फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Raebareli News ›   Covid

श्मशान घाट किनारे का भयावह मंजर, बालू के नीचे दफन दर्जनों शव

Sat, 15 May 2021 09:10 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 15 May 2021 09:10 PM IST
विज्ञापन
Covid
रायबरेली। ...श्मशान घाटों की भयावह तस्वीर देख किसी की भी रूह कांप जाए।...हर तरफ गंगाघाटों पर बालू के ऊंचे-ऊंचे ढेर दिख रहे हैं। इनमें शव दफन हैं। ...दूर-दूर तक बांस की टिट्टी, चादरें और अंतिम संस्कार में उपयोग होने वाला सामान नजर आ रहा है।
विज्ञापन

बालू के ढेर के नीचे दबे कई शवों का कुछ हिस्सा बाहर भी निकल आया है। ...घाट पर अजीब सी खामोशी है। ...दुर्गंध भी आती है। शवों की बेकदरी देख आसपास के गांव के लोग भी हैरत में हैं पर प्रशासन अंजान बना हुआ है।
विज्ञापन

कोरोना काल में मृतकों का आंकड़ा अचानक बढ़ने से दाह संस्कार के लिए घंटों इंतजार करने की बजाए लोग अपनों को मजबूरी में गंगाघाट किनारे बालू में ही दफन करने को विवश हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

कोरोना के कहर के चलते गंगाघाटों पर शवों की संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है। लोगों को अंतिम संस्कार के लिए घंटों पर इंतजार करना पड़ रहा है। मजबूरी में कई लोग अपनों को बालू के नीचे दफन कर रहे हैं।
जिन श्मशान घाटों पर एक दिन में कभी पांच से 12 शव पहुंचते थे, वहां इस समय इनकी संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई है। इस वजह से कभी लकड़ी की कमी तो कभी दाह संस्कार के लिए अन्य चीजों में होने वाली लेटलतीफी से बचने के लिए लोग शवों को बालू में दफन कर रहे हैं।
ग्रामीणों की मानें तो कई बिरादरी में शादी से पहले किसी के खत्म होने पर उनके शवों को जमीन में दफन करने की परंपरा है। इस वजह से भी लोग बालू में शव दफन कर रहे हैं। वहीं लकड़ी की कमी व आर्थिक तंगी भी इसकी एक बड़ी वजह है।
उधर, सोशल मीडिया पर यहां की भयावह तस्वीर वायरल हो रही है। इससे अफसरों में हड़कंप मचा। अफसर इसकी सच्चाई जानने के लिए स्वयं घाटों का जायजा लेते हुए दावा कर रहे हैं कि लोग अपने मनमर्जी से शवों को दफनाने और चिताएं जलाने का काम कर रहे हैं। फिलहाल जिस तरह की तस्वीर श्मशान घाटों की है, उससे लोगों का मन विचलित हो रहा है।
बिखरे पड़े बांस और कपड़े
लालगंज और डलमऊ तहसील के बार्डर पर चिलौला गांव के पास गंगा किनारे के श्मशान घाट की तस्वीर ने सभी को चौंका दिया है। यहां पर मिट्टी में शव दफनाएं दिख रहे हैं। बांस व कपड़े बिखरे पड़े हैं।
बताते हैं कि हर दिन इस घाट पर 15 से ज्यादा शव पहुंच रहे हैं। इसमें से अधिकतर लोग शवों को दफनाने का काम कर रहे हैं। स्थानीय भुल्लू सिंह, राजकुमार, अशोक का कहना है कि शव जलाने के लिए लकड़ी नहीं मिल पा रही है।
इससे लोग मजबूरन होकर शवों को दफना रहे हैं। पैसों की कमी भी इसकी वजह बन रही है। इस घाट पर ऐसा नजारा नहीं दिखा। वहीं कुछ बिरादरी में शादी से पहले मृत्यु होने पर शव को दफन करने की परंपरा है।
दफनाए जा रहे शव
ऊंचाहार। क्षेत्र में गंगा नदी के गोकना घाट, खरौली घाट, गोलाघाट व बादशाहपुर आदि घाटों पर शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है। इसमें गोकना घाट पर दक्षिण वाहिनी गंगा होने की वजह यहां अंतिम संस्कार का अलग महत्व है।
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान इन घाटों पर शवों के आने का सिलसिला अचानक बढ़ गया था। प्रतिदिन 40 से 45 शव घाटों पर आ रहे थे। लोग शवों को जलाने के बजाय दफना रहे थे। हालांकि इधर, शवों के आने की संख्या कम हुई।
गोकना गंगा घाट के तीर्थ पुरोहित शैलेंद्र द्विवेदी, भूपेंद्र व शिव बचन मिश्रा ने बताया कि एक सप्ताह से शवों के अंतिम संस्कार में कमी आई है। इसके पहले प्रतिदिन इन घाटों पर लगभग पचास शवों का अंतिम क्रिया कर्म हो रहा था। भूपेंद्र कुमार और गोलू ने बताया कि आसपास के गांवों में काफी लोग मर रहे हैं। मन बहुत विचलित हो गया है।
लकड़ी की कमी तो प्रधान कराएं इंतजाम
सरेनी। सरेनी क्षेत्र के गेगासो गंगाघाट पर दफनाए गए शवों को कुत्ते नोंच रहे हैं। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस पर हड़कंप मच गया था। उपजिलाधिकारी विनय कुमार मिश्र ने गेगासो श्मशान घाट का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि श्मशान घाट के निरीक्षण के लिए एक संयुक्त टीम गठित की गई है।
जांच के बाद उन्होंने कहा कि शिकायत थी कि शवों को कुत्ते नोचने की बात गलत पाई गई है। जो व्यक्ति परंपरागत तरीके से शव को दफनाना चाहता है, उसे रोका नहीं जा सकता। उन्होंने ग्राम प्रधान देशराज यादव से कहा कि श्मशान घाट की सफाई शीघ्र करा दें और जेसीबी से गड्ढा खोदवाकर उसमें पानी की बोतलें प्लास्टिक कपड़े गंदगी दबा दें।

उन्होंने घाट पर कर्मकांड कराने वाले पंडितों से कहा कि यदि किसी के पास लकड़ी की समस्या है तो ग्राम प्रधान को सूचित करें। लकड़ी मुहैया कराई जाएगी। इस मौके पर सीओ लालगंज डॉ.अंजनी कुमार चतुर्वेदी, तहसीलदार रिचा सिंह, कोतवाल अनिल सिंह मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed