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पंचायतों में 93 करोड़ रुपये डंप, उप निदेशक की डीपीआरओ को चेतावनी
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रायबरेली। गांवों में विकास कार्य करवाने के लिए 15वें वित्त आयोग से मिले बजट को ग्राम पंचायतें खर्च नहीं कर पा रही हैं। जिले की 988 ग्राम पंचायतों को केंद्रीय वित्त (टाइड व अनटाइड फंड) से 253.38 करोड़ रुपये खर्च करने के लिए दिए गए।
शासन स्तर पर पंचायतीराज निदेशक ने समीक्षा की तो मिले बजट के सापेक्ष जिले में अब तक 159.83 करोड़ ही खर्च किए गए हैं।
मिले लक्ष्य का 63.08 प्रतिशत बजट खर्च होने केे कारण वित्तीय वर्ष के लिए केंद्र से बजट नहीं मांगा जा पा रहा है। उपनिदेशक ने डीपीआरओ को पत्र जारी करके चेतावनी देते हुए बजट को खर्च करवाने के आदेश दिए हैं।
हर साल ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के लिए 15वें वित्त (केंद्रीय वित्त) से बजट मिलता है। पिछले साल भी जिले को केंद्रीय वित्त (टाइड व अनटाइड फंड) से विकास कार्यों के लिए 253.38 करोड़ रुपये दिए गए। ग्राम पंचायतों में 159.83 करोड़ खर्च किए गए।
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मिले बजट के सापेक्ष 63.08 प्रतिशत ही धन खर्च किया गया। करीब 93.55 करोड़ रुपये अब तक खर्च नहीं किए गए हैं। पंचायतीराज निदेशक ने शासन स्तर पर समीक्षा तो जिले की मनमानी उजागर हो गई।
उपनिदेशक गिरीश चंद्र ने डीपीआरओ को पत्र जारी करके कार्रवाई की चेतावनी दी है। नाराजगी जताते हुए असंतोष जताया गया है कि लक्ष्य के सापेक्ष बजट खर्च न किए जाने के बाद उपभोग प्रमाणपत्र केंद्र को भेजकर बजट की मांग नहीं की जा पा रही है। इससे नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने डीपीआरओ को पंचायतों को आवंटित धनराशि के सापेक्ष बजट को खर्च करवाने के आदेश दिए हैं। यदि खर्च नहीं किया जाता है तो शासन को प्रकरण भेजा जाएगा। डीपीआरओ उमाशंकर मिश्रा का कहना है कि सभी एडीओ को लक्ष्य के सापेक्ष बजट खर्च करके रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं। खराब प्रगति वाले ब्लॉकों के एडीओ पर कार्रवाई की जाएगी।
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शासन स्तर पर पंचायतीराज निदेशक ने समीक्षा की तो मिले बजट के सापेक्ष जिले में अब तक 159.83 करोड़ ही खर्च किए गए हैं।
मिले लक्ष्य का 63.08 प्रतिशत बजट खर्च होने केे कारण वित्तीय वर्ष के लिए केंद्र से बजट नहीं मांगा जा पा रहा है। उपनिदेशक ने डीपीआरओ को पत्र जारी करके चेतावनी देते हुए बजट को खर्च करवाने के आदेश दिए हैं।
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हर साल ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के लिए 15वें वित्त (केंद्रीय वित्त) से बजट मिलता है। पिछले साल भी जिले को केंद्रीय वित्त (टाइड व अनटाइड फंड) से विकास कार्यों के लिए 253.38 करोड़ रुपये दिए गए। ग्राम पंचायतों में 159.83 करोड़ खर्च किए गए।
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मिले बजट के सापेक्ष 63.08 प्रतिशत ही धन खर्च किया गया। करीब 93.55 करोड़ रुपये अब तक खर्च नहीं किए गए हैं। पंचायतीराज निदेशक ने शासन स्तर पर समीक्षा तो जिले की मनमानी उजागर हो गई।
उपनिदेशक गिरीश चंद्र ने डीपीआरओ को पत्र जारी करके कार्रवाई की चेतावनी दी है। नाराजगी जताते हुए असंतोष जताया गया है कि लक्ष्य के सापेक्ष बजट खर्च न किए जाने के बाद उपभोग प्रमाणपत्र केंद्र को भेजकर बजट की मांग नहीं की जा पा रही है। इससे नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने डीपीआरओ को पंचायतों को आवंटित धनराशि के सापेक्ष बजट को खर्च करवाने के आदेश दिए हैं। यदि खर्च नहीं किया जाता है तो शासन को प्रकरण भेजा जाएगा। डीपीआरओ उमाशंकर मिश्रा का कहना है कि सभी एडीओ को लक्ष्य के सापेक्ष बजट खर्च करके रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं। खराब प्रगति वाले ब्लॉकों के एडीओ पर कार्रवाई की जाएगी।