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160 समितियों पर लटके ताले, डीएपी के लाले
Raebareli
Updated Mon, 17 Nov 2014 05:30 AM IST
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रायबरेली। यह साल अन्नदाताओं के लिए अच्छा साबित नहीं हो पा रहा है। पहले सूखे के दंश से जूझ रहे किसानों ने किसी तरह धान की फसल तैयार की और अब गेहूं की बोवाई के समय डीएपी की किल्लत है। हालात ये हैं कि जिले में डीएपी को लेकर हाहाकार मचा है और 160 साधन सहकारी समितियों में ताले लटक गए हैं। जिले के तीन लाख किसान डीएपी के लिए दर-दर भटक रहे हैं। किसानों की इस समस्या पर विभागीय अधिकारी यही दावा कर रहे हैं कि जल्द खाद आने वाली है। साधन सहकारी समितियों के अलावा यूपी एग्रो, पीसीएफ गोदाम में भी ताला लटक रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र में करीब तीन लाख किसान गेहूं की फसल की बोआई करते हैं। वैसे भी यह साल किसानों के लिए ठीक नहीं रहा। कम बारिश की वजह से जिले में सूखे के हालात रहे। इसके बावजूद किसानों ने किसी तरह धान की फसल तैयार की। हुदहुद की वजह से करीब 25 फीसदी फसल नष्ट हो गई। अब जब गेहूं की बोआई शुरू हो गई है तो डीएपी की किल्लत से किसान परेशान हैं। हकीकत ये है कि 160 साधन सहकारी समितियों में ताले लटक रहे हैं। किसान खाद लेने जाते हैं और साधन सहकारी समितियों में लटके ताले देखकर मायूस होकर लौट जाते हैं। डीएपी न मिलने से किसानों ने गेहूं की बोआई बंद कर दी है। उनका कहना है कि डीएपी नहीं डालेंगे तो गेहूं की फसल शुरुआत में ही अच्छी नहीं होगी। परशदेपुर, खीरों, दीनशाह गौरा, सतांव, हरचंदपुर, सलोन, छतोह, अमावां समेत पूरे जिले में डीएपी का अकाल है।
इनसेट
यही हाल रहा तो पिछड़ जाएगी फसल
डीएपी की किल्लत का यही हाल रहा तो किसानों की परेशानी और बढ़ सकती है। वजह नवंबर में गेहूं की फसल की लगभग बोआई हो जानी चाहिए। नवंबर में एक पखवारा बीत चुका है। अभी तक 50 फीसदी भी गेहूं की बोआई नहीं हो सकी है। डीएपी की कमी बोआई न होने की मुख्य वजह बन रही है।
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इनसेट
डीएपी के लिए भटक रहे अन्नदाता
परशदेपुर। क्षेत्र में करीब 12 साधन सहकारी समितियां हैं। यहां से किसानों को खाद उपलब्ध कराई जाती है। इस समय रबी फसल की बोआई जोरशोर से चल रही है, लेकिन समितियों में डीएपी अब तक नहीं आई है। इससे किसानों में नाराजगी है। किसान राजेंद्र कुमार, महेश कुमार, विनोद कुमार, बाबर का कहना है कि कई दिनों से खाद के लिए समिति के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार खाली हाथ ही लौटना पड़ता है। समितियों में खाद नहीं है। बाहर खरीदते हैं तो अधिक दाम चुकाने पड़ते हैं। खाद के बिना गेहूं की फसल की बोवाई नहीं हो पा रही है।
इनसेट
साधन सहकारी समितियों के लिए ढाई हजार मीट्रिक टन डीएपी एलॉट हो गई है। दो-तीन दिन में खाद आ जाएगी। किसान परेशान न हों। उन्हें डीएपी उपलब्ध कराई जाएगी। सभी सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि खाद उपलब्ध होने पर किसानों में वितरण कराएं। किसानों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो।
रामजी लाल, सहकारी आयुक्त, सहायक निबंधक
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र में करीब तीन लाख किसान गेहूं की फसल की बोआई करते हैं। वैसे भी यह साल किसानों के लिए ठीक नहीं रहा। कम बारिश की वजह से जिले में सूखे के हालात रहे। इसके बावजूद किसानों ने किसी तरह धान की फसल तैयार की। हुदहुद की वजह से करीब 25 फीसदी फसल नष्ट हो गई। अब जब गेहूं की बोआई शुरू हो गई है तो डीएपी की किल्लत से किसान परेशान हैं। हकीकत ये है कि 160 साधन सहकारी समितियों में ताले लटक रहे हैं। किसान खाद लेने जाते हैं और साधन सहकारी समितियों में लटके ताले देखकर मायूस होकर लौट जाते हैं। डीएपी न मिलने से किसानों ने गेहूं की बोआई बंद कर दी है। उनका कहना है कि डीएपी नहीं डालेंगे तो गेहूं की फसल शुरुआत में ही अच्छी नहीं होगी। परशदेपुर, खीरों, दीनशाह गौरा, सतांव, हरचंदपुर, सलोन, छतोह, अमावां समेत पूरे जिले में डीएपी का अकाल है।
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यही हाल रहा तो पिछड़ जाएगी फसल
डीएपी की किल्लत का यही हाल रहा तो किसानों की परेशानी और बढ़ सकती है। वजह नवंबर में गेहूं की फसल की लगभग बोआई हो जानी चाहिए। नवंबर में एक पखवारा बीत चुका है। अभी तक 50 फीसदी भी गेहूं की बोआई नहीं हो सकी है। डीएपी की कमी बोआई न होने की मुख्य वजह बन रही है।
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डीएपी के लिए भटक रहे अन्नदाता
परशदेपुर। क्षेत्र में करीब 12 साधन सहकारी समितियां हैं। यहां से किसानों को खाद उपलब्ध कराई जाती है। इस समय रबी फसल की बोआई जोरशोर से चल रही है, लेकिन समितियों में डीएपी अब तक नहीं आई है। इससे किसानों में नाराजगी है। किसान राजेंद्र कुमार, महेश कुमार, विनोद कुमार, बाबर का कहना है कि कई दिनों से खाद के लिए समिति के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार खाली हाथ ही लौटना पड़ता है। समितियों में खाद नहीं है। बाहर खरीदते हैं तो अधिक दाम चुकाने पड़ते हैं। खाद के बिना गेहूं की फसल की बोवाई नहीं हो पा रही है।
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साधन सहकारी समितियों के लिए ढाई हजार मीट्रिक टन डीएपी एलॉट हो गई है। दो-तीन दिन में खाद आ जाएगी। किसान परेशान न हों। उन्हें डीएपी उपलब्ध कराई जाएगी। सभी सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि खाद उपलब्ध होने पर किसानों में वितरण कराएं। किसानों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो।
रामजी लाल, सहकारी आयुक्त, सहायक निबंधक