{"_id":"5d6172c18ebc3e012f27ef7c","slug":"carelessness-raibaraily-news-lko4778211182","type":"story","status":"publish","title_hn":"11 माह से ढाई करोड़ ठंप, चार दिन पहले आए बिना साइन के 25 लाख के प्रस्ताव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
11 माह से ढाई करोड़ ठंप, चार दिन पहले आए बिना साइन के 25 लाख के प्रस्ताव
विज्ञापन
रायबरेली। सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली का विकास कराने का पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली का सपना साकार नहीं हो सका। जिलेे को नोडल जिला चुनने के बाद निधि से ढाई करोड़ दिए लेकिन 11 माह बाद भी प्रस्ताव न आने के कारण बजट खाते में ही डंप है।
चार दिन पहले 100 सोलर लाइटों के लिए 25 लाख रुपये का प्रस्ताव डीआरडीए को उपलब्ध कराया गया लेकिन प्रस्ताव में पूर्व वित्तमंत्री के हस्ताक्षर नहीं हैं। ऐसे में यह काम भी अब उनके निधन के बाद पूरा होना संभव नहीं हैं। पूरी की पूरी निधि वापस होगी।
राज्यसभा सदस्य रहे पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सांसद सोनिया गांधी के क्षेत्र रायबरेली को नोडल जिला घोषित किया था। उन्होंने अपनी निधि से 25 सितंबर 2018 को जिले के विकास के लिए ढाई करोड़ रुपये उपलब्ध करा दिए थे।
विज्ञापन
पूर्व वित्तमंत्री अपनी निधि से जिले में विकास कराना चाहते थे। लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के कारण कार्यों के प्रस्ताव नहीं दिए। बाद में अधिसूचना खत्म होने के बाद उनकी तबीयत ही खराब हो गई।
ऐसी स्थिति में 11 माह में डीआरडीए से कई बार कार्यों के लिए प्रस्ताव उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा गया लेकिन प्रस्ताव न मिलने के कारण निधि खर्च नहीं हो सकी।
शनिवार को पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली के निधन के बाद जिले में उनकी निधि से विकास की आशा टूट गई है। 100 सोलर लाइटों के लिए चार दिन पहले प्रस्ताव डीआरडीए के दिए गए हैं। खास बात यह कि प्रस्ताव में राज्यसभा सदस्य रहे स्व. जेटली के हस्ताक्षर तक नहीं हैं।
ऐसी स्थिति में सोलर लाइट के 25 लाख के प्रस्तावों पर सुनवाई भी होना संभव नहीं हैं। निधन के बाद बजट वापस हो सकता है। पूर्व वित्तमंत्री के निधन से अब किसी भी दशा में निधि जिले में खर्च नहीं हो सकती है।
डीआरडीए के पीडी प्रेमचंद्र पटेल ने कहा कि राज्यसभा सदस्य व वित्तमंत्री अरुण जेटली की निधि से ढाई करोड़ मिले थे। प्रस्ताव न आने के कारण बजट खर्च नहीं किया जा सका है। उनके निधन के बाद अब निधि को वापस किया जाएगा। प्रस्ताव न आने के बाद बजट खाते में ही जमा है। सोलर लाइट के प्रस्ताव पर साइन नहीं हैं।
विज्ञापन
चार दिन पहले 100 सोलर लाइटों के लिए 25 लाख रुपये का प्रस्ताव डीआरडीए को उपलब्ध कराया गया लेकिन प्रस्ताव में पूर्व वित्तमंत्री के हस्ताक्षर नहीं हैं। ऐसे में यह काम भी अब उनके निधन के बाद पूरा होना संभव नहीं हैं। पूरी की पूरी निधि वापस होगी।
विज्ञापन
राज्यसभा सदस्य रहे पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सांसद सोनिया गांधी के क्षेत्र रायबरेली को नोडल जिला घोषित किया था। उन्होंने अपनी निधि से 25 सितंबर 2018 को जिले के विकास के लिए ढाई करोड़ रुपये उपलब्ध करा दिए थे।
विज्ञापन
पूर्व वित्तमंत्री अपनी निधि से जिले में विकास कराना चाहते थे। लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के कारण कार्यों के प्रस्ताव नहीं दिए। बाद में अधिसूचना खत्म होने के बाद उनकी तबीयत ही खराब हो गई।
ऐसी स्थिति में 11 माह में डीआरडीए से कई बार कार्यों के लिए प्रस्ताव उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा गया लेकिन प्रस्ताव न मिलने के कारण निधि खर्च नहीं हो सकी।
शनिवार को पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली के निधन के बाद जिले में उनकी निधि से विकास की आशा टूट गई है। 100 सोलर लाइटों के लिए चार दिन पहले प्रस्ताव डीआरडीए के दिए गए हैं। खास बात यह कि प्रस्ताव में राज्यसभा सदस्य रहे स्व. जेटली के हस्ताक्षर तक नहीं हैं।
ऐसी स्थिति में सोलर लाइट के 25 लाख के प्रस्तावों पर सुनवाई भी होना संभव नहीं हैं। निधन के बाद बजट वापस हो सकता है। पूर्व वित्तमंत्री के निधन से अब किसी भी दशा में निधि जिले में खर्च नहीं हो सकती है।
डीआरडीए के पीडी प्रेमचंद्र पटेल ने कहा कि राज्यसभा सदस्य व वित्तमंत्री अरुण जेटली की निधि से ढाई करोड़ मिले थे। प्रस्ताव न आने के कारण बजट खर्च नहीं किया जा सका है। उनके निधन के बाद अब निधि को वापस किया जाएगा। प्रस्ताव न आने के बाद बजट खाते में ही जमा है। सोलर लाइट के प्रस्ताव पर साइन नहीं हैं।