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10 माह में लाखों का वेतन निकाला, पीड्रियाट्रिक आईसीयू में ताला
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रायबरेली। जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) व एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से ग्रसित बच्चों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में पीडियाट्रिक आईसीयू (पीआईसीयू) बनकर तैयार है।
10 माह से 19 लोगों के स्टाफ को भी वेतन दिया जा रहा है, लेकिन अब तक पीआईसीयू का मकसद सफल नहीं हो पाया है। यहां ताला लटका है।
लाडलों को हाईटेक इलाज की सुविधा देने के नाम पर अब तक लाखों रुपये वेतन के नाम पर खर्च कर दिए गए, लेकिन जिला अस्पताल प्रशासन सुविधा देने में नाकाम साबित हुआ है।
जेई और एईएस से प्रदेश में प्रभावित जिलों में रायबरेली भी शामिल हैं। इन जिलों में बच्चों के इलाज के लिए समुचित व्यवस्था न होने पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से पीडियाट्रिक आईसीयू का निर्माण कराया गया है।
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करीब 70 लाख रुपये की लागत से आईसीयू के भवन के निर्माण पिछले साल जुलाई में ही पूरा हो गया था। 10 बेड के आईसीयू में लाडलों के इलाज के लिए हाईटेक व्यवस्था होनी थी।
पीआईसीयू के लिए 19 लोगों का स्टाफ भी अलग से तैनात किया गया, लेकिन अब तक इसे शुरू नहीं कराया जा सका है। 10 माह में लाखों रुपये इनके वेतन पर खर्च हो चुका है। इससे जिला अस्पताल की मनमानी उजागर हो गई है।
पीआईसीयू के सात कर्मचारियों ने दिया इस्तीफा
10 माह बाद भी पीआईसीयू के शुरू न होने के बाद 19 नर्सिंग स्टाफ में से सात ने काम छोड़ दिया है। शेष जो बचे भी हैं, उनसे अस्पताल प्रशासन दूसरा काम ले रहा है।
यही नहीं वार्डों में भर्ती मरीजों का इलाज करने के लिए स्टाफ नर्सें कम हैं, लेकिन एक स्टाफ नर्स को अल्ट्रासाउंड सेंटर में तैनात कर दिया गया है। इससे भर्ती रोगियों को इलाज के लिए बेहाल होना पड़ रहा है। इसकी शिकायत भी की गई, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने उसे दबा दिया।
जिला अस्पताल में पीडियाट्रिक आईसीयू का भवन तैयार है। पर्याप्त स्टाफ भी उपलब्ध है। उपकरणों की व्यवस्था न हो पाने से उसे शुरू नहीं कराया जा सका है। जल्द ही उपकरणों की व्यवस्था होने के बाद उसे शुरू कराया जाएगा।
डॉ. एनके श्रीवास्तव, सीएमएस जिला अस्पताल
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10 माह से 19 लोगों के स्टाफ को भी वेतन दिया जा रहा है, लेकिन अब तक पीआईसीयू का मकसद सफल नहीं हो पाया है। यहां ताला लटका है।
लाडलों को हाईटेक इलाज की सुविधा देने के नाम पर अब तक लाखों रुपये वेतन के नाम पर खर्च कर दिए गए, लेकिन जिला अस्पताल प्रशासन सुविधा देने में नाकाम साबित हुआ है।
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जेई और एईएस से प्रदेश में प्रभावित जिलों में रायबरेली भी शामिल हैं। इन जिलों में बच्चों के इलाज के लिए समुचित व्यवस्था न होने पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से पीडियाट्रिक आईसीयू का निर्माण कराया गया है।
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करीब 70 लाख रुपये की लागत से आईसीयू के भवन के निर्माण पिछले साल जुलाई में ही पूरा हो गया था। 10 बेड के आईसीयू में लाडलों के इलाज के लिए हाईटेक व्यवस्था होनी थी।
पीआईसीयू के लिए 19 लोगों का स्टाफ भी अलग से तैनात किया गया, लेकिन अब तक इसे शुरू नहीं कराया जा सका है। 10 माह में लाखों रुपये इनके वेतन पर खर्च हो चुका है। इससे जिला अस्पताल की मनमानी उजागर हो गई है।
पीआईसीयू के सात कर्मचारियों ने दिया इस्तीफा
10 माह बाद भी पीआईसीयू के शुरू न होने के बाद 19 नर्सिंग स्टाफ में से सात ने काम छोड़ दिया है। शेष जो बचे भी हैं, उनसे अस्पताल प्रशासन दूसरा काम ले रहा है।
यही नहीं वार्डों में भर्ती मरीजों का इलाज करने के लिए स्टाफ नर्सें कम हैं, लेकिन एक स्टाफ नर्स को अल्ट्रासाउंड सेंटर में तैनात कर दिया गया है। इससे भर्ती रोगियों को इलाज के लिए बेहाल होना पड़ रहा है। इसकी शिकायत भी की गई, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने उसे दबा दिया।
जिला अस्पताल में पीडियाट्रिक आईसीयू का भवन तैयार है। पर्याप्त स्टाफ भी उपलब्ध है। उपकरणों की व्यवस्था न हो पाने से उसे शुरू नहीं कराया जा सका है। जल्द ही उपकरणों की व्यवस्था होने के बाद उसे शुरू कराया जाएगा।
डॉ. एनके श्रीवास्तव, सीएमएस जिला अस्पताल