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सीएचसी अधीक्षकों ने दबाई 10 हजार केसों की जांच, अल्टीमेटम

Mon, 06 Jun 2022 11:00 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jun 2022 11:00 PM IST
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CHC superintendents suppressed investigation of 10 thousand cases, ultimatum
रायबरेली। प्रसूताओं को अस्पताल लाने और प्रसव के बाद घर पहुंचाने में फर्जीवाड़े की जांच सीएचसी अधीक्षक नहीं कर रहे हैं। पांच दिन में जांच करके रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए, लेकिन 10 दिन बाद भी एक भी सीएचसी से जांच रिपोर्ट नहीं आई है। मामले में अधीक्षकों को अंतिम बार अल्टीमेटम देकर तत्काल जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं।
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प्रसूताओं को 102 एंबुलेंस से घरों से अस्पताल लाकर इलाज की सुविधा दिलाई जाती है। प्रसव के बाद प्रसूताओं को इसी एंबुलेंस से घर पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। फर्जी केस दिखाकर भुगतान की डिमांड की आशंका होने पर शासन ने सीएमओ को एंबुलेंस के सभी केसों की जांच कराकर रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे। शासन की मंशा पर सीएमओ ने एंबुलेंस के तीन महीने के करीब 10 हजार केसों की जांच करके सीएचसी अधीक्षकों को रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे। बीती 25 मई को ही यह आदेश जारी करकेे पांच दिन में जांच पूरी करके रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए थे, लेकिन अब तक किसी भी सीएचसी से जांच रिपोर्ट सीएमओ को उपलब्ध नहीं कराई गई है।
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इस संबंध में जवाब अब तक उपलब्ध न कराए जाने पर अपर निदेशक ने सीएमओ को दोबारा पत्र भेजा है। मामले में सीएमओ ने सभी अधीक्षकों को अल्टीमेटम देकर तत्काल जांच पूरी करके रिपोर्ट उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं। ऐसा न करने पर इसके लिए सीएचसी अधीक्षक स्वयं जिम्मेदार होंगे। हालांकि सीएचसी में अंदर ही अंदर सेटिंग-गेटिंग का खेल चल रहा है। कई सीएचसी ने तो अब तक जांच ही शुरू नहीं की है। इससे एक ओर जहां जीवीके कंपनी को भुगतान मिलने में देरी हो रही है, वहीं शासन की मंशा पर पानी फिर रहा है।
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जिले में करीब तीन में 102 एंबुलेंस से प्रसूताओं को अस्पताल लाने और घर पहुंचाने के 10 हजार केसों की जांच सीएचसी अधीक्षकों को दी गई थी। पांच दिन में जांच पूरी करनी थी, लेकिन 10 दिन बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं आई है। मामले में सीएमओ के स्तर से अधीक्षकों को अल्टीमेटम दिया गया है। जल्द ही जवाब न आने पर उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया जाएगा। -डॉ. आरबी यादव, एसीएमओ/नोडल अधिकारी
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