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Raebareli News: 90 करोड़ खर्च, बिजली व्यवस्था जस की तस
Tue, 12 Aug 2025 01:15 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
Updated Tue, 12 Aug 2025 01:15 AM IST
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जगतपुर क्षेत्र में इस तरह लटकते बिजली के तार।
रायबरेली। जिले में बिजली व्यवस्था को बेहतर करने के लिए केंद्र सरकार की योजना रिवैंप डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) से लोगों को राहत नहीं मिल पाई है। विभागीय अभियंता और कार्यदायी एजेंसी काम कराने के बदले 90 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है, लेकिन अब तक बिजली के हालात नहीं सुधरे। कहीं फॉल्ट, तो कहीं लो वोल्टेज की समस्या से पांच लाख उपभोक्ता जूझ रहे हैं।
जिले में जर्जर लाइनों के तार बदलने, खंभे लगाने, एलटी लाइन में खुले तारों की जगह केबल डालने के लिए केंद्र सरकार ने आरडीएसएस योजना शुरू की थी। पहले चरण में 142 करोड़ रुपये की लागत से जनवरी 2023 में काम शुरू कराया गया था। इस काम को जनवरी 2025 तक पूरा होना था। कार्यदायी एजेंसी और अभियंताओं का दावा है कि ज्यादातर काम हो चुका है। अब तक करीब 90 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया गया है। इसके बावजूद अक्सर बिजली गुल रहती है।
शहर में जहां ट्रिपिंग से लोगों को जूझना पड़ रहा है, वहीं ग्रामीण क्षेत्र में अब भी जर्जर और ढीले तारों की वजह से लोगों को बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। काम कराने की समय सीमा समाप्त होने के बावजूद अब तक काम पूरा नहीं हो पाया है। गदागंज के रामसिंह यादव, जगतपुर के रामप्रसाद, सरेनी के जगदंबा प्रसाद ने बताया कि बिजली संकट से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। मामूली हवा चलने या बारिश होने से बिजली गुल हो जाती है। तेज हवा चली तो कई-कई दिनों तक बिजली संकट से जूझना पड़ रहा है।
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ये होने थे काम
नौ किमी जर्जर तार बदलने के सापेक्ष 33 केवी में 65 मीटर तार बदले गए।
120 किमी 11 केवी नई लाइन के सापेक्ष 85 किमी लाइन बनाई गई।
220 किमी के सापेक्ष 11 केवी जर्जर तार 174 किमी बदले गए।
1380 किमी एलटी तार की जगह 1240 किमी केबल डाली गई।
जल्द काम पूरा कराने के निर्देश
काम में विलंब होने पर कई बार कार्यदायी एजेंसी को पत्र लिखा गया है। एक महीने के अंदर काम पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं। यदि समय से काम पूरा नहीं कराया गया, तो भुगतान से कटौती की जाएगी।
- मुकेश कुमार, अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण मंडल द्वितीय
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जिले में जर्जर लाइनों के तार बदलने, खंभे लगाने, एलटी लाइन में खुले तारों की जगह केबल डालने के लिए केंद्र सरकार ने आरडीएसएस योजना शुरू की थी। पहले चरण में 142 करोड़ रुपये की लागत से जनवरी 2023 में काम शुरू कराया गया था। इस काम को जनवरी 2025 तक पूरा होना था। कार्यदायी एजेंसी और अभियंताओं का दावा है कि ज्यादातर काम हो चुका है। अब तक करीब 90 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया गया है। इसके बावजूद अक्सर बिजली गुल रहती है।
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शहर में जहां ट्रिपिंग से लोगों को जूझना पड़ रहा है, वहीं ग्रामीण क्षेत्र में अब भी जर्जर और ढीले तारों की वजह से लोगों को बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। काम कराने की समय सीमा समाप्त होने के बावजूद अब तक काम पूरा नहीं हो पाया है। गदागंज के रामसिंह यादव, जगतपुर के रामप्रसाद, सरेनी के जगदंबा प्रसाद ने बताया कि बिजली संकट से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। मामूली हवा चलने या बारिश होने से बिजली गुल हो जाती है। तेज हवा चली तो कई-कई दिनों तक बिजली संकट से जूझना पड़ रहा है।
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ये होने थे काम
नौ किमी जर्जर तार बदलने के सापेक्ष 33 केवी में 65 मीटर तार बदले गए।
120 किमी 11 केवी नई लाइन के सापेक्ष 85 किमी लाइन बनाई गई।
220 किमी के सापेक्ष 11 केवी जर्जर तार 174 किमी बदले गए।
1380 किमी एलटी तार की जगह 1240 किमी केबल डाली गई।
जल्द काम पूरा कराने के निर्देश
काम में विलंब होने पर कई बार कार्यदायी एजेंसी को पत्र लिखा गया है। एक महीने के अंदर काम पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं। यदि समय से काम पूरा नहीं कराया गया, तो भुगतान से कटौती की जाएगी।
- मुकेश कुमार, अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण मंडल द्वितीय