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तीन पंचायतों को मिला मुख्यमंत्री प्रोत्साहन पुरस्कार, पैसे खर्च करने पर रोक
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रायबरेली। मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार योजना के तहत जिले की तीन ग्रामपंचायतों को पुरस्कृत किया गया है। शासन ने ग्राम पंचायतों को पुरस्कार के रूप में 30 लाख रुपये दिए हैं।
हालांकि पंचायत चुनाव के बाद ही पुरस्कार की धनराशि खर्च करने के आदेश दिए गए हैं। यदि बजट पहले खर्च किया गया तो इसके लिए डीपीआरओ खुद जिम्मेदार होंगे, और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामपंचायतों में विकास, सफाई व स्वच्छता सहित अन्य सभी प्रकार के समाज से जुड़े कार्यों को शत प्रतिशत कराने के लिए मुख्यमंत्री के स्तर से ग्रामपंचायतों को पुरस्कृत किया जाता है। इसकेे लिए मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार योजना संचालित की गई है।
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जिले में योजना के तहत वर्ष 2020-21 के लिए 58 पंचायतों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। प्राथमिक जांच में ही 38 ग्राम पंचायतें फेल हो गई थीं। जिला स्तरीय टीम की जांच में 13 ग्रामपंचायतें और बाहर हो गई थीं। जिले स्तर से सात ग्रामपंचायतों को पुरस्कार के लिए शासन स्तर पर भेजा गया था।
प्रदेश की टीम ने आकर सातों ग्राम पंचायतों में मानकों की जांच की थी। जांच के बाद ग्राम पंचायत तौधकपुर, उमरन और प्यारेपुर को पुरस्कृत किया गया है। इसमें तौधकपुर को 12 लाख उमरन को 10 लाख और प्यारेपुर को आठ लाख रुपये पुरस्कार के रूप में दिए गए हैं।
शासन ने पुरस्कार की धनराशि देने के साथ ही बजट को खर्च करने पर रोक भी लगा दी है। पंचायत चुनाव के बाद नई ग्राम पंचायत के गठन के बाद ही पुरस्कार की धनराशि को खर्च करने के आदेश दिए गए हैं। यदि पहले धनराशि खर्च की जाती है तो इसके लिए स्वयं डीपीआरओ जिम्मेदार होंगे।
जिले की तीन ग्राम पंचायतों को इस बार भी मुख्यमंत्री प्रोत्साहन पुरस्कार दिया गया है। तीनों ग्राम पंचायतों को कुल मिला कर पुरस्कार के रूप में 30 लाख रुपये का बजट मिला है। शासन स्तर से धनराशि को खर्च करने पर रोक भी लगाई गई है।
अनिकेत बाजपेयी, जिला परियोजना प्रबंधक
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हालांकि पंचायत चुनाव के बाद ही पुरस्कार की धनराशि खर्च करने के आदेश दिए गए हैं। यदि बजट पहले खर्च किया गया तो इसके लिए डीपीआरओ खुद जिम्मेदार होंगे, और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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ग्रामपंचायतों में विकास, सफाई व स्वच्छता सहित अन्य सभी प्रकार के समाज से जुड़े कार्यों को शत प्रतिशत कराने के लिए मुख्यमंत्री के स्तर से ग्रामपंचायतों को पुरस्कृत किया जाता है। इसकेे लिए मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार योजना संचालित की गई है।
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जिले में योजना के तहत वर्ष 2020-21 के लिए 58 पंचायतों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। प्राथमिक जांच में ही 38 ग्राम पंचायतें फेल हो गई थीं। जिला स्तरीय टीम की जांच में 13 ग्रामपंचायतें और बाहर हो गई थीं। जिले स्तर से सात ग्रामपंचायतों को पुरस्कार के लिए शासन स्तर पर भेजा गया था।
प्रदेश की टीम ने आकर सातों ग्राम पंचायतों में मानकों की जांच की थी। जांच के बाद ग्राम पंचायत तौधकपुर, उमरन और प्यारेपुर को पुरस्कृत किया गया है। इसमें तौधकपुर को 12 लाख उमरन को 10 लाख और प्यारेपुर को आठ लाख रुपये पुरस्कार के रूप में दिए गए हैं।
शासन ने पुरस्कार की धनराशि देने के साथ ही बजट को खर्च करने पर रोक भी लगा दी है। पंचायत चुनाव के बाद नई ग्राम पंचायत के गठन के बाद ही पुरस्कार की धनराशि को खर्च करने के आदेश दिए गए हैं। यदि पहले धनराशि खर्च की जाती है तो इसके लिए स्वयं डीपीआरओ जिम्मेदार होंगे।
जिले की तीन ग्राम पंचायतों को इस बार भी मुख्यमंत्री प्रोत्साहन पुरस्कार दिया गया है। तीनों ग्राम पंचायतों को कुल मिला कर पुरस्कार के रूप में 30 लाख रुपये का बजट मिला है। शासन स्तर से धनराशि को खर्च करने पर रोक भी लगाई गई है।
अनिकेत बाजपेयी, जिला परियोजना प्रबंधक