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इनसे सीखें सेवा का जज्बा, खर्चे में की कटौती, तोड़ दिए गुल्लक
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रायबरेली। वैश्विक महामारी कोरोना की चपेट में आने वाले सर्वाधिक वृद्धजन हैं, जिनकी सुरक्षा को अपना दायित्व और नैतिक कर्तव्य मानते हुए कई युवा समाजसेवी आगे आए हैं।
इसी कड़ी में गुरुवार को आईटीआई परिसर स्थित वृद्धाश्रम में कोरोना प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए सौरभ अवस्थी, सुशील कुमार यादव, अशोक कुमार, अंकुर पाल आदि ने वृद्धजनों को भोजन, फल, मास्क, सैनिटाइजर, साबुन आदि वितरित किए।
सौरभ अवस्थी ने कहा कि वृद्धजनों के आशीर्वाद से हम निरंतर सेवा करते रहेंगे, जिसके लिए उन्होंने स्वयं अपने अन्य खर्चों में कटौती की है। सुशील कुमार यादव ने कहा कि वह कोई नशा नहीं करते हैं। जरूरत पड़ने पर गुल्लक तोड़कर पैसा जुटा रहे हैं। इन पैसों का उपयोग बुजुर्गों की सेवा में करके दूसरों को भी आगे आने को प्रेरित किया जा रहा है।
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अशोक कुमार गौतम ने बताया कि बुजुर्गों की सेवा सबसे बड़ा पुण्य है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस विषम परिस्थिति में बैसवारा की पावन भूमि पर सेवादारों की टीम सीमित संसाधनों से निरंतर दो वर्षों से भोजन, कंबल, फल, वस्त्र आदि वितरित कर रही है। इस अवसर पर प्रदीप निर्मल, आशुतोष मिश्र, सुहास रत्न त्रिपाठी, उत्कृष्ट, राजेश लोधी आदि उपस्थित रहे।
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इसी कड़ी में गुरुवार को आईटीआई परिसर स्थित वृद्धाश्रम में कोरोना प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए सौरभ अवस्थी, सुशील कुमार यादव, अशोक कुमार, अंकुर पाल आदि ने वृद्धजनों को भोजन, फल, मास्क, सैनिटाइजर, साबुन आदि वितरित किए।
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सौरभ अवस्थी ने कहा कि वृद्धजनों के आशीर्वाद से हम निरंतर सेवा करते रहेंगे, जिसके लिए उन्होंने स्वयं अपने अन्य खर्चों में कटौती की है। सुशील कुमार यादव ने कहा कि वह कोई नशा नहीं करते हैं। जरूरत पड़ने पर गुल्लक तोड़कर पैसा जुटा रहे हैं। इन पैसों का उपयोग बुजुर्गों की सेवा में करके दूसरों को भी आगे आने को प्रेरित किया जा रहा है।
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अशोक कुमार गौतम ने बताया कि बुजुर्गों की सेवा सबसे बड़ा पुण्य है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस विषम परिस्थिति में बैसवारा की पावन भूमि पर सेवादारों की टीम सीमित संसाधनों से निरंतर दो वर्षों से भोजन, कंबल, फल, वस्त्र आदि वितरित कर रही है। इस अवसर पर प्रदीप निर्मल, आशुतोष मिश्र, सुहास रत्न त्रिपाठी, उत्कृष्ट, राजेश लोधी आदि उपस्थित रहे।