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कोरोना काल में गांवों में 1567 लोगों ने गंवाई जान
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रायबरेली। शासन के गंभीर रुख अख्तियार करने पर कोरोना काल में पिछले तीन महीने में हुई मौतों का सच सामने आने लगा है। तीन महीने में 1567 मौतों की रिपोर्ट भारत सरकार के सीआरएस पोर्टल पर अपलोड की गई है। हालांकि यह आंकड़ा सभी पंचायतों में हुई मौतों की संख्या अपलोड होने के बाद कई गुना बढ़ सकता है।
जिले में पिछले अप्रैल महीने से बड़े कोरोना के कहर ने आम जनजीवन को अस्तव्यस्त कर दिया था। स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में कोरोना संक्रमित होने के बाद 347 लोगों की मौत का आंकड़ा दर्ज है, लेकिन पिछले तीन महीने में गांवों में हुई मौतों ने सभी को दहला दिया। गांवों में सचिवों ने जन्म और मृत्यु के पंजीयन का काम भी ठप कर दिया था, जिसके बाद जिले में हुई मौतों की सही जानकारी सामने नहीं आ सकी।
भारत सरकार के सीआरएस पोर्टल पर जानकारी अपलोड न किए जाने पर महानिदेशक ने गंभीर रुख अपनाकर डीपीआरओ को प्रगति में सुधार लाने के आदेश दिए। इसके बाद भी सुधार न आने पर डीपीआरओ ने सभी 212 ग्रामपंचायत व विकास अधिकारियों का अग्रिम आदेशों तक वेतन ही रोक दिया।
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वेतन रोके जाने के बाद गांवों में जन्म और मृत्यु के पंजीयन का काम भारत सरकार के पोर्टल पर होना शुरू हो गया। अब तक पोर्टल पर 1567 मौतों की रिपोर्ट अपलोड की जा चुकी है। डीह ब्लॉक ने अब तक काम ही नहीं शुरू किया। साथ ही कई ब्लॉकों की प्रगति बेहद धीमी होने के कारण मौतों की सही जानकारी सामने नहीं आ पा रही है।
कोरोना काल में 636 घरों में आई खुशी
जिले में अप्रैल से जून माह के बीच 636 बच्चों ने जन्म लिया। हालांकि भारत सरकार के पोर्टल पर शत प्रतिशत फीडिंग न होने के कारण यह आंकड़ा भी अब तक बहुत कम है। सचिवों ने सभी 988 ग्राम पंचायतों में जन्में बच्चों की रिपोर्ट को ऑनलाइन नहीं किया गया है।
मैंने आज ही जॉइन किया है। भारत सरकार के सीआरएस पोर्टल पर जन्म-मृत्यु पंजीयन के काम को शत प्रतिशत पूरा कराया जाएगा। गांवों में पंचायतीराज विभाग से संचालित योजनाओं को संचालन भी प्रभावी ढंग से कराया जाएगा। सरकारी धन का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा।
- उमाशंकर मिश्रा, डीपीआरओ
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जिले में पिछले अप्रैल महीने से बड़े कोरोना के कहर ने आम जनजीवन को अस्तव्यस्त कर दिया था। स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में कोरोना संक्रमित होने के बाद 347 लोगों की मौत का आंकड़ा दर्ज है, लेकिन पिछले तीन महीने में गांवों में हुई मौतों ने सभी को दहला दिया। गांवों में सचिवों ने जन्म और मृत्यु के पंजीयन का काम भी ठप कर दिया था, जिसके बाद जिले में हुई मौतों की सही जानकारी सामने नहीं आ सकी।
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भारत सरकार के सीआरएस पोर्टल पर जानकारी अपलोड न किए जाने पर महानिदेशक ने गंभीर रुख अपनाकर डीपीआरओ को प्रगति में सुधार लाने के आदेश दिए। इसके बाद भी सुधार न आने पर डीपीआरओ ने सभी 212 ग्रामपंचायत व विकास अधिकारियों का अग्रिम आदेशों तक वेतन ही रोक दिया।
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वेतन रोके जाने के बाद गांवों में जन्म और मृत्यु के पंजीयन का काम भारत सरकार के पोर्टल पर होना शुरू हो गया। अब तक पोर्टल पर 1567 मौतों की रिपोर्ट अपलोड की जा चुकी है। डीह ब्लॉक ने अब तक काम ही नहीं शुरू किया। साथ ही कई ब्लॉकों की प्रगति बेहद धीमी होने के कारण मौतों की सही जानकारी सामने नहीं आ पा रही है।
कोरोना काल में 636 घरों में आई खुशी
जिले में अप्रैल से जून माह के बीच 636 बच्चों ने जन्म लिया। हालांकि भारत सरकार के पोर्टल पर शत प्रतिशत फीडिंग न होने के कारण यह आंकड़ा भी अब तक बहुत कम है। सचिवों ने सभी 988 ग्राम पंचायतों में जन्में बच्चों की रिपोर्ट को ऑनलाइन नहीं किया गया है।
मैंने आज ही जॉइन किया है। भारत सरकार के सीआरएस पोर्टल पर जन्म-मृत्यु पंजीयन के काम को शत प्रतिशत पूरा कराया जाएगा। गांवों में पंचायतीराज विभाग से संचालित योजनाओं को संचालन भी प्रभावी ढंग से कराया जाएगा। सरकारी धन का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा।
- उमाशंकर मिश्रा, डीपीआरओ