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कोरोना योद्धा बनीं 1300 आशा बहुओं के सिर परिवार नियोजन का जिम्मा
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रायबरेली। कोरोना के बढ़ते कहर के बीच गांव-गांव और शहर के मोहल्लों में काम कर रहीं 1300 आशा बहुएं किसी कोरोना योद्धा से कम नहीं हैं। कोविड सर्विलांस अभियान को शत प्रतिशत पूरा करने के साथ ही जनसंख्या स्थिरता पखवारे में भी जागरूकता के साथ ही गर्भ निरोधन साधनों को भी जरूरतमंदों तक पहुंचाने की इन्हीं की जिम्मेदारी है।
कोरोना संकट काल में इन दिनों स्वास्थ्य संबंधी हर तरह के जागरूकता कार्यक्रम आशा बहुओं के सहारे ही संचालित कराए जा रहे हैं। कोरोना सुरक्षा के पूरे बंदोबस्त न होने के बाद भी वे हर जगह पहुंचकर लोगों को स्वस्थ रखने का काम कर रही हैं। परिवार कल्याण कार्यक्रमों के बारे में जन जागरूकता और परिवार नियोजन साधनों की लोगों तक उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए आशा कार्यकर्ताओं की अहम जिम्मेदारी है।
लोगों को कोरोना से बचाने के लिए आशा बहुओं से काम लगातार लिया जा रहा है। जनसंख्या स्थिरता पखवारा शुरू हुआ है। इसे सफल बनाने के लिए भी आशा बहुओं को ही आगे किया गया है। शहरी एनएचएम के जिला समन्वयक विनय पांडेय का कहना है कि आशा कार्यकर्ताओं को उन दंपत्तियों से जरूर बात करनी है, जिनको परिवार नियोजन की आवश्यकता है। ऐसे लक्षित दंपत्तियों को उनकी पसंद के अनुसार गर्भ निरोधक साधन भी उपलब्ध कराना है।
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इसके अलावा जो महिलाएं अंतरा गर्भनिरोधक इंजेक्शन की सुविधा लेना चाहती हो, उनको आशा स्वास्थ्य इकाई तक लेकर जाएंगी। दंपत्तियों को गर्भ निरोधक साधनों के इस्तेमाल के लिए प्रेरित भी करना है। जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डीएस अस्थाना का कहना है कि जनसंख्या स्थिरता पखवारे के दौरान आशा कार्यकर्ता मास्क जरूर लगाएं। हाथों को बार-बार साबुन से धोएं। कम से कम दो गज की दूरी से बात करें। घर की कुंडी या दरवाजा न छुए और न खटखटाएं। आवाज देकर परिवार के सदस्यों को बुलाएं व बात करें। इसके अलावा कोरोना सुरक्षा के अन्य मानकों को भी ध्यान में रखें, जिससे वे संक्रमित न हों।
गांव स्तर पर आशा बहुओं के माध्यम से सभी स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रम संपन्न कराए जा रहे हैं। कोविड सर्विलांस अभियान के साथ ही जनसंख्या स्थिरता पखवारे की भी पूरी जिम्मेदारी आशा बहुओं को ही दी गई है। इनकी जगह से आसानी और अच्छे तरीके से लक्ष्य की पूर्ति हो जाती है।- डॉ. एके चौधरी, एसीएमओ/ नोडल अधिकारी
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कोरोना संकट काल में इन दिनों स्वास्थ्य संबंधी हर तरह के जागरूकता कार्यक्रम आशा बहुओं के सहारे ही संचालित कराए जा रहे हैं। कोरोना सुरक्षा के पूरे बंदोबस्त न होने के बाद भी वे हर जगह पहुंचकर लोगों को स्वस्थ रखने का काम कर रही हैं। परिवार कल्याण कार्यक्रमों के बारे में जन जागरूकता और परिवार नियोजन साधनों की लोगों तक उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए आशा कार्यकर्ताओं की अहम जिम्मेदारी है।
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लोगों को कोरोना से बचाने के लिए आशा बहुओं से काम लगातार लिया जा रहा है। जनसंख्या स्थिरता पखवारा शुरू हुआ है। इसे सफल बनाने के लिए भी आशा बहुओं को ही आगे किया गया है। शहरी एनएचएम के जिला समन्वयक विनय पांडेय का कहना है कि आशा कार्यकर्ताओं को उन दंपत्तियों से जरूर बात करनी है, जिनको परिवार नियोजन की आवश्यकता है। ऐसे लक्षित दंपत्तियों को उनकी पसंद के अनुसार गर्भ निरोधक साधन भी उपलब्ध कराना है।
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इसके अलावा जो महिलाएं अंतरा गर्भनिरोधक इंजेक्शन की सुविधा लेना चाहती हो, उनको आशा स्वास्थ्य इकाई तक लेकर जाएंगी। दंपत्तियों को गर्भ निरोधक साधनों के इस्तेमाल के लिए प्रेरित भी करना है। जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डीएस अस्थाना का कहना है कि जनसंख्या स्थिरता पखवारे के दौरान आशा कार्यकर्ता मास्क जरूर लगाएं। हाथों को बार-बार साबुन से धोएं। कम से कम दो गज की दूरी से बात करें। घर की कुंडी या दरवाजा न छुए और न खटखटाएं। आवाज देकर परिवार के सदस्यों को बुलाएं व बात करें। इसके अलावा कोरोना सुरक्षा के अन्य मानकों को भी ध्यान में रखें, जिससे वे संक्रमित न हों।
गांव स्तर पर आशा बहुओं के माध्यम से सभी स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रम संपन्न कराए जा रहे हैं। कोविड सर्विलांस अभियान के साथ ही जनसंख्या स्थिरता पखवारे की भी पूरी जिम्मेदारी आशा बहुओं को ही दी गई है। इनकी जगह से आसानी और अच्छे तरीके से लक्ष्य की पूर्ति हो जाती है।- डॉ. एके चौधरी, एसीएमओ/ नोडल अधिकारी