फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Raebareli News ›   Bank Save money for pocket money

जब मर्जी पैसा निकाले, यहां चल रहा बच्चा बैंक

Sun, 02 Jan 2022 09:27 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 02 Jan 2022 09:27 PM IST
विज्ञापन
Bank Save money for pocket money
हरचंदपुर (रायबरेली)। ...ये बैंक कुछ अनोखा है। यहां न तो एटीएम कार्ड चलता है और न ही पैसा निकालने के लिए कोई स्लिप (पर्ची)। जिसकी जब मर्जी आती है पैसा जमा करता है और जरूरत पड़ने पर निकाल लेता है। ...अकाउंट में बैलेंस कम होने पर जुर्माना (पेनॉल्टी) पड़ने का भी भय नहीं।
विज्ञापन

बच्चों का यह चलता-फिरता बैंक हरचंदपुर के पूर्व माध्यमिक विद्यालय, पूरे मौहारी में चल रहा है। इस ‘बच्चा बैंक’ में 215 खातेधारक छात्र हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों में बचत भावना विकसित करना है।
विज्ञापन

पूरे मौहारी गांव के बच्चे सूक्ष्म बचत को अपनाकर स्वावलंबी बन रहे हैं। ऐसा करके यहां के बच्चों ने अनोखी मिसाल पेश की है। यह व्यवस्था पूर्व माध्यमिक विद्यालय पूरे मौहारी में वर्ष 2013 से चल रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

उस समय शिक्षक ईश्वरदीन ने यह व्यवस्था शुरू की थी, लेकिन तब ज्यादा बच्चे इस बच्चा बैंक से नहीं जुड़े थे। 2014 से अब तक अनुदेशक सत्य प्रकाश तिवारी इसे संभाल रहे हैं। धीरे-धीरे करके करीब 215 छात्र इस बैंक के खाताधारक बन चुके हैं। बचत की इस व्यवस्था से बच्चे फिजूलखर्ची से बचते हैं।
उनकी जुटाई छोटी-छोटी रकम जरूरत पड़ने पर एक साथ मिल जाती है तो बच्चे काफी खुश होते हैं। अभिभावक भी इस व्यवस्था से खुश हैं, क्योंकि उन पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ता है। बच्चों की जरूरत पूरी हो जाती है।
पढ़ाई पूरी करके स्कूल छोड़ने वाले बच्चों को उनका पूरा पैसा वापस कर दिया जाता है, जिससे आगे की पढ़ाई में मदद मिलती है।
ऐसे काम करता है ‘बच्चा बैंक’
अनुदेशक सत्य प्रकाश तिवारी बताते हैं कि बच्चों को घर से जेब खर्च के लिए जो भी पैसा मिलता है, उसका कुछ हिस्सा बचाकर इस बैंक में जमा किया जाता है। किस बच्चे ने कब और कितना रुपया जमा किया, कब कितना रुपया निकाला, इसका पूरा लेखा-जोखा एक रजिस्टर में रखा जाता है। जमा-निकासी पर बच्चे और उनके अभिभावक हस्ताक्षर करते हैं, ताकि गड़बड़ी की कोई आशंका न रहे। यह रजिस्टर और धनराशि अनुदेशक के पास रहती है।
कम खर्च करते हैं, ज्यादा करते बचत
विद्यालय के छात्र-छात्राओं में बचत को लेकर ज्यादा रुचि दिखती है। इसीलिए वे जेब खर्च के लिए घर से मिले पैसे बचाने की कोशिश करते हैं। प्रियांशी, शालू, शिवा, मनीष समेत कई छात्र-छात्राओं ने बताया कि उन्हें जब कभी भी माता-पिता से जेब खर्च के रूप में पांच-दस रुपये मिलते हैं, उसमें से दो-चार रुपये खर्च करते हैं और बाकी रकम जमा कर देते हैं। जब कभी उन्हें जरूरत पड़ती है, इसी बचत से रुपये निकाल भी लेते हैं।
घर से नहीं मिल पाती बड़ी रकम की मदद
अनुदेशक सत्यप्रकाश तिवारी बताते हैं कि बच्चों में बचत की भावना पैदा करने के उद्देश्य से यह व्यवस्था शुरू की गई थी। खासतौर से खेलकूद में उन्हें किसी के आगे हाथ नहीं फैलाने पड़ते हैं।

जब कभी बच्चों को बाहर खेलने जाना होता है तो उन्हें जेब खर्च या फिर खेलकूद की किट और अन्य सामान खरीदने को पैसे की जरूरत पड़ती है। रकम ज्यादा होने पर घर से मदद नहीं मिल पाती है। ऐसे में छोटी-छोटी बचत से जुटाई गई यह रकम उनके काम आती है। दूसरी जरूरतों पर भी बच्चे इस बचत से मदद लेते हैं। उन्होंने बताया कि औसतन दो से ढाई हजार रुपये जमा रहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed