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राजधानी तक पहुंची बारिश में सड़क धंसने की गूंज, जांच करने के लिए लखनऊ से पहुंचे चीफ इंजीनियर
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जांच करते जलनिगम के मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता।
- फोटो : RAIBARAILY
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रायबरेली। शहर में अमृत योजना में चल रहा कमीशनबाजी का खेल शासन स्तर तक पहुंच गया है। बुधवार को मनिका रोड पर बारिश के दौरान धंसी सड़क की जांच करने शुक्रवार को जल निगम के मुख्य अभियंता संजय कुमार सिंह और अधीक्षण अभियंता जितेश कुमार लखनऊ से यहां पहुंचे। जहां पर सड़क धंसी थी, वहां पर तीन जगह खोदाई कराकर तीन घंटे तक पड़ताल की।
बताया कि प्रथम दृष्टया नाले का पानी सड़क के नीचे आने की वजह से मिट्टी बह गई। इस वजह से सड़क धस गई। मुख्य अभियंता ने साफ कहा कि जांच रिपोर्ट जल निगम के प्रबंध निदेशक को सौंपी जाएगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
करीब ढाई लाख आबादी वाले शहर को सीवर की समस्या से राहत दिलाने के लिए चल रही अमृत योजना कमीशनबाजी की भेंट चढ़ गई। मानकों को दरकिनार कर कराए जा रहे कार्यों में खामियां उजागर हो रही हैं। यह मामला पहले भी उठा, लेकिन जिम्मेदारों ने दबा दिया।
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अब सड़क धंस गई तो जल निगम के अफसर कार्यदायी संस्था को बचाने में जुटे हैं। बीते बुधवार को हुई बारिश से नेहरू नगर रेलवे क्रॉसिंग से मनिका रोड पर सीवर डालने के बाद सड़क बनाई गई, जो बारिश में धंस गई।
डीएम के संज्ञान लेने के बाद मामला शासन स्तर तक पहुंचा तो हड़कंप मच गया। जल निगम के प्रबंध निदेशक अनिल मीना ने दो सदस्यीय टीम गठित कर 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट तलब की। जल निगम के मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता जितेश कुमार ने मनिका रोड पर पहुंचकर जांच की। पड़ताल करने के बाद टीम लखनऊ लौट गई।
निष्प्रयोज्य पुराने नाले से कैसा पहुंचा पानी
रायबरेली जलनिगम के अधिशासी अभियंता सनी सिंह का दावा है कि जिस नाले से सड़क के नीचे पानी पहुंचा, उस पर आसपास के घर के लोगों ने कब्जा कर लिया है। काफी पुराना नाला था। उसका प्रयोग नहीं हो रहा था। हालांकि जल निकासी के लिए सड़क के बगल में दूसरा नाला बना है। इसके बावजूद सड़क के नीचे पानी कैसे पहुंच गया। यह समझ से परे है। सच्चाई जांच के सामने ही सामने आएगी।
जल्दबाजी के चलते धंस गई सड़क
अमृत योजना से शहर में 90 करोड़ रुपये लागत से सीवर लाइन बिछाने का काम किया जा रहा है। पहले सड़के ध्वस्त की गई। उसके बाद सीवर लाइन डाली गई। दोबारा सड़क बनाने में खेल किया जा रहा है। कई जगह सड़कें धंस चुकी हैं। पाइप लाइन डालने के बाद मिट्टी और डस्ट की कुटाई ठीक से नहीं की जाती। गिट्टियां डालकर केवल सड़कों को काला किया जा रहा है। इसकी पोल अब खुल रही है। यदि झमाझम बारिश होती है को कार्यदायी संस्था की आगे भी पोल खुलेगी।
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बताया कि प्रथम दृष्टया नाले का पानी सड़क के नीचे आने की वजह से मिट्टी बह गई। इस वजह से सड़क धस गई। मुख्य अभियंता ने साफ कहा कि जांच रिपोर्ट जल निगम के प्रबंध निदेशक को सौंपी जाएगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
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करीब ढाई लाख आबादी वाले शहर को सीवर की समस्या से राहत दिलाने के लिए चल रही अमृत योजना कमीशनबाजी की भेंट चढ़ गई। मानकों को दरकिनार कर कराए जा रहे कार्यों में खामियां उजागर हो रही हैं। यह मामला पहले भी उठा, लेकिन जिम्मेदारों ने दबा दिया।
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अब सड़क धंस गई तो जल निगम के अफसर कार्यदायी संस्था को बचाने में जुटे हैं। बीते बुधवार को हुई बारिश से नेहरू नगर रेलवे क्रॉसिंग से मनिका रोड पर सीवर डालने के बाद सड़क बनाई गई, जो बारिश में धंस गई।
डीएम के संज्ञान लेने के बाद मामला शासन स्तर तक पहुंचा तो हड़कंप मच गया। जल निगम के प्रबंध निदेशक अनिल मीना ने दो सदस्यीय टीम गठित कर 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट तलब की। जल निगम के मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता जितेश कुमार ने मनिका रोड पर पहुंचकर जांच की। पड़ताल करने के बाद टीम लखनऊ लौट गई।
निष्प्रयोज्य पुराने नाले से कैसा पहुंचा पानी
रायबरेली जलनिगम के अधिशासी अभियंता सनी सिंह का दावा है कि जिस नाले से सड़क के नीचे पानी पहुंचा, उस पर आसपास के घर के लोगों ने कब्जा कर लिया है। काफी पुराना नाला था। उसका प्रयोग नहीं हो रहा था। हालांकि जल निकासी के लिए सड़क के बगल में दूसरा नाला बना है। इसके बावजूद सड़क के नीचे पानी कैसे पहुंच गया। यह समझ से परे है। सच्चाई जांच के सामने ही सामने आएगी।
जल्दबाजी के चलते धंस गई सड़क
अमृत योजना से शहर में 90 करोड़ रुपये लागत से सीवर लाइन बिछाने का काम किया जा रहा है। पहले सड़के ध्वस्त की गई। उसके बाद सीवर लाइन डाली गई। दोबारा सड़क बनाने में खेल किया जा रहा है। कई जगह सड़कें धंस चुकी हैं। पाइप लाइन डालने के बाद मिट्टी और डस्ट की कुटाई ठीक से नहीं की जाती। गिट्टियां डालकर केवल सड़कों को काला किया जा रहा है। इसकी पोल अब खुल रही है। यदि झमाझम बारिश होती है को कार्यदायी संस्था की आगे भी पोल खुलेगी।