग है। पूरी तरह से लाचार है तो वह इसकी सूचना अपने क्षेत्र के पोस्ट ऑफिस में दे। पोस्ट ऑफिस में तैनात कर्मचारी पेंशनर के घर जाकर सत्यापन करके उसका जीवन प्रमाणपत्र जिला कोषागार पहुंचाएगा। हालांकि इसके लिए पेंशनर को निर्धारित शुल्क देना होगा। इसके अलावा पेंशनर अपने नजदीकी बैंक के माध्यम से सत्यापन करवाकर बैंक के माध्यम से जीवन प्रमाणपत्र कोषागार भिजवा सकता है।
अधिकतर पेंशनर पहुंचते हैं कोषागार
वैसे तो पेंशनरों के लिए घर बैठे ही जीवन प्रमाणपत्र के विकल्प दिए गए हैं। इसके बाद भी अधिकतर पेंशनर जिला कोषागार ही पहुंचकर जीवन प्रमाणपत्र देते हैं। इसके पीछे अधिकारी तर्क बताते हैं कि रिटायर्ड होने के बाद पेंशनरों का समय घर में ही बीतता है। वह अपने साथियों से नहीं मिल पाते। ऐेसे में वह जिला कोषागार पहुंचकर ही जीवन प्रमाणपत्र देने के लिए इच्छुक रहते हैं।
जिले में 16 पेंशनधारक हैं, जिन्हें साल में एक बार जीवन प्रमाणपत्र देना होता है। अक्तूबर, नवंबर माह में ही अधिकतर पेंशनधारक प्रमाणपत्र देने आते हैं। चलने फिरने में लाचार पेंशनर जो विकल्प दिए गए हैं, उसके तहत अपना जीवन प्रमाणपत्र जिला कोषागार भेज सकते हैं।
जितेंद्र सिंह, वरिष्ठ कोषाधिकारी