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छठ पूजा में मिलती पूर्वांचल की झलक
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 14 Nov 2015 10:56 PM IST
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इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई तैयारी नहीं की जा रही है। सई नदी के राजघाट, शहीद स्मारक, शारदा सहायक नहर के किनारे के अलावा आईटीआई कॉलोनी और एनटीपीसी में पूजा होती है।
तैयारी के नाम पर महज खानापूरी कर दी जाती है। शहर में प्रमुख रूप से सई नदी राजघाट पर सबसे अधिक परिवार पूजा करने के लिए आते हैं। लेकिन यहां पर गंदगी के ढेर लगे हुए हैं।
नवरात्र में दुर्गा पूजा के दौरान मूर्तियों का विसर्जन होने से जगह-जगह अवशेष बिखरे हुए हैं। घाट पर जगह-जगह गड्ढे भी हो गए हैं। वहीं शहीद स्मारक और शारदा सहायक नहर सुल्तानपुर रोड पर भी पूजा के लिए लोग उमड़ते है।
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अभी तक कहीं भी तैयारी शुरू नहीं हो सकी है। पर्व के महज चंद दिन ही शेष बचे हैं। अभी तक सफाई की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
वहीं आईटीआई, राजकीय कॉलोनी, सोनिया नगर, गांधी नगर, स्वराजनगर समेत कई मोहल्लों में रहने वाले पूर्वांचल के परिवारों में तैयारी जोरशोर से चल रही है।
छठ पूजा चार दिनों का अत्यंत कठिन और महत्वपूर्ण महापर्व होता है। इसका आरंभ कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होता है और समाप्ति कार्तिक शुक्ल सप्तमी को होती है।
कार्तिक मास शुक्ल पक्ष चतुर्थी 15 नवंबर को नहाय खाय से व्रत प्रारंभ होगा। पंचमी 16 नवंबर को खरना में दिन भर व्रत रखने वाली महिलाएं शाम को गुड़ से बनी खीर, रोटी और फल का सेवन करती हैं।
षष्ठी 17 नवंबर को डूबते सूरज को अर्घ्य और सप्तमी 18 नवंबर को सूर्योदय अर्घ्य दिया जाएगा। पूजा और रानी देवी का कहना है कि अफसरों को पूजा के महत्व को ध्यान में रखते हुए सफाई और प्रकाश पर ध्यान देना चाहिए।
छठ पूजा के लिए हर बार उपेक्षा होती है। घाटों के किनारे कोई खास व्यवस्था नहीं होती है। आपस में मिलजुलकर ही छठ की तैयारी करनी पड़ती है।
सीता और ऊषा का कहना है कि प्रशासन को राजघाट के पास पूजा के लिए पक्की सीढ़ियां बनवा देनी चाहिए। हर बार कीचड़ और गंदगी से होकर गुजरना पड़ता है।
सदर नगर पालिका परिषद चेयरमैन मो. इलियास ने कहा कि छठ पूजा स्थलों की साफ-सफाई कराने के लिए टीम गठित कर दी गई है। घाटों के किनारे प्रकाश की पूरी व्यवस्था की जाएगी।
इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं। मुख्य पूजा 17 और 18 नवंबर को है। इसलिए 16 नवंबर से पूजा स्थलों की सफाई शुरू करा दी जाएगी।
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तैयारी के नाम पर महज खानापूरी कर दी जाती है। शहर में प्रमुख रूप से सई नदी राजघाट पर सबसे अधिक परिवार पूजा करने के लिए आते हैं। लेकिन यहां पर गंदगी के ढेर लगे हुए हैं।
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नवरात्र में दुर्गा पूजा के दौरान मूर्तियों का विसर्जन होने से जगह-जगह अवशेष बिखरे हुए हैं। घाट पर जगह-जगह गड्ढे भी हो गए हैं। वहीं शहीद स्मारक और शारदा सहायक नहर सुल्तानपुर रोड पर भी पूजा के लिए लोग उमड़ते है।
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अभी तक कहीं भी तैयारी शुरू नहीं हो सकी है। पर्व के महज चंद दिन ही शेष बचे हैं। अभी तक सफाई की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
वहीं आईटीआई, राजकीय कॉलोनी, सोनिया नगर, गांधी नगर, स्वराजनगर समेत कई मोहल्लों में रहने वाले पूर्वांचल के परिवारों में तैयारी जोरशोर से चल रही है।
छठ पूजा चार दिनों का अत्यंत कठिन और महत्वपूर्ण महापर्व होता है। इसका आरंभ कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होता है और समाप्ति कार्तिक शुक्ल सप्तमी को होती है।
कार्तिक मास शुक्ल पक्ष चतुर्थी 15 नवंबर को नहाय खाय से व्रत प्रारंभ होगा। पंचमी 16 नवंबर को खरना में दिन भर व्रत रखने वाली महिलाएं शाम को गुड़ से बनी खीर, रोटी और फल का सेवन करती हैं।
षष्ठी 17 नवंबर को डूबते सूरज को अर्घ्य और सप्तमी 18 नवंबर को सूर्योदय अर्घ्य दिया जाएगा। पूजा और रानी देवी का कहना है कि अफसरों को पूजा के महत्व को ध्यान में रखते हुए सफाई और प्रकाश पर ध्यान देना चाहिए।
छठ पूजा के लिए हर बार उपेक्षा होती है। घाटों के किनारे कोई खास व्यवस्था नहीं होती है। आपस में मिलजुलकर ही छठ की तैयारी करनी पड़ती है।
सीता और ऊषा का कहना है कि प्रशासन को राजघाट के पास पूजा के लिए पक्की सीढ़ियां बनवा देनी चाहिए। हर बार कीचड़ और गंदगी से होकर गुजरना पड़ता है।
सदर नगर पालिका परिषद चेयरमैन मो. इलियास ने कहा कि छठ पूजा स्थलों की साफ-सफाई कराने के लिए टीम गठित कर दी गई है। घाटों के किनारे प्रकाश की पूरी व्यवस्था की जाएगी।
इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं। मुख्य पूजा 17 और 18 नवंबर को है। इसलिए 16 नवंबर से पूजा स्थलों की सफाई शुरू करा दी जाएगी।