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Raebareli News: किसानों को अब छुट्टा गोवंशों से मिलेगी राहत, बनेंगी 13 नई गौशालाएं
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रायबरेली। छुट्टा गोवंशों से जल्द 13 ब्लॉकों के किसानों को कुछ हद तक राहत मिल जाएगी। इसके लिए इन ब्लॉकों में 13 नई गोशालाएं बनाई जाएंगी। इसमें से कुछ गोशालाओं का निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया है।
इस समय खेतो में गेहूं, सरसों, मटर की फसल बोवाई गई है। खासकर वनरोज गेहूं की फसल को चट कर रही हैं। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसान बराबर क्षेत्र में छुट्टा गोवंशों को संरक्षित करनेे के लिए गोशालाओं का निर्माण कराए जाने की मांग कर रहे थे।
ऐसे में पशुपालन विभाग और संबंधित ब्लॉक के अफसरों ने मिलकर गोशालाओं का निर्माण करने का खाका तैयार किया है। इसी के तहत अब गोशालाओं का निर्माण शुरू कराया गया है। गोशालाओं के निर्माण में लगने वाला धन संबंधित ब्लॉक खर्च करेगा। किसी गोशाला में 150 तो किसी गोशाला में 500 गोवंशों को संरक्षित करने की क्षमता तय गई है। गोशालाओं में गोवंशों के रहने, चारा रखने और पेयजल आदि की सुविधाएं होंगी।
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63 गोशालाओं में 18 हजार गोवंश संरक्षित
मौजूदा समय में जिले में 63 गोशालाएं संचालित हैं। इन गोशालाओं में 18 हजार 869 गोवंश संरक्षित किए गए हैं। अधिकारियों का दावा है कि इन गोशालाओं में गोवंशों को संरक्षित करनेे से क्षेत्रीय किसान खुश हैं, क्योंकि उनकी फसलों का नुकसान नहीं हो रहा है।
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इस समय खेतो में गेहूं, सरसों, मटर की फसल बोवाई गई है। खासकर वनरोज गेहूं की फसल को चट कर रही हैं। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसान बराबर क्षेत्र में छुट्टा गोवंशों को संरक्षित करनेे के लिए गोशालाओं का निर्माण कराए जाने की मांग कर रहे थे।
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ऐसे में पशुपालन विभाग और संबंधित ब्लॉक के अफसरों ने मिलकर गोशालाओं का निर्माण करने का खाका तैयार किया है। इसी के तहत अब गोशालाओं का निर्माण शुरू कराया गया है। गोशालाओं के निर्माण में लगने वाला धन संबंधित ब्लॉक खर्च करेगा। किसी गोशाला में 150 तो किसी गोशाला में 500 गोवंशों को संरक्षित करने की क्षमता तय गई है। गोशालाओं में गोवंशों के रहने, चारा रखने और पेयजल आदि की सुविधाएं होंगी।
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63 गोशालाओं में 18 हजार गोवंश संरक्षित
मौजूदा समय में जिले में 63 गोशालाएं संचालित हैं। इन गोशालाओं में 18 हजार 869 गोवंश संरक्षित किए गए हैं। अधिकारियों का दावा है कि इन गोशालाओं में गोवंशों को संरक्षित करनेे से क्षेत्रीय किसान खुश हैं, क्योंकि उनकी फसलों का नुकसान नहीं हो रहा है।