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कैटेगरी तय नहीं, कैसे जारी होगी सूची
Raebareli
Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
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रायबरेली। बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना के लिए स्वास्थ्य विभाग में बिना कैटेगरी तय किए चल रही संविदा भर्ती को फिर शासन ने हरी झंडी दे दी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने पहले ही कैटेगरी के संबंध में अंगुली उठा दी है। सीएमओ को आदेश भी दिए जा चुके हैं कि बिना कैटेगरी तय किए संविदा भर्ती को सही नहीं माना जाएगा।
आशीर्वाद योजना को संविदा भर्ती के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी 78 पदों की कैैटेगरी बिना तय किए ही आवेदन मांग लिए थे। इंटरव्यू का काम शुरू हुआ तो मामले की पोल खुल गई। हालांकि लखनऊ सहित अन्य जिलों में संविदा भर्ती के लिए जारी विज्ञप्ति में कैटेगरी को स्पष्ट किया गया था, लेकिन रायबरेली में कैटेगरी को छुपाकर आवेदन मांगे गए थे। सीडीओ डॉ. अख्तर रियाज ने कैटेगरी के संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के पेच कसने शुरू कर दिए। इस संबंध में उन्होंने सीएमओ से जवाब तलब भी किया, लेकिन विभाग पर कोई असर नहीं पड़ा। यही नहीं पिछली 11 अक्तूबर को स्वास्थ्य निदेशक प्रशासन एसके रिजवी ने एक पत्र जारी कर आदेश दिया कि यदि आरक्षण का पालन नहीं किया जा रहा है तो भर्तियों को रद्द माना जाए। यह आदेश आते ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया था। इसी आदेश के दो दिन बाद शासन ने पूरे प्रदेश में संविदा भर्ती पर रोक लगा दी थी। बताते हैं कि सीएमओ कार्यालय में बिना कैटेगरी के भर्ती प्रक्रिया में जुटे एनआरएचएम के नोडल अधिकारी शासन से लगी रोक के बाद हाथ पैर मारने में जुट गए। शासन ने विवादित जिलों को छोड़कर भर्ती की प्रक्रिया को पूरी करने का आदेश दिया है। शासन ने मानक के अनुरूप ही भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दिए हैं। सवाल यह है कि जिले में कैटेगरी तय नहीं की गई है, जबकि हाईकोर्ट का आदेश है कि बिना कैटेगरी तय किए किसी भी प्रकार की भर्ती नहीं हो सकती है। फिलहाल शासन की हरी झंडी मिलने के बाद विभाग के अधिकारी किसी न किसी तरह संविदा भर्ती की सूची जारी करने की रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
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आशीर्वाद योजना को संविदा भर्ती के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी 78 पदों की कैैटेगरी बिना तय किए ही आवेदन मांग लिए थे। इंटरव्यू का काम शुरू हुआ तो मामले की पोल खुल गई। हालांकि लखनऊ सहित अन्य जिलों में संविदा भर्ती के लिए जारी विज्ञप्ति में कैटेगरी को स्पष्ट किया गया था, लेकिन रायबरेली में कैटेगरी को छुपाकर आवेदन मांगे गए थे। सीडीओ डॉ. अख्तर रियाज ने कैटेगरी के संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के पेच कसने शुरू कर दिए। इस संबंध में उन्होंने सीएमओ से जवाब तलब भी किया, लेकिन विभाग पर कोई असर नहीं पड़ा। यही नहीं पिछली 11 अक्तूबर को स्वास्थ्य निदेशक प्रशासन एसके रिजवी ने एक पत्र जारी कर आदेश दिया कि यदि आरक्षण का पालन नहीं किया जा रहा है तो भर्तियों को रद्द माना जाए। यह आदेश आते ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया था। इसी आदेश के दो दिन बाद शासन ने पूरे प्रदेश में संविदा भर्ती पर रोक लगा दी थी। बताते हैं कि सीएमओ कार्यालय में बिना कैटेगरी के भर्ती प्रक्रिया में जुटे एनआरएचएम के नोडल अधिकारी शासन से लगी रोक के बाद हाथ पैर मारने में जुट गए। शासन ने विवादित जिलों को छोड़कर भर्ती की प्रक्रिया को पूरी करने का आदेश दिया है। शासन ने मानक के अनुरूप ही भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दिए हैं। सवाल यह है कि जिले में कैटेगरी तय नहीं की गई है, जबकि हाईकोर्ट का आदेश है कि बिना कैटेगरी तय किए किसी भी प्रकार की भर्ती नहीं हो सकती है। फिलहाल शासन की हरी झंडी मिलने के बाद विभाग के अधिकारी किसी न किसी तरह संविदा भर्ती की सूची जारी करने की रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
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