संसदीय क्षेत्र की सभी सीटें होंगी कांग्रेस के हवाले
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दोनों पार्टियों के हाईकमान की हुई बातचीत के बाद सिर्फ रायबरेली ही नहीं, बल्कि अमेठी के सभी सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवारों के लड़ने की हरी झंडी दे दी गई है। इस बदलाव से कांग्रेस नेताओं के माथे की शिकन दूर हो गई है।
सपा और कांग्रेस में गठबंधन होने के बाद भी रायबरेली की पांच सीटों पर चुनाव लड़ने का तालमेल नहीं बन रहा था। यहां तक कि सपा की ओर से ऊंचाहार से कैबिनेट मंत्री डॉ. मनोज कुमार पांडेय, सरेनी से देवेंद्र प्रताप सिंह को प्रत्याशी घोषित कर दिया गया था।
ऐसे में टिकटों को लेकर संस्पेंस और गहरा गया था। शनिवार को दोनों पार्टियों के बीच सीटोें को लेकर आखिर सहमत बन गई बताई गई है। नतीजतन जिले की पांच सीटों रायबरेली, बछरावां, हरचंदपुर, सरेनी और ऊंचाहार में टिकटों की स्थिति साफ हो गई।
यहां पर कांग्रेस के प्रत्याशी ही चुनाव मैदान में उतारे जाएंगे। वहीं इस फैसले से कांग्रेसी नेताओं व कार्यकर्ताओं में उत्साह भर गया है। सीटों पर दूर हुए संस्पेंस के बाद अब कांग्रेस की ओर से प्रत्याशियों की घोषणा की जानी है। ऐसे में किस सीट से किस उम्मीदवार को टिकट मिलेगा, इसकी तस्वीर भी जल्द साफ होेने वाली है।
नामांकन प्रक्रिया में महज एक दिन शेष है, ऐसे में उम्मीद है कि जल्द उम्मीदवारोें की घोषणा भी हो जाएगी। कांग्रेस की ओर से बछरावां विस सीट से सुशील पासी को प्रत्याशी घोषित कर दिया गया था, लेकिन इस पर यह कहकर रोक लगा दी गई कि सभी प्रत्याशी एक साथ घोषित किए जाएंगे।
वहीं इस फैसले से सपा के घोषित दावेदारों और संभावित उम्मीदवारों में मायूसी है। फिलहाल अपने गढ़ में कांग्रेस को पांच सीटें मिल गई हैं। इससे जहां नेताओं में खुशी है, वहीं उन पर सीट जीतने का दबाव भी होगा।
बड़े स्तर पर भले ही कांग्रेस-सपा का गठबंधन हो गया हो, लेकिन सपा का वोट बटोरना कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा। पिछले चुनाव को देखा जाए तो न तो कांग्रेस ने सपा के लिए और न ही सपा ने कांग्रेस के लिए खुलकर प्रचार किया था।
ऐसे में सपा के वोटों को अपने पाले में कांग्रेस कैसे खींचेगी, यह यक्ष प्रश्न होगा। जाहिर है कि बाकी दल सपा के वोट बैंक को हर तरीके से हासिल करने की पुरजोर कोशिश करेंगे।समाजवादी पार्टी में जिन उम्मीदवारों की घोषणा कर दी गई थी, वे तो खुश थे, लेकिन जिन सीटों पर घोषणा नहीं हुई थी, वहां के दावेदार सपा से नाराज थे।
अब पांचों सीटें कांग्रेस के खाते में जाने से एक बार फिर समीकरण बदल गए हैं। ऐसे में टिकट वाले सपा प्रत्याशियों का कहीं और समायोजन किया जाएगा, यह उनको मौका नहीं मिलेगा, या फिर कोई बड़ी जिम्मेदारी देकर उनको शांत किया जाएगा।
लेकिन जिन दावेदारों को टिकट ही नहीं मिला था, वे कहां जाएंगे, इस पर अभी असमंजस की स्थिति है। बछरावां के वर्तमान विधायक रामलाल अकेला 31 जनवरी को बड़ी सभा करने वाले हैं। जाहिर है कि वे कोई न कोई गुल जरूर खिलाएंगे।