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रायबरेली सलोन कोल्ड स्टोरेज मामले में डीएम गंभीर, एसडीएम से तलब किए दस्तावेज
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रायबरेली। शहर के त्रिपुला चौराहा स्थित रायबरेली सलोन कोल्ड स्टोरेज प्राइवेट लिमिटेड के नाम से दर्ज जमीन का मामला तूल पकड़ रहा है। डीएम वैभव श्रीवास्तव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज एसडीएम से तलब किए हैं।
मामले में तत्कालीन तहसीलदार और लेखपाल के खिलाफ भी जांच कराई जा रही है। ऐसे में तत्कालीन तहसीलदार और लेखपाल के खिलाफ भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। करीब 14 करोड़ की बेशकीमती जमीन के मामले में खेल उजागर होने के बाद तहसील के अधिकारी अपने को बचाने में जुटे हैं।
लखनऊ-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित जमीन के मामले में जिस तरह खेल किया गया, उसको लेकर एसडीएम सदर अंशिका दीक्षित की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अमर उजाला में प्रकरण के खुलासे के बाद हड़कंप मच गया।
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वर्ष 2016 में फर्जी तरीके से तहसीलदार कोर्ट से जमीन का नामांतरण कोल्ड स्टोरेज संचालक के नाम करा दिया गया। खबर छपने के बाद डीएम ने मामले को संज्ञान में लिया।
गुरुवार को जहां एसडीएम सदर को मौके पर भेजकर कार्रवाई करने के लिए कहा, वहीं अब जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज तलब कर लिए हैं। डीएम के दस्तावेज तलब होने से तहसील के अफसरों में हड़कंप है। कहा जा रहा है कि जमीन से जुड़े कई दस्तावेज खोजे नहीं मिल पा रहे हैं। बाबुओं को जमीन से जुड़े दस्तावेज खोजने में लगाया गया है।
खास बात ये है कि जमीन का फर्जी नामांतरण करने के मामले में तत्कालीन तहसीलदार और लेखपाल भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। कहा जा रहा है कि कैसे जमीन का नामांतरण कोल्ड स्टोरेज संचालक के नाम कर दिया गया।
लेखपाल ने मामले में कैसे लापरवाही बरती। क्या लेखपाल पर किसी अफसर का दबाव था। इस बिंदुओं पर पड़ताल कराई जा रही है। डीएम का कहना है कि जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज एसडीएम सदर से तलब किए गए हैं। दस्तावेज मिलने के बाद प्रकरण में जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी भी बख्शा नहीं जाएगा।
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मामले में तत्कालीन तहसीलदार और लेखपाल के खिलाफ भी जांच कराई जा रही है। ऐसे में तत्कालीन तहसीलदार और लेखपाल के खिलाफ भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। करीब 14 करोड़ की बेशकीमती जमीन के मामले में खेल उजागर होने के बाद तहसील के अधिकारी अपने को बचाने में जुटे हैं।
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लखनऊ-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित जमीन के मामले में जिस तरह खेल किया गया, उसको लेकर एसडीएम सदर अंशिका दीक्षित की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अमर उजाला में प्रकरण के खुलासे के बाद हड़कंप मच गया।
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वर्ष 2016 में फर्जी तरीके से तहसीलदार कोर्ट से जमीन का नामांतरण कोल्ड स्टोरेज संचालक के नाम करा दिया गया। खबर छपने के बाद डीएम ने मामले को संज्ञान में लिया।
गुरुवार को जहां एसडीएम सदर को मौके पर भेजकर कार्रवाई करने के लिए कहा, वहीं अब जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज तलब कर लिए हैं। डीएम के दस्तावेज तलब होने से तहसील के अफसरों में हड़कंप है। कहा जा रहा है कि जमीन से जुड़े कई दस्तावेज खोजे नहीं मिल पा रहे हैं। बाबुओं को जमीन से जुड़े दस्तावेज खोजने में लगाया गया है।
खास बात ये है कि जमीन का फर्जी नामांतरण करने के मामले में तत्कालीन तहसीलदार और लेखपाल भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। कहा जा रहा है कि कैसे जमीन का नामांतरण कोल्ड स्टोरेज संचालक के नाम कर दिया गया।
लेखपाल ने मामले में कैसे लापरवाही बरती। क्या लेखपाल पर किसी अफसर का दबाव था। इस बिंदुओं पर पड़ताल कराई जा रही है। डीएम का कहना है कि जमीन से जुड़े सभी दस्तावेज एसडीएम सदर से तलब किए गए हैं। दस्तावेज मिलने के बाद प्रकरण में जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी भी बख्शा नहीं जाएगा।